जीएसटी के असर से अभी भी नहीं उबर पाए व्यापारी

हमारे संवाददाता
विश्व के सबसे भाग्यशाली प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी एवं वित्तमंत्री अरुण जेटली को बाल के बराबर भी कष्ट नहीं अभी भी उनका भाग्य दौड़ रहा है। सफलताएं उनका चरण चूम रही है। बस भाग्य यदि फीका है तो व्यापारियों का कोई भी उनकी बात सुननेवाला नहीं जीएसटी के कारण कपड़ा व्यापार की हालत बिगड़ने के खटके का बाजारों पर दबाव साफ दिख रहा है। कपड़ा व्यापारियों को लगता है कि कुछ समय के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। विश्लेषकों के अनुसार जीएसटी का असर से सितंबर में कपड़ा व्यापारियों की कमाई पर बुरा असर पड़ा है। व्यापारियों का मानना है कि डेढ़ दो करोड़ रुपये तक का व्यापार करने वाले व्यापारी अभी भी जीएसटी के दबाव से नहीं उबर पाए है बिक्री कमजोर रहने के कारण कपड़ा व्यापारियों की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही है। इस बार उत्पादन क्षेत्र के निर्माताओं पर भी उत्साह की कमी झलकी है।
इस समय उत्पादक बितरक सभी सतर्क हो गए है अभी जीएसटी का असर पूरी तरह सामने नहीं आया है। निकट अवधि में बाजार में अनिश्चितता का माहौल रह सकता है लेकिन दीपावली के बाद लग्नसरा की ग्राहकी के लिए बाजार अब भी उम्मीदों से भरपूर है। अक्टूबर का महीना कपड़ा बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस बार थोक एवं खुदरा बाजारों की हालत खस्ता रही है थोक रेडीमेड गार्म़ेंट बाजारों में चालानी देखी गई है ई-कामर्स कंपनियों की आनलाइन फेस्टिवल सेल ने व्यापारियों के उत्साह पर भारी चोट की है।
भीलवाड़ा सूटिंग में सीजन की ग्राहकी साधारण ही है। सूटिंग्स के लिए यह समय फीका साबित हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार दीपावली के बाद भीलवाड़ा सूटिंग्स में मांग बढ़ने की संभावना है। ब्रांडेड सूटिंग्स में कामकाज गति नहीं ले रहा है। रेडीमेड गार्म़ेंट क्षेत्र में मांग साधारण ही है। इस बार मिलों के डिस्प्ले कांफ्रेंसों की हवा निकल गई है। क्योंकि बिक्री अभी भी ग्राहक तलाश रही है ग्रामीण क्षेत्र की ग्राहकी भी उदासी के कारण ही मिलों का सूटिंग्स एवं खुदरा व्यापारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। नोटबंदी एवं जीएसटी नखरे कर रहा है। इस कारण ही उत्पादक मंडियों में डेवलपमेन्ट पर असर पड़ा है।
हøड फिनिश शर्टिंग में प्रख्यात उत्पादक `सौधर्म टेक्सटाइल्स' 2237 शुभम टेक्सटाइल्स मार्केट, हरिओम टेक्सटाइल्स मार्केट नं. 4 सूरत की सभी क्वालिटियों में बेहतरीन मांग निकली है। स्थानीय शर्ट पीस निर्माता रिंकी सेल्स कार्पोरेशन कोनिका केल्पार में नई रेंजों में मांग निकली है। मन्नु टेक्स शर्टिंग के साथ-साथ सलवार सूटों में महारथ हासिल कर ली है। शालीमार एवं गीताजंलि की मौड़ मैजिक, लाटरी में सोबर रेग्यूलर क्वालिटियों को पसंद किया जा रहा है।
मिक्स एंड मैच के प्रमुख सितारे `वरुण टेक्स टाइल्स, आरती टेक्सटाइल्स, जी.जी. टेक्सटाइल्स, वरुण एवं पुष्य की क्वालिटियाँ शिखर पर है। नोतनदास एंड संस की शर्टिंग पीसों में मांग अच्छी बढ़ रही है। पवन मुणत के अनुसार काटन एवं लिनन शर्टिंग को अच्छा रिस्पोंस मिल रहा है। अरिहंत ट्रेडर्स उज्जैन का प्रकाश प्रीमियम जोड़ा भी बिक्री में रहा है।
थोक कपड़ा बाजार के प्रख्यात व्यवसायी प्रदीप बण्डी के अनुसार उत्पादक मंडियों में जरूर हलचल है। सूरत मंडी माल चालानी में गतिशीलता देखने को मिल रही है। श्री बण्डी के अनुसार साड़ियों एवं सलवार सूटों में फिलहाल बिक्री कमजोर रुख प्रदर्शित कर रही है। ग्रामीण क्षेत्र की पुरानी उगरानी जाम पड़ गई है। वित्तीय हालातों ने व्यापारियों के होश उड़ा दिए है अभी तक की ग्राहकी से कोई भी व्यापारी खुश नहीं हुआ है व्यापारिक सूत्रों के अनुसार फेस्टीवल एवं वैवाहिक सीजन की ग्राहकी 35 से 40 प्रतिशत के अंदर ही है।
ग्राहकी में इस समय केवल साड़ियों की ही मांग है। सलवार सूट पीछे चल रहे है । व्यापारियों के अनुसार इस समय उत्पादक प्रिन्ट की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे है बार्डर पर प्रिन्ट, फूल प्रिन्ट में सूरत की क्वालिटियाँ बाजार में दिखाई दे रही है। एम्ब्राडयरी सलमा सितारा में 500 से 2000 की रेंज में मांग है। जारजेट, सिफान, नेट लहंगा स्टारल के साथ गोटा वर्क भी बाजार में उतर रहा है साड़ियों में तमाम व्यापारियों को अगले हप्ते से ग्राहकी बढ़ने की उम्मीद है। बाजारों में भव्य शो रूमों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। अभी ऊपरी सतह पर सब कुछ ठीक ठाक नजर आ रहा है। परंतु ऊट किस करवट बैठेगा यह कहना मुश्किल है क्योंकि लग्नसरा का सीजन छोटा है। विशेषज्ञों का मन टटोलने पर पता चलता है कि यदि यही आलम रहे तो गाड़ी मोदी के भरोसे चलेगी व्यापारियों को मंदी की आशंका है सन 1930 जैसी महामंदी मोदी शासन में प्रकट हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो सूरत के हजारों व्यापार दिवाला निकाल सकते है ।

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