यार्न उत्पादक इकाइयों पर बेरोजगारी का संकट
गणपत भंसाली

सूरत। घरेलू बाजार की यार्न उत्पादक इकाइयां तालाबंदी की कगार पर पहुंच गई थी, ओर सरकार की इस नीति का पुरजोर विरोध हुआ था, यह उल्लेखनीय है कि विस्कॉस फिलामेंट यार्न का उपयोग सूरत में बड़े पैमाने पर होता है, एक अनुमान के अनुसार सूरत सहित दक्षिण गुजरात की वीविंग इकाइयों में प्रति माह 3500 टन विस्कॉस यार्न की खपत है, जिसमें 2000 टन घरेलू बाजार की इकाइयों से उत्पादित यार्न तथा 1500 टन यार्न चाइना निर्मित इकाइयों के उपयोग में लिया जाता है, ताज्जुब यह है कि  एंटी डम्पिंग ड्यूटी लागू किए जाने के बावजूद 1500 टन विस्कॉस यार्न का उपयोग स्थानीय वीविंग इकाइयां उपयोग में ले रही हैं।

कल्पना कर कि अगर ये एंटी डम्पिंग ड्यूटी लागू नही होती तो वीविंग इकाइयां निश्चित रूप से शत प्रतिशत आयातित यार्न ही उपयोग में लिया जाता, वाणिज्य मंत्रालय इस बिंदु से बखूबी वाकिफ़ है कि अगर आयातित विस्कॉस यार्न पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी लागू नहीं की गई तो तमाम यार्न उत्पादक इकाइयों पर बेरोजगारी का संकट मंडरा जाएगा, गौरतलब है कि विस्कॉस यार्न उत्पादित फेब्रिक्स में सूरत, भिवंडी, भीलवाड़ा, मुम्बई जैसे पावरलूम केंद्र तो है ही साथ ही साथ डोनियर, रिलायंस, सियाराम, ग्रासिम, रेमण्ड, मफतलाल आदि बड़ी मिलों में निर्मित शूटिंग-शर्टिंग व स्कूली ड्रेस मटेरियल्स में भी यह यार्न बड़े पैमाने पर उपयोग आता है।

विशेष कर मैन मेड फिलामेंट आधारित फैंसी फेब्रिक्स जो नायलॉन आदि के साथ मिश्रित फेब्रिक्स उत्पादन में भी ये यार्न उपयोगी हैं, हालांकि चीन से आयातित विस्कॉस फेब्रिक्स तथा स्कूली ड्रेस मटेरियल्स के आगे घरेलू बाजार के फेब्रिक्स कीमतों के मामले में कहीं नहीं टिक पाते, गत दिनों रेवेन्यू सेक्रटरी हसमुख अढिया के समक्ष कई उद्यमियों ने विस्कॉस यार्न पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी हटाने की मांग रखी थी। बहरहाल वित्त मत्रालय की मजबूरी दोनों ओर हैं, अगर यह एंटी डम्पिंग ड्यूटी हटाएं तो विस्कॉस यार्न उत्पादक इकाइयों के एतराज, ओर नहीं हटाए तो विवर लॉबी की नाराजगी उठानी पड़ती हैं, वित्त मंत्रालय ने भले ही इस कि अवधि एक साल के लिए लम्बाई हो, लेकिन आगे भी इसी नीति को सरकार को मजबूरी वश जारी रखना पड़ेगा, कारण विस्कॉस यार्न उत्पादक इकाइयों की आवाज ज्यादा मुखरित हैं जबकि वीविंग इकाइयों की आवाज मंत्रालय तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी देर हो जाती हैं।