जीएसटी को लेकर गतिरोध कायम

हमारे संवाददाता

नई दिल्ली । मोदी सरकार के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल की अगली  बैठक जो 16 जनवरी 2016 को होगी।जिसमें राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।जिस बैठक में करदाताओं पर नियंत्रण के मुद्दे को हल करने का पूरजोर प्रयास किया जाएगा।जिसको लेकर मोदी सरकार के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में व्यापार होने पर राज्यों को कर लगाने के अधिकार संबंधी मुद्दे को भी अंतिम रुप देने की कोशिश होगी।उन्होंने कहा कि हम जीएसटी को अगले वित्तीय वर्ष के शुरु से लागू करने को लेकर सभी तरह की परेशानियों से अवगत है क्योंकि अब समय काफी कम है।उन्होंने कहा कि हम राज्यों से कर राजस्व की प्राप्ति को लेकर मासिक आंकड़े देने को कहा है ताकि नोटबंदी के चलते उनके प्रभाव को स्पष्ट रुप से देखा जा सकेगा।उन्होंने कहा कि जीएसटी के मामले में जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में इन मुदृदों पर समाधान नहीं निकला।जिसको लेकर गैर भाजपाशासित राज्यों की तरफ से कहा जा रहा है कि अब जीएसटी सितम्बर से लागू होने की उम्मीद है।इसीबीच जीएसटी को लेकर केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने कहा कि जीएसटी काउंसिल के समक्ष अभी राज्यों के क्रियान्वयन के बाद मुआवजे के वित्त पोषण तथा राज्यों की एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी)में भागीदारी के मुद्दे अटके हुए है ।जिस पर काफी प्रयास करने के बाद जीएसटी को सितम्बर में क्रियान्वयन करना संभव हो पाएगा।

उन्हेंने कहा कि कुछ राज्य चाहते है कि ऊंचे कर दायरे में जीएसटी से मिलने वाले राजस्व को राज्य और केद्र के बीच 60:40 अनुपात में बांटा जाए।हालांकि इस समय इसको लेकर 50:50 का अनुपात तय किया गया है।जिसके तहत चार अलग अलग दरें तय की गई है।जिसके तहत सबसे ऊंची दरें 28 प्रतिशत की है।जिसमें से कितना केद्र का और कितना राज्यों का हिस्सा होगा।जिसको लेकर कानून में परिभाषित नहीं किया गया है।ऐसे में मान लिया गया है कि 50:50 प्रतिशत का हिस्सा होगा।उन्होने कहा कि आजादी के बाद से ही केद्र और राज्यों के बीच वित्तीय असंतुलन है और यह लगातार बढ रहा है।जिससे राज्यों के अधिकारों में कटौती हो रही है।उन्होंने कहा कि इस चीज को इस तरह से सुधारा जा सकता है कि राज्यों का जीएसटी में हिस्सा 60 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएऔर कई राज्यों ने इसका समर्थन किया है।केद्र सरकार की तरफ से इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।बहरहाल इस पर बाद में चर्चा करना तय है।उन्होंने कहा कि जीएसटी को जून-जुलाई में क्रियान्वयन करने को लेकर आशान्वित नहीं हूं।जीएसटी एक नया कर है जिसमें काफी जटिलताएं है ।ऐसे में पूरी तैयारी के बाद ही इस पर आगे बढा जाए।उन्होंने कहा कि मेरी समझ में जीएसटी सितम्बर से क्रियान्वयन हो पाएगा।उन्होंने कहा कि केद्र व राज्यों के बीच जीएसटी को लेकर अवश्य तालमेल बढ रहा है।जिसके तहत कुछ चीजों पर फिर से विचार करने को केद्र सरकार तैयार हø।जिसके तहत केद्र सरकार जीएसटी को लेकर एक कदम पीछे हटने को भी तैयार है।ऐसे में मेंरा मानना है कि जीएसटी को लेकर केद्र व राज्यों के बीच सहमति बन जाएगी।उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन की एक व्याख्या के अनुसार आईजीएसटी कर केद्र सरकार द्वारा लगाया,जुटाया और निर्दिष्ठ किया

जाएगा। हालांकि पिछले बैठक में राज्यों की तरफ से कहा गया है कि आईजीएसटी को राज्यों की भागीदारी तथा दोहरे नियंत्रण के बिना लागू नहीं किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि कुछ राज्य 1.5 करोड़ रुपए से कम कारोबार करने वाले करदाताओं पर अपने नियंत्रण की मांग पर टिके हुए है ।जिसके तहत कुल राजस्व में ऐसे करदाताओं का हिस्सा 15 प्रतिशत है।उन्होंने कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्र यानि सेज राज्यों के क्षेत्र में आता है।बहरहाल इसे स्वतंत्र क्षेत्र माना जाता है।इसके साथ ही जीएसटी कानून में तटवर्ती जलक्षेत्र के मामले में दिया जा सकता है।जिसको लेकर केद्र इस स्थिति को स्वीकार करता दिख रहा है।हालांकि इस मुद्दे पर केद्र की तरफ से कुछ कहा नहीं गया है।बहरहाल जीएसटी की अगली बैठक में इस पर कुछ अवश्य कहा जाएगा।

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