कैशलेस अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार सक्रिय
कार्ड से लेन-देन पर सेवा शुल्क समाप्त होने के संकेत

हमारे संवाददाता

नई दिल्ली । नगदी रहित अर्थव्यवस्था को बढावा देने लेकर मोदी सरकार की तरफ से कार्ड से लेनदेन करने पर लगने वाले शुल्क को समाप्त करने के संकेत है।जिसको लेकर कालेधन पर न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमबी शाह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी की तरफ से मोदी सरकार को कुछ तरह का सुझाव दिया है।ऐसे में मोदी सरकार की तरफ से यदि एसआईटी के सुझाव को स्वीकार कर लेती है तो क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाला भारी लेनदेन शुल्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।चूंकि शाह पैनल की तरफ से नियमित तौर पर टैक्स अदा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को लेकर चिकित्सा बीमा,जीवन बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया है।जिसको लेकर इस संबंध में अहमदाबाद में 11 मार्च को मोदी सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी।जिसके तहत ई-भुगतान पर लेवी समाप्त करने का सुझाव इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि बøक और ई गेटवे मुहैया कराने वाली कम्पनियां रोजाना होने वाले करोड़ों रुपए के लेनदेन बड़ी कमाई करते हø।जिसके तहत जनवरी में सिर्फ गुजरात में ही 2.95 करोड़ ई भुगतान हुए।जिसमें केडिट व डेबिट कार्ड और प्वाइúट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनां के माध्यम से कुल 5838 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ।जिसके तहत जनवरी में पूरे देश में 115 करोड़ रुपए ई भुगतान किए गए।वैसे भी डिजिटल भुगतान को बढावा देने को लेकर आरबीआई पहले ही भुगतान शुल्क में भारी कटौती कर चुका है।उल्लेखनीय है कि देश के केद्रीय बøक ने डेबिट कार्ड 1000 रुपए के भुगतान करने पर 0.25 प्रतिशत,2000 रुपए तक के भुगतान पर 0.50 प्रतिशत,2000 रुपए से अधिक के भुगतान पर एक प्रतिशत,केडिट कार्ड से 1000 रुपए तक के लेनदेन पर 25 रुपए कारोबारी छूट दर (एमडी आर) तय कर दिया गया है।जिसके तहत प्रत्येक कार्ड से लेनदेन पर बøक को मिलने वाला कमीशन एमडीआर कहलाता है।