टेक्सटाइल उद्योग में निवेश करने का उचित समय

मुंबई। इस सप्ताह `कॉटनगुरु' ने भारत की टेक्सटाइल कमिश्नर  (डा.) श्रीमती कविता गुप्ता से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान बहुत सारे मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें मुख्य मुद्दा था भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में निवेश के अवसर। श्रीमती गुप्ता का दृढ़ता से यह मानना है कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में निवेश करने का यह सही समय है, जिसमें निवेशक सरकार से पूरी मदद की अपेक्षा रख सकते हø। श्रीमती गुप्ता ने तकनीकी (गठट्टड्डड्ढट्टञण्) टेक्सटाइल में भी निवेश करने पर बल दिया है। उन्होंने बताया कि आज भारत में करीब 2200 टेक्नीकल टेक्सटाइल के युनिट हø पर यह संख्या मांग के सामने बहुत ही कम है। हालांकि टेक्नीकल टेक्सटाइल में निवेश ज्यादा लगता है, पर इनमें मार्जिन भी बहुत अच्छे हø।

मुलाकात के दौरान `कॉटनगुरु'  ने बांगलादेश से रेडीमेड कपड़ों (ख्रक्उ) के हो रहे शुल्क-मुक्त आयात के मुद्दे पर भी चर्चा की। कुछ वर्ष़ों पहले भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहजी ने एक व्यापार समझौते के तहत बांग्लादेश के रेडीमेड कपड़ों को शुल्क-मुक्त (गञxठ्ठज्ञठठ)  कर दिया था। इसके सामने, यह उम्मीद थी कि बांग्लादेश भारत मे कपास, सूत और ग्रे फैब्रिक की आयात बढ़ाएगा, पर ऐसा नहीं रहा है। पिछले कुछ वर्ष़ों से भारतीय कपास, सूत और फैब्रिक की आयात में कमी देखी जा रही है। दूसरी ओर, चीन बांग्लादेश का उपयोग भारत में रेडीमेड कपड़ों को शुल्क-मुक्त निर्यात करने के लिए कर रहा है ऐसा प्रतीत होता है। इससे भारतीय गार्मेन्ट उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। इससे भारतीय गार्मेन्ट उद्योग की भारी नुकसान हो रहा है। `कॉटनगुरु' ने उद्योगपतियों से बातचीत करके श्रीमती गुप्ता को यह निवेदन किया कि रेडीमेड गार्म़ेंट की शुल्क-मुक्त आयात बंद कर दें अथवा कम से कम बांग्लादेश पर यह बंदिश डालें कि सिर्फ भारतीय कपास/सूत/फैब्रिक से बने हुए रेडीमेड गार्म़ेंट को ही शुल्क-मुक्त का लाभ होगा। इससे भारतीय उद्योग को इस व्यापार समझौते से लक्षित लाभ प्राप्त हो सकेगा।

रुई बाजार के लिए पिछला सप्ताह बहुत ही सक्रिय और सूचक रहा। रुई बाजार में ऐसी कई चीजें हो रही हø जिनका प्रभाव कपास और रुई की कीमतों पर तत्काल और दीर्घकालिक समय के लिए हो सकता है।

भारत : होली उत्सव के दौरान बाजार और बøक दोनों 3-4 दिन तक बंद रहने से कपास की आवक में काफी कमी हुई है। होली में नगण्य आवक होने के बाद अभी भी रोजाना आवक 1.60 लाख गांठ से घटकर 1.25 लाख गांठ हो गई है। जिनरों और स्पिनरों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है कपास की गुणवत्ता पिछले कुछ दिनों से कपास की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता में भी भारी गिरावट आई है। एक तो भारत में कपास और रुई परीक्षण की कोई कुशल प्रणाली नहीं है और दूसरी ओर `चलता है, चलने दो वालों मानसिकता के कारण गुणवत्ता के मामले में बेचवाल और लेवाल की विवाद बढ़ने की संभावना है।

इस सप्ताह रुई खरीदी में सूत मिलों में काफी रुचि दिखाई दे रही है। सूते के बढ़े हुए दाम, कपास की घटती आवक और बहुत ही सीमित रुई का स्टॉक मिलों में होने के कारण रुई और डॉलर की कीमत में आई भारी गिरावट से सभी निर्यातकार परेशान हो गए हø। रुई और सूते के ऊंचे दाम और डॉलर की नरमी को देखते हुए निर्यात में कमी आ सकती है। कुछ मिलवालों का कहना है कि रुई की आयात में बढ़ोत्तरी होगी। अभी तक करीब 20-22 लाख गांठ के आयात सौदे हुए हø। जिसमें से 10 लाख गांठ भारत में आ चुकी है।

घरेलू रुई बाजार में कल से फिर सुधार नजर आ रहा है। हाजिर में गुजरात शंकर-6 42800 से 43600, महाराष्ट्र बन्नी 42500 से 43500, तेलंगाना बन्नी 43000 से 43800 और कर्नाटक/मध्य प्रदेश में ।़ॐऊ 57000 से 59500 के भाव से व्यापार हो रहे हø।

विदेश : अमरीकी रुई के निर्यात शिपमेंट में फिर से बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले सप्ताह के मुकाबले इस सप्ताह 27 प्र.श. की बढ़त होने से आंतर्राष्ट्रीय बाजार में ताकत वापस लौट रही है। सप्ताह की शुरुआत में घट रहे बाद में कल से मजबूती दिख रही है। Iॐअ में वायदा 76.17 और जुलाई वायदा 79.12 सेन्ट प्रति पाउण्ड के भाव पे बंद हुए थे। चीन में चल रहे रिजर्व स्टॉक की नीलामी को अपेक्षित अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। चीन के रुई आयात में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है। फरवरी, 2017 में 2016 के मुकाबले चीनने 146 प्र.श. ज्यादा रुई आयात की है।

पाठकों से अनुरोध है कि बाजार की चाल के विषय में कोई भी निर्णय लेने से पहले इन सभी घटनाओं एवं समाचारों का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करें।

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