जीएसटी काøसिल द्वारा छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत

जीएसटी के अमल में आने वाले अनेक अवरोध दूर
·''''''' कम्पोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ाकर ƒ एक करोड़'
·''''''' छोटे व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न चुनिंदा शर्त़ों के साथ भरी जाएगी तिमाही
रमाकांत चौधरी'
नई दिल्ली । नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) कांउसिल की 22 वां बैठक 6 अक्टूबर 2017 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।जिसकी अध्यक्षता जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष एवं मोदी सरकार के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने की थी।इस बैठक में देश के प्राय: अधिकांशत: राज्यों के वित्त मंत्रियों ने शिरकत की थी और अपनी तरफ से जीएसटी की पेचिदगियों सहित राहत दिलाने को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की गई।जिसके तहत चुनिंदा अहम मुद्दों पर आम सहमति बन गई है।जिसके तहत छोटे व्यापारियों को लेकर कम्पोजिशन स्कीम का दायरा 75 लाख से बढाकर 1 करोड़ रुपए करने पर सहमति बन गई है।जिसके तहत इन छोटे व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न तिमाही भरने को लेकर कुछ शर्तो के साथ अनुमति देने पर सहमति बनी है।हालांकि इन व्यापारियों को जीएसटी प्रत्येक महीने भरने पड़ेगे।उल्लेखनीय है कि यह सहूलियत सिर्फ 1 करोड़ टर्नओवर वाले' कारोबारियों को ही मिल पाएगी।इस बैठक में ई-बे बिल यथाशीघ्र अमल में लाने को लेकर गंभीरता पूर्वक बातचीत की गई है।इसके साथ ही जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़ा क्षेत्र सहित निर्यातकों को लेकर विशेष राहत देने पर सहमति बन गई है।जिसके तहत आगामी दिनों में इस क्षेत्र में सुधार का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।जिसको लेकर देश भर के छोटे व्यापारियों सहित कपड़ा एवं निर्यातकों की तरफ से जीएसटी काउंसिल की बैठक को लेकर उत्सुकता पूर्वक ध्यान टिकी हुई थी।ऐसे में देखना यह होगा कि सही मायने में जीएसटी काउंसिल की तरफ से इस बार कितना व्यापारियों को राहत दी गई है और इससे कारोबारी कितना संतुष्ठ हो पाए है ।जिसका तस्वीर अगले सप्ताह तक स्पष्ट हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि देश भर के व्यापारियों की तरफ से जीएसटी की पेचिदगियों को लेकर जीएसटी काउंसिल से अनेकों तरह की गुजारिश की गई थी।जिसके तहत जीएसटी की दरें 3 प्रतिशत और 12 प्रतिशत कम करने की आवाज उठ रही थी।जीएसटी रिटर्न छमाही स्तर पर लागू किया जाए।जीएसटी पोर्टल के तहत इंटरनेट कनेक्शन और वेबसाईट क्रश होने को दुरुस्त करने की मांग जोरशोर से की गई थी।पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का आग्रह किया गया था ताकि आम आदमी को सस्ता पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।जीएसटी को बेहर सरलीकृत किया जाए ताकि कारोबारियों को कामकाज करने में कोई व्यवधान नहीं हो और कामकाज बेरोकटोक किया जा सकेगा।

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