जिम्मेदार पार्टी की गैरजिम्मेदार भाषा

कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा और प्रधानमंत्री पर मनमाना अनुचित प्रहार कर रहे है, लेकिन अन्य विपक्ष कांग्रेस के साथ जुड़ा नहीं है।

कर्नाटक में एक महिला पत्रकार की हत्या हुई, उसकी जांच शुरू होने से पहले ही राजनीति शुरू हो गई है। पत्रकार वामपंथी विचारधारा की थी- हमारी शासन प्रथा की विरोधी थी और वामपंथी होने से भाजपा विरोधी थी जिससे उसकी हत्या के लिए भाजपा और संघ जिम्मेदार है, ऐसा वक्तव्य राहुल गांधी ने दिया है। भाजपा ने प्रमाण मांगा और दिग्विजय सिंह ने  अभद्र भाषा में प्रधानमंत्री पर प्रहार किया... महिला पत्रकार के नाम पर राजनीति शुरू होने पर ऐसा लगता है कि राजनीति में कोई मुद्दा नहीं रहा है और सेक्युलरवाद भड़काने का प्रयास फिर से शुरू हुआ है। तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं का भाजपा को समर्थन और अयोध्या विवाद में शिया मुस्लिमों के समाधानकारी रुख से सेक्युलरवादी चिढ़े हुए लगते है ।

मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह 2019 के लोकसभा के चुनाव में 350 सीट प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल करना चाहते है । अमित शाह उड़ीसा और अन्य राज्यों का दौरा कर भाजपा के कार्यकर्ताओं की फौज तैयार कर रहे है । मंत्रिमंडल के विस्तार के समय शिवसेना जैसी भागीदार पार्टी का भाव न देकर अंतिम संदेश दे दिया गया है। बिहार में नीतीशकुमार को समर्थन देने के बाद उनकी पार्टी को मंत्रिमंडल में स्थान जरूर दिया जाएगा, लेकिन चुनाव से पहले इसी बीच लालू यादव परिवार के भ्रष्टाचार का भांडा एक के बाद एक फोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। तमिलनाडु में राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त न होने पर राष्ट्रपति शासन निश्चित है।

इसी बीच अब महागठबंधन का नाम कोई नहीं लेता। मार्क्सवादी पार्टी के सीताराम येचूरी कांग्रेस अध्यक्षा सोनियाजी के `चाणक्य' बन रहे थे, लेकिन अब केरल में उनके नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठी है। प्रकाश करात सीताराम से अलग है । प. बंगाल में भी ममता दीदी वामपंथियों को दूर रखती है जिससे महागठबंधन में महागांठ डेडलाक है । अन्य सभी विपक्ष गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस पार्टी भाजपा को कैसी फाइट देती है, उसकी प्रतीक्षा करना चाहता है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की विदेश नीति और रक्षा नीति की सफलता गौरतलब है। पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ विश्व के मंच पर - आवाज उठाने के बाद पाकिस्तान संपूर्ण बेनकाब बना है। अमेरिका द्वारा चेतावनी दिए जाने के बाद अब चीन में आयोजित `ब्रिक्स' संमेलन में रशिया, ब्राजिल, साउथ अफ्रीका और चीन ने भी प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान को चेतावनी दे दी है। पाकिस्तान में पनाह लेने वाले आतंकवादी संगठनों का नाम अमेरिका ने `घोषित किया' है। आतंकवाद का अड्डा पाकिस्तान है, ऐसा स्वीकार किया और साबित किया है। भारत के लिए यह बड़ी डिप्लोमेटिक सफलता है।

चीन के साथ सीमा का तनाव समाप्त हुआ और समझौता हुआ। गोलाबारी और युद्ध बगैर- यह महत्वपूर्ण सफलता है। चीन की सैन्य ताकत और धमकी के सामने भारत ने शांति के शस्त्र का उपयोग किया है। इसके साथ ही हमारी विदेश नीति-पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध- एकमात्र पाकिस्तान के अपवाद को छोड़कर-लाभदायक साबित हुई है और चीन के खिलाफ इस `विजय' को विश्व के देश-अमेरिका ही नहीं, एशिया के छोटे राष्ट्र भी ध्यान में रखेंगे। हालांकि हमारी सेना के प्रमुख ने ही वक्तव्य दिया है कि भारत दो मोर्चे पर सावधान है तैयार है- वह गणनात्मक है।

कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठ समाप्त हो रही है। अमेरिका ने आतंकवादी समूहों का नाम घोषित किया वह पर्याप्त नहीं है। युनाइटेड नेशंस में पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की जरूरत है और इसके लिए चीन को सहयोग देने की जरूरत है। हालांकि इस समय उत्तर कोरिया की दादागीरी `खतरा सूचक' स्तर पर पहुंची है तब चीन पर दबाव लाने के लिए पाकिस्तान आखिरकार उत्तर कोरिया के पक्ष में जाए नहीं जिससे सभी- अमेरिका, चीन और रशिया की नजर उस पर है।

कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों का संपर्क काट देने की दिशा में सख्ती से कदम उठाया गया है। पत्थरबाजी के लिए पैसा देने वाले अलगाववादियों के खाते पकड़े गए हø। पाकिस्तानी आतंकवाद बेनकाब होने के बाद कश्मीरी कब तक उसके प्यादा बनेंगे? हालांकि प्रधानमंत्री ने `गोली और गाली नहीं, गले लगाना है' का संदेश दिया ही है, इसके बावजूद उसके लिए अभी समय नहीं आया है।  

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