निर्णायक घटनाओं का मानसून सत्र

ऐतिहासिक घटनाओं का संसद का मानसून सत्र सोमवार 17 जुलाई से शुरू हो रहा है। जीएसटी का भव्य समारोह 30 जून को संसद के सेन्ट्रल हाल में आयोजित होने के बाद इस सत्र में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव होने वाले है । प्रथम दिन ही संसद और देशभर में सभी विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करेंगे। 20 जुलाई को परिणाम घोषित होगा। इसके बाद 5 अगस्त को उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों गृहों के सदस्य मत देंगे। इन दोनों पद पर भाजपा-एनडीए के उम्मीदवारों की विजय निश्चित मानी जाती है। इसके बावजूद विपक्षी महागठबंधन से कितना मत अधिकृत उम्मीदवारों को मिलता है, उसका इंतजार है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद विपक्ष का महागठबंधन मजबूत बनेगा या बिहार के गठबंधन में दिख रही दरार का पुनरावर्तन होगा, वह स्पष्ट होगा। बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविन्द को समर्थन घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक समीकरण बदला है। इतना कम हो लालू परिवार के सदस्य - `राजकुमार, राजकुमारी भी सीबीआई जांच के तहत है । तेजस्वी लालूप्रसाद यादव तो उपमुख्यमंत्री पद पर बिराजमान है और भ्रष्टाचार के आरोप के बावजूद त्यागपत्र देने के लिए तैयार नहीं है । नीतीश कुमार अब क्या करते है, उस पर सबकी नजर है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए नीतीशकुमार ने पहले गोपालकृष्ण गांधी का नाम सुझाया था, लेकिन कांग्रेस को वह स्वीकार्य नहीं था और भाजपा ने अपने अधिकृत उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया जिससे नीतीश ने समर्थन भी घोषित किया। इसके बाद कांग्रेस और महागठबंधन वाले नेताओं ने देर से मीरा कुमार जगजीवनराम का नाम घोषित किया है। अब एक बात निश्चित है कि अधिकृत उम्मीदवार को भाजपा के अलावा भी मत मिलेगा। नीतीश के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में कितना अधिक मत मिलता है, उसे जानने का इंतजार है। विशेषकर गुजरात में शंकरसिंह वाघेला के निर्णय पर काफी कुछ निर्भर रहेगा और इस चुनाव में पार्टी बदलने की और पार्टी के आदेश की चिंता नहीं होती।

उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार का नाम निश्चित करने में कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने विलंब नहीं किया है। 18 पार्टियों की बैठक में पहले से विचार किए गए अनुसार कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि को ही उम्मीदवार का नाम पसंद करने के लिए कहा और गोपालकृष्ण गांधी का नाम घोषित होते ही मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी ने समर्थन दिया। नीतीशकुमार के समर्थन का तो भरोसा है ही। राज्यसभा और लोकसभा के कुल 790 सदस्यों में भाजपा-एनडीए के 500 से अधिक सदस्य होने से गोपालकृष्ण गांधी के विजय की आशा नहीं है। इसके बावजूद विपक्ष की एकता बतायी जा सके और संसद में एक स्वर से सरकार को चुनौती दी जा सके, ऐसा गणित है।

संसद के मानसून सत्र में जीएसटी और नोटबंदी का असर, किसानों की आत्महत्या तथा अमरनाथ के यात्रियों पर आतंकवादी हमला का मुद्दा उठाया जाएगा तो सरकार की ओर से बंगाल में सांप्रदायिक दंगों का मुद्दा होगा। संसद में चर्चा का स्वागत है, लेकिन धांधल-धमाल और कामकाज ठप स्वीकार्य नहीं है।

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