टेक्सटाइल उद्योग की जीएसटी दर न्यूनतम रखने की मांग

हमारे प्रतिनिधि

मुंबई। सरकार 1 जुलाई से यार्न, कपड़ा, मेडअप्स और रेडीमेड पर 12 प्रतिशत जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू करने की तैयारी में है। ऐसे में दी क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) ने टेक्सटाइल्स-क्लोदिंग के लिए 5 प्रतिशत का न्यूनतम स्तर जीएसटी में रखने की मांग की है। 

केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को भेजे गए ज्ञापन में सीएमएआई के पेसिडेंट राहुल मेहता ने कहा कि उद्योग के विभिन्न सेगमेंट्स को अब तक करों में छूट दी जाती रही है तथा नई जीएसटी व्यवस्था के तहत अगर कर की दर कम से कम नहीं रखी गई तो उनके लिए भारी चुनौती पेश आ सकती है। ज्ञापन में सर्वप्रथम केंद्रीय मंत्री को उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उद्योग की जीएसटी संबंधी चिंताओं को सुनने के लिए वक्त देने तथा उन्हें वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलाने हेतु धन्यवाद देते हुए श्री मेहता ने कहा कि अब तक उद्योग को विभिन्न स्तरों पर वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराये जाते रहे हø, जिसकी वजह से नियमों और वास्तविक स्तरों पर दरों में भारी अंतर होता है। मौजूदा कर प्रणाली में मैनुफैक्चरिंग लेवल पर टैक्स देना होता है जबकि जीएसटी उपभोक्ता के स्तर पर लागू होगा, जिससे उद्योग और वास्तविक टैक्सेशन लेवल के फर्क में और इजाफा होगा। 

उन्होंने कहा कि उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर, मौजूदा कर प्रणाली में उद्योग करीब 2.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच कर चुकाता है। उद्योग के इस आकलन को अर्न्स्ट एंड यंग वर्किंग्स (ईएंडवाई) ने भी माना है और उद्योग में यह आम सहमति है कि जीएसटी की प्रस्तावित दर उद्योग के लिए 5 प्रतिशत के स्तर पर रखी जाए। श्री मेहता ने कहा कि फिलहाल लगभग 3000 से 3400 करोड़ रु की कर उगाही होती है। हमारा आकलन है कि मात्र 50 प्रतिशत की सम्मति से भी कर उगाही 10000 करोड़ तक पहुंच जाएगी। ईएंडवाई ने भी इसका समर्थन किया है।  

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