फसल ज्यादा होने के अनुमान से रुई बाजारों में गिरावट का रुख

अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपने हाल ही में प्रसारित डब्ल्यूएएसडीई रिपोर्ट में अमेरिका में कपास की फसल के अनुमान को करीब 16.5 लाख गांठ से बढ़ा दिया है। यूएसडीए के मुताबिक 2017-18 की फसल 18.83 लाख गांठ के बदले 205.5 लाख गांठ होगी जो गत 9 वर्ष़ों का रिकार्ड होगा। वर्ष 2017-18 के अंत तक रुई का स्टाक 58 लाख गांठ होगा जो गत 11 वर्ष़ों का अधिकतम स्टाक होगा। डब्ल्यूएएसडीई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एलसीई में डिसंबर वायदा 61-62 सेन्ट प्रति पाऊंड के भाव तक गिरेगा।

डब्ल्यूएएसडीइ रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में अमेरिका के अलावा चीन की फसल में 5 लाख गांठ की बढ़ोत्तरी होगी। भारत, पाकिस्तान और ब्राजील की फसल महीने के अनुमान जितनी ही रहेगी। भारत के लिए यूएसडीए ने 371.2 लाख गांठ फसल का अनुमान दिया है जो फिलहाल वास्तविक लगता है। विवाद एंडिंग स्टाक का है। गत वर्ष यूएसडीए ने भारत का वार्षिक एंडिंग स्टाक 140 लाख गांठ बताया था। वर्ष 2017-18 में उन्होंने इस स्टाक को बढ़ाकर 180.4 लाख गांठ का कर दिया है जो एक बहस का विषय है। `काटन गुरु' ने विविध प्लेटफार्म पर और इस कालम में भी यह बात बार-बार कही है कि अगर इतना स्टाक वे बता रहे है तो यह रुई है कहां?

2017-18 की नई सीजन के लिए फसल के ऊंचे अनुमान आते ही रुई बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। आंतरराष्ट्रीय रुई बाजार में अमेरिकी आईसीई में डिसेम्बर वायदा 9 सेन्ट से गिरकर 68.11 और मार्च 2018 वायदा 2.93 सेन्ट से गिरकर 67.83 सेन्ट प्रति पाऊंड के भाव से 10-8-2017 को बंद हुआ था। इसके चलते-चलते भारत में एमसीएक्स वायदों में भी कई दिनों बाद गिरावट देखी गई थी। एमसीएक्स में अक्टूबर वायदा 250 पोइंट गिरकर 18740 और डिसंबर वायदा 130 पोइंट से गिरकर 18290 के भाव पर बंद हुआ था।

दीर्घकाल के इस आशावाद के बीच हमें अल्पावधि के दर्द को भूलना नहीं चाहिए। व्यापारी वर्ग के अनुसार 31-7-2017 तक भारत में 13 से 15 लाख गांठ का अनसोल्ड स्टाक रहा। मुख्य स्टाक गुजरात (5 लाख), महाराष्ट्र (4 लाख) और तेलंगाना (2 लाख) इन राज्यों में होने का आकलन है। अगर इस बात में तथ्य है तो यह मिलों के लिए चिंता का विषय है। नई सीजन को शुरू होने में अभी करीब 2 महीने लगेंगे। इस अवधि के दरमियान मिलों को रोजाना करीब 30,000 गांठ रुई खरीदनी पड़ रही है। अधिकांश मिलों के पास रुई का स्टाक कम और सूत का स्टाक ज्यादा है।

घरेलू बाजार में पूरे हफ्ते तेजी जैसा माहौल रहने के बाद कल से थोड़ी गिरावट देखने को मिली है। मिलों कBाz इस भावुक गिरावट का फायदा लेते हुए अच्छी गुणवत्तावाली रुई की खरीदी करनी चाहिए ऐसा हमें लगता है। आगे चलके मौसम क्या रंग दिखाएगा यह कह नहीं सकते। जुलाई में कुछ कपास उत्पादक क्षेत्रों में अतिवृष्टि और बाढ़ के बाद अगस्त में जैसे मानसून ने विराम ले लिया हो ऐसा प्रतीत होता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की सख्त जरूरत है। पर वाचकों को यह याद करवाना जरूरी है कि कम वर्षा से कपास को उतना नुकसान नहीं होता जितना की अतिवृष्टि और रोगों से होता है।

सफेद मक्खी और गुलाबी बालवर्म के इलाज के लिए `काटनगुरु' ने कई किसानों और वैज्ञानिकों से बात की। संभावित इलाज का एक रिपोर्ट बनाकर `काटन गुरु' ने सभी सामाजिक मिडिया प्लेटफार्म पर इसको भेज दिया है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इन रोगों को मात करके अच्छी फसल हासिल कर सकें। इस अभियान में वरीष्ठ वैज्ञानिक चारुदत्त मई का हमें बहुत सहकार मिला है।

हाजिर बाजार में गुजरात शंकर-6 के भाव 43000 से 43500 महाराष्ट्र बन्नी 29 मि.मी. के भाव 43000 से 43500 और 30 मि.मी. के भाव 43800 से 44500 के है । व्यापार की मात्रा कम है और पासिंग की मात्रा उससे भी अधिक कम है। लंबी तार की रुई डीसीएच में रतलाम के अंदर 35 मि.मी. में 59000, 34 मि.मी. में 53000 से 54000 और 33 मि.मी. में 51000 के भाव बेचवाल बोल रहे है पर व्यापार कम है । कर्नाटक में मैसूर राज्य के नए डीसीएच की थोड़ी-थोड़ी आवक शुरू हुई है। 35 से 36 मि.मी. के इस कपास की आवक कुछ दिनों बाद बढ़ेगी।

अल्पावधि में हमें मौसम और जीएसटी के प्रभाव के अलावा डालर के गिरते भाव, मिलों की बिगड़ती स्थिति, भारत-चीन और अमेरिका-उत्तर कोरिया घर्षण एवं रुई, सूत, कपड़े की मांग पर कड़ी नजर रखनी होगी।

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