प्रथम छमाही में आर्थिक विकास दर 7 प्र. श. रहने का अनुमान

वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद 

रमाकांत चौधरी 

नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर की स्थिति काफी बेहतर होगी।चूंकि कालेधन पर अंकुश लगाने को लेकर किए गए मोदी सरकार की तरफ से नोटबंदी जैसे उपायों से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद परिलक्षित हो रही है।जिसके तहत अगले वित्तीय वर्ष के प्रथम छमाही में देश की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया जा रहा है।

      दरअसल पिछले दिनों मोदी सरकार के वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में वित्तीय स्थिरिता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की बैठक में देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों और प्रमुख मुद्दों का गंभीरता पूर्वक जायजा लिया गया।जिसमें वित्त मंत्री की तरफ से एफएसडीसी के सदस्यों और वित्तीय क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ आम बजट 2017-18 को लेकर गंभीरता पूर्वक विस्तारित रुप से चर्चा की गई।जिसमें कहा गया कि भारत आधारभूत आर्थिक संकेतकों के सुधार के साथ अर्थव्यवस्था काफी बेहतर स्थिति में है।एफएसडीसी की बैठक में वित्त मंत्रालय के सभी सचिव और आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल,वित्तीय क्षेत्र के अन्य नियामक भी मौजूद थे।जिसके तहत एफएसडीसी की तरफ से बøकों के फंसे कर्ज की स्थिति की समीक्षा भी की गई।जिसको लेकर वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि भारत मैक्रो इकॉनोमिक संकेतकों सुधार के साथ आज आर्थिक दृष्टि से काफी बेहतर स्थिति में है।एफएसडीसी की तरफ से यह भी कहा गया कि कालेधन को समाप्त करने को लेकर नोटबंदी सहित मोदी सरकार की तरफ से किए गए उपायों के आगामी दिनों में जीडीपी और राजकोषीय संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे।एफएसडीसी की इस बैठक में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम की तरफ से देश की अर्थव्यवस्का को लेकर एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।इसके अतिरिक्त वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की तरफ से आम बजट के संबंध में अपने सुझाव भी दिए गए।एफएसडीसी की तरफ से बøकिंग क्षेत्र में फंसे कर्ज की समस्या पर चर्चा करते हुए मोदी सरकार की तरफ से इस दिशा में किए गए प्रयासों की चर्चा भी की गई।इस बैठक में वित्त सचिव अशोक लवासा,आर्थिक कार्य विभाग के सचिव शशिकांत दास,वित्तीय सेवा विभाग की सचिव अंजुली चिब दुग्गल,राजस्व सचिव हंसमुख अढिया,विनिवेश सचिव नीरज कुमार गुप्ता, सेबी के अध्यक्ष यू के सिन्हा,इरडा के अध्यक्ष टीएस विजयनऔर पीएफआरडीए के अध्यक्ष हेमंत जी कांट्रेक्टर भी मौजूद थे।इस बैठक में अगले वित्त वर्ष की प्रथम छमाही में देश की आर्थिक विकास दर लगभग सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया।हालांकि कई अर्थशात्री नोटबंदी के फैसले के चलते विकास दर पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जता रहे थे।बहरहाल इस ताजा आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था को लेकर काफी सकारात्तमक है।जिसको लेकर जिसको लेकर वित्त मंत्री  श्री अरुण जेटली ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक स्थिति में है।हालांकि एफएसडीसी की बैठक में वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट की चर्चा में अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि नोटबंदी का असर उतना नहीं होगा जितना की आशंका जताई जा रही थी। इस बैठक में अधिकारियों की तरफ से स्वीकार किया गया है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पहले के अनुमानों 7.75 प्रतिशत से कम रहेगी।यद्यपि चालू वित्ती वर्ष की अंतिम तिमाही जनवरी-मार्च 2017 में ग्रौथ रेट घटकर चार प्रतिशत के आसपास रह सकती है।चंकि नोटबंदी के चलते प्रचलन से लगभग 86 प्रतिशत करेंसी खींच ली गई।जिससे समानांतर अर्थव्यवस्था को समाप्त करने और राजस्व को बढाने के साथ बøक खातों व डिजिटल ट्रांसजेक्शन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के मकसद से यह फैसला किया गया।     

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