ई-वे बिल व्यवस्था अक्टूबर से शुरू किए जाने की संभावना
जीएसटी क्रियान्वयन हेतु जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हो रहा तैयार

हमारे संवाददाता

नई दिल्ली । गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) व्यवस्था के तहत ई-वे बिल प्रणाली अक्टूबर से शुरु होने की संभावना है।इस प्रणाली में 50 हजार रुपए से अधिक के किसी भी माल की एक से दूसरी जगह ले जाने को लेकर पहले से ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा।जिसको लेकर आवश्यक सॉफ्टवेयर प्लेटफार्म तैयार केया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि पहली जुलाई से जब नई जीएसटी अप्रत्यक्ष कर की नई व्यवस्था लागू हो गई तो उस वक्त तैयारी नहीं होने के चलते ई-वे बिल को कुछ समय को लेकर टाल दिया गया था।

दरअसल ई-वे बिल का प्रावधान तभी प्रभावी होगा जब पंजीयन जारी करने को लेकर आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा।इन रजिस्ट्रेशन का सत्यापन भी किया जा सकेगा।जिसको लेकेर कर अधिकारियों को विशेष उपकरण दिए जाएंगे।जिन उपकरणों को कर अधिकारी हाथ में लेकर चल सकेंगे।जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ नेशनल इंफॉमैटिक्स सेंटर (एनआइसी) ई-वे बिल सिस्टम को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफार्म तैयार कर रहा है।जीएसटीएन की तरफ से ही नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को लेकर आइटी प्लेटफार्म विकसित किया है।केद्र सरकार की तरफ से एक और प्रावधान में नरमी का फैसला किया है।जिसके तहत 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर रही वस्तुओं पर जीएसटीएन से जारी ई-बे बिल 20 दिन तजक मान्य रहेगा।पहले यह सीमा ॅ15 दिन थी।जीएसटी व्यवस्था सूक्ष्म,लघु और मझौले उद्यमों (एमएसएमई) की प्रतिस्पर्धा क्षमता में बढोतरी करेगी।नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को लेकर एसोचैम और अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज (एपीएएस) के संयक्त अध्ययन के तहत एमएसएमई के परिपेक्ष्य से जीएसटी प्रणाली मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई सकारात्मक चीजें लाएंगी।जैसकि इनपुट क्रेडिट प्राप्त करने की आसान प्रक्रिया,सिंगल पॉइंट टैक्स,कई तरह के करों से मुक्ति और सरल कर निर्धारण प्रणाली शामिल है।जीएसटी को करदाताओं का दायरा बढाने और इसके दायरे में अधिक एमएसएमई को लोने को लेकर डिजाइन तैयार किया गया है।