रुई की गुणवत्ता एक गंभीर समस्या, क्या यह सीमित फसल का संकेत है?

रुई की गुणवत्ता एक गंभीर समस्या, क्या यह सीमित फसल का संकेत है?
मुंबई। महाराष्ट्र के विदर्भ और तेलंगाना के कई कपास केद्रों से यह चाøकाने वाली रिपोर्ट आ रही है कि वहां गुलाबी बोलवर्म के कारण कपास की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ हø। `काटनगुरु' के प्रतिनिधि तेलंगाना के अदिलाबाद आसपास के कुछ क्षेत्रों का दौरा किया तो पता चला कि दिवाली के बाद कई खेतों में कपास के बाल खुले ही नहीं जब चिंतित किसानों ने बॉल को हाथों से खोला तो अंदर विपुल मात्रा में गुलाबी बॉलवर्म को देखकर उन्हें गहरा आघात लगा। गुलाबी बॉलवर्म अंदर से कपास फाइबर को खा जाता है। बाहर से बॉल विकसित लगता है पर अंदर फाइबर नहीं होता।
महाराष्ट्र के विदर्भ जिले से घाटनजी गांव के जीनर मोहनजी रुंगटा ने `काटनगुरु' को बताया कि उनके क्षेत्र में 75% खेतों में यहीं परिस्थिति है। यवतमाल एवं अमरावती जिलों में गुलाबी बॉलवर्म का उपद्रव ज्यादा होने के समाचार बहुत सारे किसानों ने दिए हø। कुछ किसानों का कहना है कि देरी से बोआई वाले खेतों में गुलाबी बॉलवर्म का हमला ज्यादा तीव्र है। कुछ का कहना है कि उन्होंने तेलंगाना से अनौपचारिक तरीके से बीटी बीज लाए थे जिस पर यह हमला हुआ है। एक बात तो निश्चित है कि भारत में हाल में मौजूद बीटी बीज और टेक्नोलाजी दोनों अप्रभावी ही नहीं हानिकारक भी हø। किसान बीटी बीज बोकर बॉलवर्म के विषय में निश्चित हो जाता है और दूसरे रोगों (सफेद इली, लाल्या) के प्रतिकार हेतु दवाइयां छांटता है। राज्य और केद्र सरकारों को इस विषय में गंभीरता से सोचकर राहत-उपाय करना समय की मांग है।
देशभर में अक्टूबर में हुई वर्षा के कारण कपास की गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ा है। करीब एक महीने से हो रही कपास की आवक में कौडी का प्रमाण बहुत ज्यादा है। कई जीनर तो कहते हø कि उन्होंने बहुत सालों में इतनी ज्यादा मात्रा में कौडी का प्रमाण नहीं देखा। कौडी के कारण कपास में काली और पीली टांच आ रही है। जिनिंग में सुपर क्लिनर एवं पूरी सवधानी बतरने के बावजूद पीली टांच नहीं निकल पा रही है। ग्रेड में खराबी होने से रुई के भाव में दबाव बना हुआ है। किसानों की जिनरों के पास और जिनरों की सूत मिलों के पास कीमतों में कटिंग भी हो रही है जिससे सब परेशान है।
घरेलू रुई बाजार में टोन नरम है। हाजिर बाजार में गुजरात संकर-6 37200 से 37700, महाराष्ट्र बन्नी 37000 से 37800, तेलंगाना बन्नी 37000 से 38000 एवं कर्नाटक 31 मि.मि. 38500 से 39000 तक कामकाज हो रहे हø। कपास की दैनिक आवक करीब 1.40 लाख गांठ की हो रही है। गुजरात में 30,000, महाराष्ट्र 40000, उत्तर भारत 23000 और तेलंगाना-आंध्र में 25000 गांठ कपास की दैनिक आवक है। निजी एजेन्सी जस्ट एग्री के मुताबिक देश में 1 अक्टूबर से 7 नवंबर 2017 तक 27.60
लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जो गत वर्ष इस समय तक 25.46 लाख गांठ की हुई थी।
आंतरराष्ट्रीय रुई बाजार स्थिर है। अमेरिकन आईसीएफ में दिसंबर वायदा 68.29 एवं मार्च 2018 वायदा 68.54 के भाव पर 9-11-2017 को बंद हुए थे। हाल ही में अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) का रिपोर्ट आया है। जिसमें उन्होंने विश्व के ओपनिंग स्टाक को करीब 11 लाख गांठ से घटाया है और उत्पादन एवं खपत को पूरक मात्रा में बढ़ाया है। पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग ने सरकार से मांग की है कि रुई आयात पर लगाई गई 4% डय़ूटी को रद्द कर दिजा जाए ताकि मिलों को जरूरी मात्रा में रुई मिलती रहे।
`काटनगुरु' का 27 वर्ष़ों का अनुभव कहता है कि जिस वर्ष में कपास और रुई की गुणवत्ता की गंभीर समस्या रही हो उस वर्ष में रुई की फसल असाधारण ऊंची नहीं हो सकती। हाल विश्व में और खास करके भारत में देखी जा रही कपास की गुणवत्ता, संपूर्ण टेक्सटाइल उद्योग के लिए ``लाल सिग्नल'' साबित हो सकता है।

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