महागठबंधन के नेता `बंधन'' में...

राजनीति, न्यायतंत्र और रक्षा क्षेत्र- सभी में जोरदार कामकाज हो रहा है। वर्ष 2019 में लोकसभा के चुनाव है, उसकी तैयारी जोरशोर से हो रही है। भाजपा-एनडीए सरकार जनता को परिवर्त्तन और परिणाम बताना चाहती है। रिपोर्ट-कार्ड पेश करने का वचन पूरा करना चाहती है। केंद्र में एनडीए सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे है, उसका उत्सव मनाने की तैयारी चल रही है। सरकार की सफलता- अर्थतंत्र में नोटबंदी और गरीब कल्याण की योजनाओं का प्रचार होगा। कालेधन और कर चोरी के खिलाफ नोटबंदी का प्रहार होने के बाद जनता ने समर्थन दिया और करीब एक करोड़ नाम करदाताओं की सूची में शामिल हुए है । 

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान जारी है, नेताओं का बाल बांका नहीं हो सकता ऐसी मान्यता गलत साबित हुई है। बड़े बड़े नेताओं के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई शुरू हुई है। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि लालू प्रसाद यादव का चारा घोटाला अब फिर से प्रकाश में आया है और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 9 महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। इस घोटाले का असर बिहार की राजनीति- महागठबंधन पर पड़े बगैर नहीं रहेगा। नौ महीने बाद लालू जी को चुनाव के क्षेत्र से हमेशा के लिए संन्यास लेने के बाध्य होना पड़ सकता है। उनके चिरंजीवी सरकार में है और रेती घोटाला-चोरी का आरोप लगा है। नीतीश कुमार या कांग्रेस लालू का बचाव किस तरह करेंगे? 

महागठबंधन का सपना देखने वाले नेता इस समय निशाने पर है । लालू प्रसाद के बाद मायावती और ममता दीदी है । आम आदमी पार्टी के खास आदमी अरविंद केजरीवाल भी `नजर-बंद' है । इन नेताओं के भ्रष्टाचार को उनके ही भागीदार-सहयोगियों ने प्रकाश में लाने का कर्त्तव्य निभाया है। अरविंद केजरीवाल के मंत्री मिश्रा के बाद मायावती का विश्वासपात्र माने जाते नसीरूद्दीन शेख ने आरोप लगाया है कि मायावती ने मेरे पास से 50 करोड़ रुपये मांगा! मायावती इस समय जानी दुश्मन- मार्क्सवादियों का हाथ पकड़ने के लिए तैयार हो गई हø क्योंकि उनकी कुर्सी संकट में है, सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की जांच तो एक ओर रही। इन नेताओं को इनकी ही करतूतों और सहयोगियों ने संकट में डाला है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया जी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में फंसे है और जमाईराजा `मøगोमैन' का विवाद बढ़ता जा रहा है।

ऐसे संयोगों में विपक्ष अब राष्ट्रपति के चुनाव में नरेंद्र मोदी को चुनौती देना चाहता है। अनेक नामों पर चर्चा होने के बाद अब महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी के नाम पर विपक्ष में सहमति हुई है। नरेंद्र मोदी के मन में अन्य नाम होना स्वाभाविक है और राष्ट्रपति भवन में सरकार को सहयोग दे, ऐसा राष्ट्रपति होना जरूरी है। विपक्ष हर बार कोई न मिले तब गांधी जी के नाम को आगे बढ़ाता है। अब क्या होता है, वह कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। 

सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के बाद अब प्रधानमंत्री  मोदी सरकार और पार्टी के कामकाज की समीक्षा कर रहे है और जरूरी सुधार हो तो आश्चर्य नहीं। 

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम मंदिर का केस आने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने सलाह दी थी कि विचार विमर्श-बातचीत कर निराकरण करो क्योंकि कोर्ट का फैसला आने के बाद एक पक्ष खुश होगा तो दूसरे को निराशा होगी और विवाद चला ही करेगा। यह सुझाव मुस्लिम नेताओं को स्वीकार नहीं है। अब न्यायालय को ही राजनीतिक विवाद- अयोध्या सिर्फ प्रॉपर्टी का केस नहीं है- का फैसला देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का मामला भी है और न्यायाधीश- छांछ भी फूंक कर पीना चाहते है । भूतकाल में राजीव गांधी सरकार के समय शाहबानो का केस था। तलाक के बाद उसको भरणपोसण देने का आदेश आया- तब मुस्लिम नेताओं के एक वर्ग ने होहल्ला मचा दिया था और राजीव सरकार ने संसद में विधेयक पारित कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द कर उलट दिया था। इस अनुभव के बाद अब न्यायाधीशों का कहना है कि तीन तलाक मजहब में मूलभूत अधिकार हो तो हम केस आगे नहीं बढ़ायेंगे, मात्र तीन तलाक की `वैधता' की ही जांच होगी। शादी- बहुपत्नीत्व और निकाह- हलाला की चर्चा नहीं होगी। अब इस मामले में कब और कैसा फैसला आता है, उसे देखना है। यद्यपि इस मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं में जागृति और समाज में खलबली है। न्यायाधीशों ने भी तीन तलाक की सख्त आलोचना तो की ही है। इसके बावजूद फैसला कैसा आता है, उसे देखने का इंतजार है।

भारतीय सुरक्षा बल- दो मोर्च़ों पर देश के दुश्मनों का प्रतिकार कर रहे है । नक्सलियों का सफाया निश्चित है और कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पत्थरबाज खड़े किये है । युवकों को रोजगार, नौकरी चाहिए, जिससे सेना में जुड़ रहे है - भारतीय सेना में सेवा देने के लिए तत्पर है और लंबी लाइन लगी है, जिससे आतंकवादियों में `भरती' कम हो गई है। यही कारण है कि सेना में लेफ्टिनेंट की पोस्टिंग प्राप्त करने के बाद परिवार में शादी के अवसर पर आये फयाज को अगवा कर हत्या कर दी गई। लेकिन इस हत्या से डर कर क्या कश्मीरी युवक सेना में भरती होना बंद कर देंगे? 

सेना अपना काम कर रही है। सरकार ने विकास योजनाओं की गति तेज कर स्थानीय जनता को रोजगार भी दिया है, इसके बावजूद- पाकिस्तानी सेना के अफसरों के हाथ में सत्ता है- सैन्यशासन है और चुने गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तो लाचार है जिससे शांति भला कब और कहां से स्थापित होगी?

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