बजट में प्रोत्साहन प्रावधान की जरूरत

कपड़ा एवं परिधान निर्यात 

रमाकांत चौधरी 

नई दिल्ली-आज भारतीय कपड़ा एवं परिधान के निर्यात को बढावा देने की बेहद आवश्यकता है।जिसके सहारे भारतीय कपड़ा एवं परिधान उद्योग को मंदी से समय रहते उबारा जा सकेगा।जिसको लेकर भारतीय कपड़ा एवं परिधान के निर्यातकों सहित उद्यमियों की तरफ से आम बजट में निर्यात प्रोत्साहन स्कीम योजना का प्रावधान करने को लेकर उत्सुकता बढ गई है और अभी से चौतरफा ध्यान केद्रित की हुई है ताकि समय रहते कपड़ा एवं परिधान के निर्यात को बढावा मिल सकेगा।ज्ञातव्य हो कि मोदी सरकार की तरफ चालू वित्तीय वर्ष में कपड़ा व परिधान का निर्यात लक्ष्य 48 अरब डॉलर निर्धारित किया गया है।जबकि वित्तीय वर्ष 2025 तक कपड़ा व परिधान का निर्यात लक्ष्य 20 लाख करोड़ रुपए को पार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 दरअसल आज भारतीय कपड़ा एवं परिधान के निर्यात को बढावा देने की बेहद आवश्यकता है।जिससे घरेलू कपड़ा व परिधान उद्योग को मंदी से उबारा जा सकेगा।जिससे घरेलू कपड़ा एवं परिधान उद्योग में रोजगार की रफ्तार को सुधारा जा सकेगा।जिसको लेकर मोदी सरकार की तरफ से आम बजट में कपड़ा एवं परिधान के निर्यातकों को लेकर विशेष प्रोत्साहन स्कीम योजना का प्रावधान किया जाए ताकि कपड़ा एवं परिधान के निर्यात की रफ्तार में गति दी जा सकेगी।जिसके तहत कपड़ा एवं परिधान उद्योग जगत को बंदरगाह तक ट्रांसपोर्ट की सस्ती सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि अधिकाधिक निर्यात किया जा सकेगा।इसके साथ ही कपड़ा एवं परिधान के निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर नए उभरते बाजारों जैसे देश में रोड शो आदि करने को लेकर प्रोत्साहन स्कीम की शुरुआत किया जाए जिससे भारतीय निर्यातकों को निर्यात के अच्छा खास आर्डर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।वहीं कपड़ा एवं परिधान के निर्यातकों को निर्यात से संबंधित धन की कमी को दूर करने को लेकर सस्ती ऋण की व्यवस्था की जाए ताकि बेरोकटोक तरीके से भारतीय निर्यातक कपड़ा एवं परिधान के निर्यात की ओर उन्मुख हो सकेंगे।जिससे भारतीय कपड़ा एवं परिधान उद्योग को भी मंदी से उबारा जा सकेगा।जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के हालात में सुधार हो सकेगा।जिसकी आज काफी आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी की तरफ से नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती मिलेगी वह तो आगे दिखलाई देगा।बहरहाल भारतीय कपड़ा एवं परिधान उद्योगों पर नोटबंदी के चलते अवश्य आर्थिक मंदी की जबरदस्त मार पड़ी है।जिसके तहत नकदी संकट के चलते उत्पादकों की तरफ उत्पादन में कटौती की गई।जिससे स्वभाविक है कि कपड़ा एवं परिधान क्षेत्र में कामगारों को मजबूरन बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा है और ऐसी स्थिति में मजदूरों को भी मजबूरन गांव की तरफ पलायन करना पड़ा है।जिसके चलते कपड़ा एवं परिधान उद्योग में आगामी ग्रीष्मकालीन मौसम को लेकर उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है।जिससे भारतीय कपडा व परिधान के निर्यातकों को भी विशेष रुप से जूझना पड़ रहा है।जिसको लेकर मोदी सरकार को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि स्थिति समय रहते सामान्य बन सकेगी।  

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