व्यापारियों के सुझाव पर ध्यान केद्रित करने की मांग

जीएसटी की दर निश्चित करने से पूर्व

हमारे संवाददाता 

नई दिल्ली । पिछले दिनों तमिलनाडु व्यापारी संगठन की तरफ से चाøतीसवें व्यापारी दिवस चिन्नई में आयोजित किया गया था। जिसकी अध्यक्षता भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद श्री श्याम बिहारी मिश्रा ने की थी। जिसमें तमिलनाडु सहित देश भर से भारी तादाद में व्यापारियों की wशिरकत की थी और अपनी विभिन्न व्यापारिक समस्याओं को लेकर हुंकार भरी थी।जिसके तहत मोदी सरकार की तरफ से व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं को अनदेखी किए जाने को लेकर निराशा व्यक्त की गई।जिसके  तहत मुख्य रुप से जीएसटी की दरों को अंतिम रुप देने से पूर्व व्यापारियों के सुझाव पर ध्यान केद्रित किए जाने की गुहार लगाई गई।

इस अवसर पर व्यापारियों के अपार समूहों को संबोधित करते हुए भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) के राष्ट्रीय अघ्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद  श्री श्याम बिहारी मिश्रा ने कहा कि मोदी सरकार के गठन के लगभग तीन वर्ष पूर्ण हो गए है लेकिन अब तक व्यापारियों से किए गए वादों पर खरी नहीं उतरी है।ऐसे में यदि ऐसा ही चलता रहा तो व्यापारीवर्ग एक बार फिर आंदोलन करने को लेकर बाध्य हो सकते है ।श्री मिश्रा ने कहा कि सरकारें तो आती है और पांच वर्ष के कार्यकाल पूरा करने के बाद चली जाती है।बहरहाल उनके द्वारा लिए गए निर्णय और उनकी कार्यशैली लंबे समय तक प्रभावी रहती है।ऐसे में  मौजूदा मोदी सरकार भी  ऐसा ही कुछ करने का प्रयास कर रही है।जिसके चलते व्यापारी उससे बहुत सारी उम्मीदें लगा बैठे हø।ऐसी स्थिति में अब मोदी सरकार के हाथ में है कि वह व्यापारियों की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है और फैसले भी  सही है।बहरहाल व्यापारियों के प्रति उसका रवैया निराशाजनक है।जिसके तहत विशेष रुप  से ऐसे मौके पर जब देश बड़े कर बदलाव के दौर से गुजर रहा है।

इस मौके पर बीयूवीएम के चेयरमैन श्री मनोहर लाल कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष मोदी सरकार की तरफ से नोटबंदी का लिया गया निर्णय व्यापार को लूकर कितना घातक सिद्व हुआ है जिसका परिणाम सबके सामने है ।यह बात सरकार भी समझ रही है लेकिन अपने फैसलों में वह व्यापारियों के सुझावों को अनदेखी कर रही है।यह सब अधिक दिन चलने वाला नहीं है क्योंकि समय हमेशा बदलता रहता है।उन्होंने कहा कि पहली जुलाई से जीएसटी लागू होने जा रहा है।ऐसे में इतने बड़े कर बदलाव की तैयारी में भी व्यापारी समाज को अनदेखा और अनसूना किया जा रहा है।जीएसटी के संबंध में व्यापारियों ने  अपनी तरफ से जो सुझाव मोदी सरकार को दिए थे उसे भी दरकिनार कर दिया गया है।उन्होंने कहा कि जैसा कि बताया जा रहा है कि मोदी सरकार की तरफ से इस कर प्रणाली की दरें पांच से लेकर 40 प्रतिशत तक तय कर रखीहै जो कि न सिर्फ हास्याप्रद है बल्कि समाज को लेकर भी घातक है।  

बीयूवीएम कमे राष्ट्रीय महामंत्री श्री विजय प्रकाश जैन ने कहा कि 18-19 मई 2017 को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर की दरों को अंतिम रुप दिया जाएगा।जिसको लेकर व्यापारी समाज चाहता है कि जीएसटी की दरें तय करने से पहले मोदी सरकार की तरफ से व्यापारियों से सलाह मशविरा करें।वैसे भी कर की दरों का सीधा असर समाज के प्रत्येक वर्ग पर पड़ने वाला है फिर वह चाहे उपभोक्ता हो या व्यापारी।श्री जैन ने कहा कि जीएसटी में कई विसंगतियां है ।जिसके तहत समस्त प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि जीएसटी की मूल धारणा ही नीं बची है ।चूंकि एकल कर प्रणाली केबावजूद इसे त्रिसूत्रीय बना दिया गया है।जीएसटी कानून के कई प्रावधान भी पूरी तरह से व्यापारी समाज के खिलाफ है।जिसमें बदलाव के बगैर यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है।छोटी से छोटी त्रुटि को लेकर सजा का प्रावधान किया गया है जो कि गैर प्रासंगिक है।गलती को लेकर आर्थिक  जुर्माना तो लगाया जा सकता है लेकिन इसको लेकर अपराधी मानकर जेल में नहीं डाला जा सकता है यह तो संविधान और मानवाधिकार के भी खिलाफ है।   

बीयूवीएम के दिल्ली प्रदेश के महामंत्री श्री हेमंत गुप्ता ने मोदी सरकार से गुजारिश की है कि वह जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक में व्यापारियों को शामिल करें ताकि इस बड़े कर कानून को बेहतर बनाया जा सकेगा।उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से मोदी सरकार की तरफ से घरेलू व्यापार के विकास या बजट पर चर्चा करने को लेकर उद्योग चैम्बरों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करके उनके सुझावों पर ध्यान केद्रित करती है उसी तर्ज पर घरेलू व्यापार को लेकर समय समय पर व्यापारियों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए जिससे व्यापारियों का भरोसा बढेगा।

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