हैण्डलूम फैब्रिक्स की तरफ कपड़ा मंत्रालय का रुझान

हमारे संवाददाता
सूरत । कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी पूर्ण जोर-शोर से हैण्डलूम उद्योग को प्रमोट करने में जुटी हुई हैं, वे हथकरघों पर बुनी गई साड़ियां पहन कर एक मॉडल की तरह भूमिका निभा रही हैं, बेशक हैण्डलूम उद्योग की कायापलट करिए, ये उद्योग ग्रामीण अंचलों में रोजगार का एंव उनकी समृद्धि का एक सशक्त माध्यम है, संभवत: कपड़ा मंत्री हैण्डलूम उद्योग में व्याप्त भ्रष्टाचार व घपलेबाजी से अनभिज्ञ है, पिछले कई वर्ष़ों' में ये चरखे कागजों में ही चल रहे है ।
हैण्डलूम के नाम पर पॉवरलूमों से उत्पादित कपड़ा खरीद नेता तथा कार्पोरेटिव सोसायटियों से जुड़े चतुर सुजान लोग अनुदान आदि डकार जाते है तथा महंगी खरीद बता कर जेबें भरी जा रही हैं, इन सब विकृतियों के बावजूद कपड़ा मंत्री हैण्डलूम उद्योग की परवरिश के लिए जी जान से जुटी हुई हैं तो उन्हें उसी उद्योग के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाले पॉवरलूम उद्योग की भी तो सार-संभाल करनी चाहिए, तथा उसकी खैरियत भी जानते रहना चाहिए, उस उद्योग को लावारिश हालत में छोड़ देने से देश की इकॉनोमी भी प्रभावित हो जाएगी तथा चाइना आदि देशों से निर्मित फेब्रिक्स भारी मात्रा में डम्प होने का खतरा बना रहेगा।
ताज्जुब यह है कि कृषि के पश्चात र्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाले कपड़ा उद्योग की दुर्दशा पर कपड़ा मंत्री तक सिरियस नहीं है, कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने जब से मंत्रालय का प्रभार संभाला है। तब से इस उद्योग की पीड़ा को गंभीरता के साथ समझने का प्रयास तक नहीं किया गया है। जब वे कपड़ा मंत्री के रूप में पहली बार सूरत आई थी तब कपड़ा उद्योग से जुड़े उद्यमियों, विवरों ने टफ योजना, चाइना उत्पादित यार्न एंव फेब्रिक्स आयात आदि समस्याओं की और ध्यान आकर्षित कराया था, लेकिन लगता है कि उन्होंने एक कान से सुन लिया और दूसरे कान से निकाल दिया है।

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