मोन्सान्टो बिनौला का प्रतिबंधित जीएम बीज प्रविष्ट करा रही है

मोन्सान्टो बिनौला का प्रतिबंधित जीएम बीज प्रविष्ट करा रही है
जीईएसी की मंजूरी की परवाह किए बगैर

मोन्सान्टो का गेम प्लान: एक बार इस बीज का प्रसार होने के बाद मंजूरी के लिए सरकार पर दबाव

वीरेद्र पारेख

मुंबई। बीटी काटन की जबदस्त विफलता के बाद भी अमेरिकन बहुराष्ट्रीय कंपनी मोन्सान्टो ने भारत में किसी भी तरह से जेनेटिकली मोडीफाइड (जीएम) बीज दाखिल करने का प्रयास छोड़ा नहीं है। अदालत की मनाई की उपेक्षा कर और अधिकारियों की मंजूरी लेने की परवाह किए बगैर वह अनेक राज्यों में राउंड अप रेजिस्टेंट फ्लेक्स (आरआरएफ) जीएम बिनौला की बिक्री कर रही है। इसके लिए उसने खुद जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रुवल कमिटी (जीईएसी) की भी मंजूरी नहीं ली है। महाराष्ट्र, आंध्र, तेलंगाना, म.प्र., उड़ीसा और गुजरात को उसने निशाना बनाया है।

आरआरएफ पौधानाशक प्रतिकारक जीन रखने वाला बीटी काटन है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया है। आरआरएफ बीज सिर्फ गैरकानूनी ही नहीं है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के लिए भारी हानिकारक भी है।

प्रतिबंधित राउंड अप रेजिस्टेंट काटन की उपस्थिति का इंडियन कौýसल आफ एग्रिकल्चरल रिसर्च की शाखा सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट आफ काटन रिसर्च ने समर्थन किया है। इस संस्था ने नागपुर जिले के 7 गावों के 9 खेतों से बिनौला का नमूना लिया था। उन सभी में बालगार्ड-2, ईपीएसपीएस और राउंड अप रेडी-फ्लेक्स की उपस्थिति दिखायी दी थी। इस सेम्पल के बीज पर 270 परीक्षण किए गए थे, जिसमें से अधिकांश सकारात्मक प्रतीत हुए थे।

राउंड अप एक ग्लायफोसेट आधारित जंतुनाशक रसायन है जिसे स्वास्थ्य संस्था ने संभावितरूप से कøसरजनक माना है। मोन्सान्टो 1970 से विभिन्न देशों में उसकी बिक्री करती है। राउंडअप रेजिस्टेंट फ्लेक्स (आरआरएफ) जीएम बिनौला की मोन्सान्टो द्वारा विकसित किस्म है, जो  ग्लायफोसेट के असर को सहन कर सकती है।

मोन्सान्टो का खेल ऐसा है कि एक बार आरआरएफ बिनौला बाजार में प्रविष्ट कर देना और किसानों को राउंडअप जंतुनाशक का प्रतिकार कर सकनेवाला रुई उगाने में प्रवृत्त कर देना ताकि कंपनी बड़े पैमाने पर राउंडअप की बिक्री कर सके और फिर इस बीज को किसानों में लोकप्रिय बताकर उसकी मंजूरी के लिए सरकार और जीईएसी पर दबाव डाल सके।

कानूनी रूप से जरूरी जांच और वैज्ञानिक परीक्षणों की परवाह न कर नया बीज सीधे ही किसानों को बेचने के बाद में उसकी मंजूरी करा लेने की मोन्सान्टो की रसम से नाराज स्वदेशी जागरण मंच और सेवाभावी संस्था नवधान्य ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को इस बारे में फौजदारी जांच बैठाने की और मोन्सान्टो से किसानों को हुए नुकसान के लिए दंड और क्षतिपूर्ति वसूल कर उसके कामकाज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

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