रेडीमेड महिला परिधानों की तेजी से बढ़ती बिक्री

हमारे प्रतिनिधि

मुंबई। गार्म़ेंट्स उद्योग में विद्यमान मंदी के विपरीत अग्रणी भारतीय वूमन्स वेयर ब्रांडस ने तेजी से प्रगति दर्शायी है। युवा महिलाएं अब दर्जी के पास वत्र सिलाने के बजाय उचित भाव या डिस्काउंट पर बिकते रेडी-टू-वेयर स्टाइलिश डिजाइन के वत्र खरीदना अधिक पसंद कर रही है ।

देश में एथनिक ब्रांड के उत्पादक टीसीएनएस क्लोदिंग (डब्ल्यू और ओरेलिया ब्रांड के निर्माता) बीबा, हाउस ऑफ अनिता डोंगरे (एचएनडी और ग्लोबल देसी ब्रांडस) और रितु कुमार ने गत वित्तीय वर्ष में अपने रेवेन्यू में 14 से 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके मुकाबले भारतीय एपरेल्स मार्केट की विकास दर 8 प्रतिशत ही सीमित रह गई थी।

इन 4 कंपनियों की बिक्री हालांकि गिनें तो एपरेल रिटेल चेन शॉपर्स स्टॉप, लाइफ स्टाइल, इंटरनेशनल और टाटा वेस्ट साइड से अधिक है। इसके मुकाबले उपरोक्त चार कंपनियों का धंधा पिछले दो वर्ष में लगातार दोगुना हो गया है। 

उपभोक्ता एथनिक वेयर या वेस्टर्न वेयर में कोई भेद नहीं कर रहे है । अब समकालीन भारतीय वेयर का मार्केट बढ़ता जा रहा है।

डब्ल्यू और ओरेलिया ब्रांड्स के निर्माता की 2015-16 में बिक्री 65 प्रतिशत बढ़कर 551 करेड रू. हो गई है। पिछले पांच वर्ष़ों में कामकाज तीन गुना बढ़ा है।

टीसीएनएस क्लोदिंग, बीबा, हाउस ऑफ अनिता डोंगरे और रितु कुमार - ये दो दशकों से अधिक पुरानी कंपनियां है । पिछले तीन वर्ष में इन कंपनियों ने प्राइवेट इक्विटी निवेश को आकर्षित किया है। एवरस्टोन कैपिटल ने रितु कुमार में 100 करोड़ रु. निवेश कर इसका हिस्सा प्राप्त किया है। वॉरबग पीनट्स और फेयरिंग कैपिटल ने बीबा एपरल्स में 300 करोड़ रु. निवेश कर हिस्सा प्राप्त किया है। 

जनरल एटलांटिक ने एस एंड की डिजाइंस में 150 करोड़ रु. निवेश कर इसका हिस्सा प्राप्त किया। हाल ही में यूएस स्थित निजी इक्विटी फर्म टीए एसोसिएट्स ने टीसीएनएस क्लोदिंग में 937 करोड़ रु. का निवेश किया है। 

ऑनलाइन शॉपिंग के क्रेज से भी ये ब्रांड्स छोटे शहरों के उपभोक्ताओं तक अपनी पहुंच बना सके हø। ऑनलाइन रिटेलिंग अब उनकी बिक्री का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बन

गई है। बीबा की बिक्री 2015-16 में 15 प्रतिशत बढ़कर 441 करोड़ रु. हो गई है।

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