आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्र. श. हासिल करना चुनौतीपूर्ण

मध्यावधि आर्थिक समीक्षा

हमारे संवाददाता

नई दिल्ली । मोदी सरकार के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने लोकसभा में 2016-17 का दूसरा वॉल्यूम प्रस्तुत किया है।जिसमें पिछले छह महीने में अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी रही और अगले छह महीने में कैसी रहेगी।जिसको लेकर 11 अगस्त 2017 को मध्यावधि आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया गया।जिसमें जिक्र किया गया है कि 2017-18 में 6.75 से लेकर 7.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्वि के अनुमान के उच्चतम दायरे यानि 7.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्वि् का हासिल होना मुश्किल होगा।इस आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि यह मुश्किल रुपए की विनिमय दर में तेजी,कृषि ऋण माफी और गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू करने से संबंधित शुरुआती चुनौतियों के चलते होगी।उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर है जब मोदी सरकार की तरफ से किसी वित्तीय वर्ष को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट दो बार प्रस्तुत की गई है।जिसके तहत वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने 1016-17 को लेकर पहला आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी 2017 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था क्योंकि इस बार आम बजट फरवरी में प्रस्तुत किया गया था।जबकि 11 अगस्त 2017 को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में फरवरी के बाद अर्थव्यवस्था के सामने उत्पन्न नई परिस्थितियें को रेखांकित किया गया है।जनवरी में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में 2016-17 के तहत आर्थिक वृद्वि दर 6.75 प्रतिशत से लेकर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

इस आर्थिक सवेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय मौद्रिक नीति को नरम बनाने यानि ऋण सस्ता और आसान करने की गुंजाईश काफी अच्छी है।इसके साथ साथ बøकों और कम्पनियों की बैलेंस शीट की समस्या को दूर करने को लेकर दिवाला कानून जैसे सुधारवादी कदमों से अर्थव्यवस्था को अपनी पूरा क्षमता का लाभ उठाने का अवसर तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी। जिसको लेकर इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि अर्थचक्र के साथ जड़ी परिस्थतियां संकेत दे रही है कि रिजर्व बøक की नीतिगत दरें वास्तव में स्वभाविक दर से कम होने चाहिए।जिसके तहत निष्कर्ष स्पष्ट है कि मौद्रिक नीति नरम करने की गुंजाईश काफी अच्छी है।इस आ…िर्थक सर्वेक्षण में कहा गया है कि मार्च तक मंहगाई दर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 4 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है न्यूट्रल रेट से रेपो रेट 0.25-0.75 प्रतिशत अधिक है।जिसको देखते हुए रेपो रेट में कटौती की गुंजाईश अधिक है।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कर्ज माफी से डिमांड में 0.7 प्रतिशत की कटौती संभव है।जिसको लेकर आरबीआई की तरफ से सीपीआई का अनुमान 1 प्रतिशत अधिक रखा है।जिसके तहत अधिक हाउस रेंट अलाउंस से महंगाई पर असर पड़ेगा।हाउस रेंटअलाउंस से सीपीआई 1 प्रतिशत बढेगा।इस समीक्षा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नोटबंदी के बाद जीडीपी ग्रोथ में तेजी आई है।निजी बøक की लोन ग्रोथ पीएसयू से अधिक मजबूत है और आगे जीएसटी से कीमतें कम होने के आसार है ।

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