जीएसटी के चार विधेयकों को वित्त विधेयक के रूप में किया जाएगा पेश
हमारे प्रतिनिधि

नई दिल्ली। चार प्रस्तावित कानून (राज्य जीएसटी विधेयक को छोड़कर) को केद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद उसे वित्त विधेयक के रूप में पेश किया जायेगा।  संसद के दोनों सदनों में जीएसटी से संबंधित चार प्रस्तावित विधेयक सरलता से पारित हों उसके लिए इन विधेयकों को वर्तमान बजट सत्र में वित्त विधेयक के साथ एनडीए सरकार द्वारा एक साथ पेश किये जाने की संभावना है। जिससे एक जुलाई से जीएसटी का अमल किया जा सके।

लोकसभा में एक वित्त विधेयक को मंजूरी की आवश्यकता है जहां एनडीए सरकार का बहुमत है। बøकिंग सिस्टम में दबाव के तहत की पूंजी के साथ निपटने के लिए पब्लिक सेक्टर एसेट रिहैबिलिटेशन एजेंसी अथवा बैड बøक स्थापित करना है या नहीं, उसके बारे में वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बøक विचार–विमर्श कर रहा है। 

चुनाव परिणाम से उत्साहित होकर मोदी सरकार श्रम विधेयकों को आगे ले जाना चाहती है। रोजगार के नियम को सरल बनाने और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ सर्जित करने हेतु 44 औद्योगिक कानूनों को चार कोड में बदलने का सुझाव श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रय ने किया है।

इसी बीच, ऐतिहासिक टैक्स के सुधार के अमल के लिए विधेयक को समर्थन देने वाले दो विधेयकों को जीएसटी काउंसिल ने गुरुवार को मंजूरी दी। यह संगठित बाजार सर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ने के भारत की दीर्घकालीन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है और एक जुलाई से जीएसटी के अमल के लिए महत्वपूर्ण है।

शीतल पेय और कार पर 15 प्रतिशत सेस निश्चित की गई है। इसका अर्थ यह है कि इन पर 43 प्र. श. से अधिक (टैक्स दर 28 प्र.श. प्लस 15 प्र. श. सेस) सेस लागू नहीं होगा। 

सिगरेट और तम्बाकू के मामले सेस 290 प्रतिशत अथवा 1000 सिगरेट के लिए 4170 रु. अथवा दोनों हो सकता है। एसईजेड में उत्पादित आइटमों को निर्यात आइटमों के समकक्ष मानकर टैक्स लेने का निर्णय भी जीएसटी काउंसिल ने किया था। काउंसिल की बैठक के बाद वित्तमंत्री जेटली ने कहा कि काउंसिल ने अब सभी 5 विधेयकों को मंजूरी दे दी है और उसके द्वारा संसद में राज्य विधानसभाओं में इन विधेयकों को पेश करने का मार्ग प्रशस्त किया है।