दूध को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में लाने पर विचार

दूध को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में लाने पर विचार
हमारे संवाददाता
मोदी सरकार की तरफ से उपभोक्ताआाzं को लेकर दुग्ध उत्पादकें और उपभोक्ताओं के हित को लेकर दूध को आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची में शामिल करने की तैयारी शुरु कर दी गई है।चूंकि दूध की मांग व आपूर्ति में असंतुलन होने की दिशा में कभी उपभोक्ताओं तो कभी दूध उत्पादकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।ऐसे में दूध को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखने पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल दुग्ध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश बन गया है।जिसके बावजूद दूध की मांग और आपूर्ति में कभी कभी असंतुलन पैदा हो जाता है जिससे कीमतों में उतार चढाव होता है।जिससे दुग्ध उत्पादकों के साथ साथ उपभोक्ताओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।जिसको लेकर केद्रीय पशुधन और डेयरी मंत्रालय की तरफ से इस आशय के अंतरमंत्रालयी समूह के पास विचार को लेकर भेजा गया है।जिसके तहत सचिवों के समूह के फैसले के बाददूध को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाना आसान हो जाएगा।जिसके बाद दूध के मूल्य में असंगत तौर पर उतार चढाव को रोकने में मदद मिलेगी।यद्यपि दूध की आपूर्ति में इसे आवश्यक वस्तु माना जाता है।

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