जीएसटी : सूरत के कपड़ा व्यवसायियों की मांग को लेकर कपड़ा मंत्री के तेवर नरम

हमारे संवाददाता
सूरत। जब से जीएसटी लागू हुआ हैं, तब से व्यवसायी इस नई कर प्रणाली में ढलना असहज महसूस कर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार पर इन प्रावधानों में सरलीकरण करने हेतु निरन्तर दबाव बना हुआ हैं, देश भर के तमाम कपड़ा उत्पादन केंद्रों से बार-बार सरलीकरण की गुहार लगाई गई, लेकिन जीएसटी काøसिल ने व्यवसायियों व उद्यमियों की समस्या को गम्भीरता से नहीं लिया, हर जीएसटी मीटिंग में देश भर के कपड़ा उत्पादक उम्मीद भरी निगाहों से बदलाव की राह देखते रहे और जीएसटी काøसिल माइनर बदलाव का लॉलीपॉप व्यवसायियों को देती रही, इस कशमकश के बीच विभिन्न कपड़ा बाजारों में व्यवसाय घट कर आधा रह गया, सूरत, अहमदाबाद, भिवण्डी, मुम्बई, मालेगांव, इचलकरंजी, बुरहानपुर, इरोड़, तिरुपुर, लुधियाना, अमृतसर, जैतपुर, पाली, बालोतरा, जसोल, जोधपुर, सांगानेर, भीलवाड़ा, सोलापुर आदि तमाम ग्रे व प्रोसेसिंग कपड़ा उत्पादन केंद्रों को जीएसटी प्रावधानों ने हिला कर रख दिया, इस अटपटी कर प्रणाली के विरोध में आवाजें प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री के गलियारों तक पहुंची, सर्वत्र केंद्रीय व राज्य मत्रियों, सांसदों, विधायकों के माध्यम से सरकार पर दबाव बना, जब यह प्रावधान लागू हुए तो पूरा जुलाई माह तो आंदोलन में ही बीता, जीएसटी प्रावधानों का पुरजोर विरोध सूरत के व्यवसायियों ने किया, हालांकि अहमदाबाद, भिवण्डी, तिरुपुर, बुरहानपुर, जैतपुर आदि मण्डियों से इस कानून के खिलाफ आवाज मुखरित अवश्य हुई व प्रतीकात्मक विरोध, हड़ताल, बन्द आदि भी हुआ, लेकिन सूरत जितना बड़े पैमाने में आंदोलन ओर कहीं नजर नहीं आया। हां उतर प्रदेश के कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ आदि अनेक कपड़ा मण्डियों में इन प्रावधानों के खिलाफ बुलन्द आवाज सुनाई दी। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में विधानसभा चुनाव सिर पर होने से ये आवाज और भी पुरजोर से मुखरित होने लगी, इस चुनावी रण में मृत प्राय कोंग्रेस को जीएसटी मुद्दे रूपी संजीवनी हाथ लग गई, कोंग्रेस नेता राहुल गांधी जितनी बार गुजरात आए उन्होंने जीएसटी को मुद्दा बनाया, इन पंक्तियों के लिखे जाने से एक दिन पूर्व अर्थात् 8 नवम्बर को राहुल गांधी पूरे दिन सूरत के टेक्सटाइल्स उद्योग से जुड़ी प्रोसेसिंग, एम्ब्रॉयडरी, यार्न, कपड़ा दुकानों आदि विभिन्न स्थलों पर दौरा रहा, वे अनेक इकाइयों में गए, घरेलू कामकाजी महिलाओं द्वारा घरों में हस्तशिल्प के रूप में किये जा रहे वेल्युएडेड वर्क को बारीकी से समझा, वे रिंग रोड स्थित एनटीएम मार्केट के बोर्ड रूम में पहुंचे तो मोदी के नारे लगने लगे गए, दूसरी ओर कोंग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए, दोनों तरफ नारे लगने लगे तथा कार्यकर्ता आपस में उलझने लगे, स्थिति विकट होते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने भीड़ को तीतर बितर करने हेतु हल्का बल प्रयोग भी किया, कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया, राहुल गांधी ने एनटीएम मार्केट में व्यवसायियों व उद्यमियों की बात सुनी, राहुल गांधी ने उसी दिन सूरत के पाल विस्तार में स्थित संजीवकुमार ओडिटोरियम में करीब 1400 कपड़ा व डायमंड उद्यमियों व व्यवसायियों की उपस्थिति को सम्बोधित किया, उन्होंने नोटबन्दी और बढ़ी दरों के जीएसटी को गलत कदम बताया, राहुल गांधी ने कहा कि 5 स्टेप का जीएसटी लागू होना ही गलत कदम था, अधिकतम 18 प्रतिशत की दरें व्यवहारिक थी, राहुल की सभा में उपस्थित व्यवसायियों ने प्रश्न भी किए तथा अपनी समस्या भी बताई, जिस ढंग से लोग अपनी समस्या रख रहे थे, उसे देख ऐसा महसूस हो रहा था कि समस्या को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा था, एक विवर में यहां तक कह डाला कि मेरा मन आत्महत्या करने का करता हैं, तो राहुल ने कहा कि ऐसा कदम नहीं उठाना, लेकिन उस विवर की स्थिति किसी भी हाल में ऐसी नहीं लग रही थी, 25 मजदूरों को रोजी रोटी देने वाले विवर की कहानी अटपटी लगी, पूरी सभा में सरकार के विरोध के सिवाय कुछ दूसरा नजर नहीं आया, हां एक व्यवसायी ने राहुल गांधी को नसीहत अवश्य दी कि पहले आप अपने अंदरूनी वातावरण को दुरस्त करो। राहुल गांधी ने सूरत दौरे के दौरान पूरा प्रयास किया कि जीएसटी का विरोध वोटों में तब्दील होकर कोंग्रेस के खाते में चला जाये, न बल्कि 8 नवम्बर को अपितु कुछ दिन पूर्व भी राहुल पूरे दिन दक्षिण गुजरात के दौरे पर रहे व सूरत के वराछा विस्तार में एक आम सभा भी की, उस सभा मे भी नोटबन्दी व जीएसटी मुद्दे पर भाषण केंद्रित रहा। सूरत में केंद्रीय मंत्री राजीवप्रसाद, उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य प्रसाद, रेल मंत्री पीयूष गोयल,ॅ डॉ जितेंद्र सिंह, मनसुख मांडविया आदि अनेक मंत्री सूरत पहुंचे और कपड़ा व्यापारियों की समस्या को सुना, दूसरी ओर कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने भी सूरत के कपड़ा व्यवसायियों व उद्यमियों को दिल्ली बुलाया था, और एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली पहुंचा, कपड़ा मंत्री ने सूरत के कपड़ा उद्यमियों के सुझावों से तन्मयता से सुना और निराकरण करने हेतु आश्वस्त किया ।

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