परिधान निर्यात में वृद्धि होने की भारी संभावना

दीर्घकालीन ग्रोथ के लिए ढांचागत परिवर्तन की जरूरत
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। अर्थव्यवस्था में वृद्धि एवं बढ़ती आय से पिछले कुछ वर्ष से घरेलू परिधान बाजार लगभग 10% सीएजीआर से वृद्धि कर रहा है तथा मध्यम अवधि में यह वृद्धि दर जारी रहने की संभावना है। सरकार ने भी वित्त वर्ष 2018 के लिए टेक्सटाइल निर्यात का लक्ष्य 45 अरब डालर निर्धारित किया है। 2015-16 में 40 अरब डालर का निर्यात हुआ था।
उद्योग की दीर्घकालीन प्रत्याशा अनुकूल बनी हुई है। हालांकि इसके लिए उद्योग को सरकार से मदद की दरकार है। सरकार को निर्यात प्रोत्साहन जारी रखने की जरूरत है।
2015-16 की विदेश व्यापार नीति में पेश की गई नई एमईआईएस स्कीम में चुनिंदा बाजारों को निर्यात के लिए थोड़े उत्पादों को शामिल किया गया है। अफ्रीकन देश, साउथ कोरिया, चीन एवं विएतनाम जैसे कई महत्वपूर्ण बाजारों को स्कीम से बाहर रखा गया है। स्पर्धात्मक देशों के कीमत दबाव के कारण टेक्सटाइल्स निर्यात की मार्जिन कम हो गई है।
प्रमुख बाजारों में विभिन्न डय़ूटी के कारण भी काटन टेक्सटाइल्स प्रोडक्ट का निर्यात प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं विएतनाम जैसे स्पर्धात्मक देशों को ईयू जैसे प्रमुख बाजारों में जीरो डय़ूटी या प्रिफरेंशियल डय़ूटी का लाभ मिलता है।
यद्यपि अगस्त में तैयार वस्त्रों के निर्यात में गिरावट दिखायी है। निर्यातकों का कहना है कि वे जीएसटी के बाद आर्डर निश्चित करने को लेकर उलझन में है क्योंकि इस संबंध में कुछ फैसले अभी लेने है ।
अगस्त में गत वर्ष की समान अवधि के 8897.77 करोड़ रु. के निर्यात की तुलना में 8556.35 करोड़ रु. का निर्यात किया गया।
निर्यातक शुल्क वापसी में 5-6 प्रतिशत कमी को लेकर उलझन में है । इस महीने से जीएसटी की वास्तविक परेशानी शुरू होने की उम्मीद है।
एक चिंता इस बात की है कि 1 जनवरी से वर्तमान में मिलने वाले सभी लाभ बंद हो जाएंगे। निर्यातकों ने सरकार से ये लाभ चालू रखने का अनुरोध किया है क्योंकि ऐसा होने पर निर्यात प्रभावित हो सकता है। सरकार को निर्यात में वृद्धि के लिए इन रियायतों को बंद नहीं करना चाहिए। यदि इन्हें बंद भी किया जाए तो सरकार को निर्यातकों की मदद करने के लिए अन्य स्कीम शुरू करनी चाहिए।

© 2017 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer