जीएसटी : शहरी ग्राहकों को और राहत

सम्पादकीय...
मनोरंजन की समझ बदलनी पड़ेगी
जीएसटी काøसिल ने गुरुवार को गुवहाटी में संपन्न हुई 23वीं मीटिंग में सामान्य उपयोग की 177 वस्तुओं पर अधिकतम 28% कर को घटाकर 18% पर लाकर आकार्य का सुखद झटका दिया है।
इस मीटिंग में जो राहत दी गई है, उसमें शहरी और उच्च मध्यम वर्ग के ग्राहकों-उपभोक्ताओं को केद्र में रखा गया है। यह ऐसा उपभोक्ता है, जो चाकलेट, च्यूइंगम खाता है, बाल पर नियमित शैम्पू करता है, चेहरा पर मेकअप करता है आदि-आदि इसमें कुछ गलत नहीं है। आखिरकार शहरी भद्र वर्ग का उपभोक्ता भी गांव के उपभोक्ता का आदर्श होता है। उनको देखकर गांव पर फैशन-मांग बढ़ती है। दशकों पहले यह स्थिति थी, जो अभी बदली नहीं है।
कौंसिल की हर मीटिंग में जुलाई से लागू जीएसटी के अमल में बाधक परेशानियों को सुलझाने का दृष्टिकोण दिखायी दिया है, जो इस मीटिंग में फिर एक बार दिखायी दिया फिर भी दो दृष्टिकोण खटकते है । वाशिंग मशीन पर शराब-सिगरेट जितनी 28% की अधिकतम कर दर लागू होगी तथा उसके डिटर्ज़ेंट पाउडर पर कर घटाकर 18% किया गया है, वह विसंगति नहीं तो अन्य क्या है? भारत के मध्यमवर्ग के लिए कल जो आइटम मनोरंजन के थे वे आज जरूरत बन गए है । एयरकंडिशनर्स को मनोरंजन की वस्तु मानकर अधिकतम जीएसटी दर लगाने की मानसिकता सरकार को बदलनी होगी।
जिन वस्तुओं पर जीएसटी दर घटाकर 18% की गई है, उससे सरकार की आय में वार्षिक 20,000 करोड़ रु. की कमी होगी। यद्यपि ऐसा न भी हो क्योंकि नीची कर दर के कारण उनकी खपत बढ़ने से सरकार को ज्यादा आय मिलेगी। सरकार और काøसिल व्यापारियों और उद्योगों की कर भरने में होने वाली परेशानियों का आकलन कर समस्या दूर करने के कदम नहीं उठाए तब तक ग्राहक उपयोग की वस्तुओं पर यह कमी लोकरंजक और चुनावोन्मुख लगेगी।
सीमेंट और पेंट पर 28% की अधिकतम कर लागू कर रियल इस्टेट उद्योग को कोई राहत नहीं दी गई है।
जीएसटी नेटवर्क के सामने भी करदाता की शिकायत अभी भी पहले जितनी ही है। कर पद्धति का पालन सरल होना चाहिए, उसके बुनियादी सिद्धांत के विरुद्ध वर्तमान स्थिति है।
जीएसटी काøसिल की मीटिंग होने से पहले कांग्रेस शासित पंजाब, कर्नाटक और पांडिचेरी ने रियल इस्टेट और पेट्रो उत्पादों पर 18% कर लगाने की मांग की है, लेकिन भाजपा शासित राज्यों ने उसका विरोध किया था। अब चुनाव देखकर कांग्रेसी राज्यों ने रंग बदला है। राज्यों ने पहले से सहयोग दिया होता तो पेट्रो उत्पादों तथा आवास पर कर बोझ काफी हल्का हुआ होता तथा अर्थव्यवस्था पर उसका अनुकूल असर काफी दिखायी देता।

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