मूंगफली तेल में लगातार तेजी

सोया तेल में हल्की मंदी, सोयाबीन के भाव घटे'
हमारे संवाददाता''
चहुं ओर महंगाई उपरी भाव पर थमे रही । महंगाई दर घटती कम, बढ़ती अधिक जा रही है । पिछले एक माह में डीजल पर बढ़े भाव का असर भी जल्दी आगे देखने को मिल सकता है । हालांकि गत् हप्ते सरकार ने ऐक्साइज डय़ूटी कम की है । गत् एक माह में मूंगफली तेल दिनों से लगातार धीमी बढ़त के साथ 820 रु. से 880 और गत हप्ते 890 रु. तक पहुंच गया और सोयातेल मांग अभाव में मामूली मंदी 775 से घटते हुए 662 रु. पर रहा । हालांकि व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार गुरुवार को स्थानीय बाजारों में खाद्यतेलों में व्यापारिक मांग का अभाव रहा है । खाद्यतेलों में सीजन के बावजूद दबाव वाली ग्राहकी नहीं बताई गई है । गत् हप्ते सब्जियों के भाव आसमान पर थे । सब्जियों के भाव 50 रु. किलो से कम नहीं थे । आलू-प्याज तेज है और क्षल्ले पैसे की आंकड़ी में 20 रु. का ही लेना पड़ता है उसमें व्यापारी की भारी जीत हो रही है । अब तो सब्जियों पर भी वायदा व्यापार का चलन बढ़ता जा रहा होने से एक छोटे परिवार पर लगभग 3000 रु. माह का अधिभार जनता पर जनता पड़ने लगा है । सोयाबीन के नये उत्पादन आने से भाव में तेजी नहीं रही है बताया जा रहा है । थोक मंडी में भाव 3100 से' घटते हुए 2900 रु. तक नीचे पहुंची सोयाबीन की आंवके अब कमजोर पड़ गई होने से किसान चिंतित बताए जा रहे है । हालांकि देश में पिछले वर्ष़ों से तिलहनों की अनुकूल परिस्थिति जनता के लिये लाभकारी नहीं रही । खेती की जमीने कम होती जा रही है देश को मजबूत आधार देने के कृषि प्रयास कम हो रहे और आयात पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे है जो देश के भविष्य के लिये घातक है । उधर जनता के मुखाग्र शक्ति से महंगाई और खाद्यतेलों के भाव को नियंत्रित करने हेतु सरकार कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही प्रतीत होती है । जनता और व्यापारिक क्षेत्रों की खबरों के अनुसार पिछले दो माह से खाद्यतेलों में सट्टे के गणित सोयातेल पर 620-680 के बीच और पाम तेल भाव विदेशी आयात-निर्यात की महंगाई या प्राफिट मार्जिन के गणित पर है । उनके अनुसार पिछले कुछ वर्ष़ों में अर्थात सप्रंग सरकार के उत्तरार्ध से चली महंगाई वर्तमान सरकार में भी प्रत्येक खाद्य वस्तु के भाव तीन गुने से दस गुने तक पहुंचे है । इसी दरम्यान कई करोड़ पति से अरब पति और खरब पति हो गये है । गत् हप्ते जारी हुई कुबेरो की लिस्ट में नये और पुराने कुबेरों की देश में धन संपत्तियां बढ़ गई है । उद्योगों के उत्पादन गिरे नहीं सड़कों पर बिक रहे है, स्टॉक बढ़े और महंगे होते गये तो संपत्तियां धन भी इन लोगों के बढ़ना ही है । देश की आर्थिक उन्नति के विभिन्न प्रपंचों में' सरकार, सिर्फ उद्योगपतियों के ही लालन-पोषण में दिखाई प्रतीत हुई है ।
खाद्यतेलों में कमजोर समर्थन के चलते कृत्रिम ऊंचाई के बाद मामूली घटे । नया सोयाबीन की थोक आवक मात्रा बढ़ी थी जो भाव गिरने के बाद कमजोर हो गई है बताया जा रहा है । भारतीय सोया डीओसी की विदेशों में मांग कम होना भी सोयाबीन के भावों पर असर आना बताया जा रहा है । विदेशी वायदा व्यापार में गत् दिनों बढ़त रही है। मिली खबरों के अनुसार गत् हप्ते गुरुवार को मलेशियन केएलसीई में मामूली 2 पाइंट की बढ़त थी और शिकागो सोयातेल वायदा व्यापार मामूली 4 पाइंट की तेजी लिये' चल रहा था । मगर स्थानीय वायदा व्यापार में बढ़त के बाद गत् हप्ते गुरुवार को' मंदी रही है उसके समर्थन में हाजिर व्यापार भी मंदी लिये रहे । इंदौर में गत् हप्ते वर्षा' का दौर नहीं रहा हालांकि हो चुकी वर्षा पर कृषकों रॉय में फसलों हेतु अच्छा बताया गया है । कृषकों से मिली जानकारी के अनुसार सोयाबीन की फसल पूरे इंदौर मालवा इलाके में लगभग कट चुकी है । देश में खाद्यतेलों की कमी या आपूर्ति में कमी कैसे रहा सकती है जबकि खाद्यतेलों की सूची में अन्य तिलहन भी बढ़ रहे है और उनको प्रोसेस करके तेलें का घालमेल पर बेचा जा रहा है । यह पूर्व में भी और लिखा जा चुका है । उनके अनुसार तेल के छोके से ही तेल मिलावटी प्रतीत हो रहा है जिसकी शिकायत उपभोक्ता के हाथों में नहीं है । सरसों तेल ऐसेंस युक्त ही बाजार में मिलने लगा सुनने में आया है ।तेल उत्पादकों द्वारा और मिलावटखोरों द्वारा धालमेल का तेल धडल्ले से' बिकना जारी है । नकली शुद्ध घी उत्पादक फलफूल रहे है। देश में खाद्यवस्तुओं की जांच ऐजेंसिया शायद है नही या फिर निष्क्रिय प्रतीत होती है । सरकार चाहे तो प्राइवेट तौर पर ही ऐसी जांच ऐजेंसियां का देश के ही टेलेंटो को स्टार्ट अप इस विषय पर दिया जा सकने की पहल सरकार का करना चाहिये । दूध के परवर्ती उत्पादकें की देश में बाढ़ है। होटलों की बाढ़ को देखते हुए और खपत को देखते हुए पनीर का तो उद्योग ही हो गया है । तो फिर पनीर और असली शुद्व घी के उत्पादन पर भी संदेह निश्चित होना चाहिये । मिठाईयों तो प्रश्नवाचक में है ही ? व्यापार जगत् की मनोवृत्ति और सरकार की उदासीनता का असर है कि महंगाई प्रवृत्ति का प्रोसेस बढ़ता जा रहा है । कृषि उत्पादों पर प्रतिवर्ष विदेश से महंगा सौदा किसी न किसी खाद्य वस्तु का आयात करना पड़ता है । कृषि' विकास' पर और अधिक खर्च करने हेतु प्रयास किये जा रहे है जिस पर चेक नहीं है । आज देश में कृषि उत्पादन में कही कमी नहीं है मगरआयात-निर्यात के फैर में देश का उपजाऊ माल अधिक निर्यात हो रहा है और बाहरी निम्न किस्म का आयात महंगा होकर देश की महंगाई बढ़ाने वाला साबित हो रहा है । देश का निर्यात हो रहा माल पर तो उद्योगपति तो धन बना रहा है मगर देश की जनता किस कदर महंगाई से जी रही है यह सरकार अच्छी तरह जानकर अंजान बन रही है । पिछले एक माह में सोया तेल पर 35-40 रु. का इजाफा होना ऐतिहासिक तो हो ही गया साथ ही आगे भी तेज होना बताया जा रहा है । सरसों रायडा तेल में भी ऊंचे भाव पर खरीदी समर्थन नहीं मिल रहा होने से स्थिरता प्रभावित रही । मंडियों में सोयाबीन का भाव नमी के साथ 2550-3000 रु. के लगभग रहा जबकि प्लांटों की खरीदी 2570 रु. से लेकर 2900 रु. तक की रही बताया गया । गत् हप्ते इंदौर मूगंफली तेल 880 से 890 रु., मुंबई मूंगफली तेल 840 से 850 रु., गुजरात लूज 830 रु. और राजकोट तेलिया 1330 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड 660 से 663 रु., इंदौर साल्वेंट 625 से 630 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 660 रु., मुंबई पाम 595 रु., इंदौर पाम तेल 642 से 645 के भाव रहे । इंदौर कपास्या तेल 618- 620 रु.,' का भाव रहा ।

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