नोटबंदी और जुगलबंदी...?

गुजरात विधानसभा के चुनाव प्रचार में अब जातिवाद की तुलना में नोटबंदी और जीएसटी का मुद्दा उछलने के बाद शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस की जुगलबंदी हो रही है! शिवसेना तो भाजपा के साथ की भागीदारी तोड़ने के लिए तैयार है। मौके की प्रतीक्षा कर रही है। नारायण राणे को भाजपा सरकार में लेकर फडणवीस शिवसेना के सामने पूर्व तैयारी कर रहे है जिससे उद्धव ठाकरे भी नाराज है । शिवसेना की धमकियां बढ़ने से फडणवीस ने शरद पवार को साथ रखने की खिड़की खोली, लेकिन अब शरद पवार ने ही खिड़की बंद की है! उद्धव ठाकरे ऐसा आश्वासन प्राप्त करने के लिए ही पवार को मिले थे- शिवसेना भाजपा के साथ की भागीदारी तोड़े तो पवार फडणवीस सरकार को नहीं बचाएंगे, ऐसा आश्वासन मिला है।
पिछले कुछ महीनों से भाजपा के नेतृत्व को आशा थी कि शिवसेना की कमी नारायण राणे और शरद पवार पूरी करेंगे। अमित शाह ने भी मुंबई दौरे के दौरान विश्वास व्यक्त किया था कि (शिवसेना भाजपा के साथ रहे या न रहे तो भी) भाजपा सरकार अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी।
अब गुजरात में कांग्रेस के आक्रामक बनने के बाद और जातिवाद का जोर दिखाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के नंबर टू नेता प्रफुल पटेल ने कांग्रेस मोर्चा में जुड़ने की तैयारी-इच्छा व्यक्त की है। हालांकि गुजरात में राष्ट्रवादी को स्थान नहीं है, इसके बावजूद मोर्चा में जुड़े तो ऐसी हवा बनेगी कि कांग्रेस मोर्चा `विन' में है! दोनों को लाभ हो सकेगा। ऐसे गठबंधन  का मार्ग प्रशस्त करने के लिए शरद पवार ने महाराष्ट्र से शुरुआत की है। सोनिया गांधी को शरद पवार पर भरोसा नहीं है, यह बात जगजाहिर है। यह शंका-अविश्वास दूर करने के लिए शरद पवार ने अब राहुल गांधी की भरपूर प्रशंसा की है और प्रश्न किया है कि गांधी परिवार कांग्रेस की एकता बरकरार रखता है उसमें गलत क्या है?
शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को आश्वासन-भरोसा दिलाया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस भाजपा की सरकार को नहीं बचाएगी-इसके बावजूद शिवसेना के विधायकों और कर्यकर्ताओं में चिंता है। सरकार छोड़ने के बाद राज्य में तुरंत चुनाव आए तो-? उद्धव ठाकरे भी इस समय तैयारी भले करते हो- विश्वास पैदा नहीं होता कि चुनाव होने पर साथ कौन देगा? उनको शरद पवार पर भी भरोसा नहीं है। राहुल गांधी को `सर्टिफिकेट' देने के बाद पवार साहब वस्तुत: शिवसेना को समर्थन देंगे? साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बारे में जो बात की, वह भी शिवसेना को `खटकती' है। ``सामना'' में उनकी आलोचना भी हुई है।
दूसरी ओर कांग्रेस को भी पवार पर भरोसा नहीं है। `पवार पहले शिवसेना के बारे में उनका रुख स्पष्ट करने के बाद दूसरी बात'... वास्तव में जुगलबंदी की संभावना का आधार गुजरात के परिणाम पर रहेगा।
देखना यह है कि अब राहुल गांधी कैसी प्रतिक्रिया देते है और प्रीति बताते है । संभव है कि पवार की तरह अन्य नेता भी सुर में साथ देने लगें उसके बाद- और गुजरात के चुनाव-मतदान से पहले राहुल गांधी विधिवत कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर हों जिससे गुजरात में प्रभाव पड़े...
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के चेन्नई में डीएमके के सर्वोच्च-करुणानिधि से मिलने के बाद अटकलें शुरू हो गई है कि भाजपा डीएमके को साथ लेगी। डीएमके द्वारा नोटबंदी विरोध प्रदर्शन में भाग न लेने की घोषणा करने के बाद ऐसी ``मैत्री'' की आशा बढ़ी है। इसके बावजूद राजनीति और तमिलनाडु में निश्चित कुछ नहीं होता।
अभिनेता कमल हासन को भी राजनीति के मैदान में उतरने की जल्दबाजी है, जबकि रजनीकांत हवा का रुख देख रहे है ।
बंगाल में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले, उसके बाद चर्चा शुरू हुई है: भाजपा में जुड़ने की संभावना है।
 

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