सोयातेल में भारी तेजी

सोयातेल में भारी तेजी
खाद्यतेल के भाव पर सरकार का नियंत्रण जरूरी
हमारे संवाददाता
व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार विगत् दो-तीन सप्ताह  में खाद्यतेलों पर जिस कदर तेजी हुई है उससे साफ झलकता है कि हाजर-वायदे के व्यापार ने खाद्यतेलों पर जबरन के भाव बढ़ने की स्थितियां पैदा की है । गत् हप्ते विदेशी वायदा बाजार बुधवार तक तेजी के बाद गुरुवार की हुई मंदी के  बाद  भारतीय हाजिर बाजार में मंदी 690-692 के बाद 687-690 रु. तक हुई । हालांकि वायदा बाजार दिसंबर जनवरी का 725 रु. तक की तेजी का था । कालोनियों का छोटा व्यापारिक क्षेत्र यही कहता है कि गत् वर्ष के तिलहन कृषि उत्पादन से देश में खाद्यतेल उत्पादन की इतनी स्थिति नहीं बिगड़ी है जिससे भाव अगली फसल आने के बाद और तेज हो जाए ।  हालांकि तेल में तेजी का दूसरा कारण आयात शुल्क बढ़ाने की चर्चा भर से भी  फैली हवा बताई जा रही है । आयात निर्यात नीति पर जनता हित में सरकार के शुल्क का फायदा जनता को नहीं मिलता है वरन् उद्योगपति भारी फायदा उठा रहे है। छोटे व्यापारियों के अनुसार उत्पादक उद्योग अपने भाव सुबह से ही अपने तरीके खोलकर बैठ जाते है जिससे जनता को हमें भी अनुपातिक  उतने भाव पर महंगा माल बेचना पड़ता है ।  वैश्विक तिलहन-तेलों के उत्पादन से भारतीय खाद्यतेल अधिक प्रभावित होने लगे है । वहां कुछ प्रतिशत उत्पादन कम होता है तो यहां भाव पर आग लगने लगती है लेकिन वहां अधिक उत्पादन हो तो भाव अधिक नीचे नहीं आते है । भारत में अमेरिकी भू-भाग की स्थिति और समीक्षा देश में महंगाई का अधिक प्रकोप बढ़ाती है । यही स्थिति हमारे देश में पिछले दो वर्ष में हाई प्रोफाइल पर बनी है ? सूत्रों से मिली खबर के अनुसार देश भर में मूंगफली, सोयाबीन, सरसों-रायॉडा आदि की आवकें बंपर रही है और कपास्या की भी भारी आवकें हुई है । पामतेल और कपास्या तेल खाने में प्रयुक्त नहीं होता है मगर मिक्स हो रहा  बताया जा रहा है यह जानकारी लेने वाला कोई नहीं है । देश में मिलावटीयों को भारी पड़तल लग रही है । व्यापार न्यूज कई बार खबर इंगित करता आया है कि खाद्यपदार्थ़ों में मिलावट का कारोबार भारी फलफूल रहा है । पिछले दिनों इंदौर के प्रसिद्ध सांची दूध कारखाने में आने वाला दूध टेंकरों में  केमिकल मिलावट किया दूध का टेंकर पकड़ाई में आया । जांच में अन्य  केमिकल पाया गया । बड़े स्केंडल की जांच जारी थी । शुद्ध घी भी उदहरण है । देश में दूध का उत्पादन और परवर्ती उत्पाद दोनों का संतुलन नहीं बैठता है फिर देश भर में शुद्ध घी और पनीर की बाढ़ है । शुद्ध घी 100 रु. किलो और 30 रु. किलो पनीर के अंदर उत्पादन भाव की पड़तल में घी 450 रु. और पनीर 300 रु. किलो तक बेच दिया जाता है ।  अंधी कमाई हो रही है ? देश में कुछ वर्ष पूर्व पामतेल का भाव 40:100 के रेशों मे सोयातेल भाव से नीचे रहता था  आज दोनों का भाव लगभग बराबर है क्यों ? म.प्र. देशभर में स्वछता अभियान में अग्रणी हो रहा है और बीमारी के सबसे अधिक वातावरण भी यही बढ़ गये है । प्राकृतिक मच्छरों या अन्य द्योतक बीमारी के है मगर प्रत्यक्ष मानव भी बीमारी के बड़े द्येातक प्रतीत होते जा रहे है । देश की जनता के स्वास्थ पर खिलवाड़ और सरकारो के जांच-अनुसंधान केंद्र  सुप्तावस्था में प्रतीत होती है । नौकरशाही सिर्फ पगार लेकर कार्यालयों में मनोरंजन करते है । सोचनीय है 
कृष्कीय जानकार विश्लेषको के अनुसार मिली रिपोर्ट का जायजा लेने पर वर्ष 2005 से  सोयाबीन रकबा 38.64 लॉख हेक्टेयर से लगतार बढ़ते हुए यह 55 - 60 लॉख हेक्टेयर तक बढ़ चुका है और उतने ही अनुपात से उत्पादन भी बढ़ा है । अन्य तिलहन सरसों, बिनौला, मूंगफली, भी भारी तादाद में पिछले वर्ष़ों में उपजे है मगर उत्पादन अनुपात के मुकाबले खाद्यतेल भाव अधिक गति से बढ़ कर भारी ऊंचाई तक पहुंच चुके है । आयाति पाम तेल की देश में भरमार है । कहां जा रहा है ? गंभीर प्रश्न है ।  गत् हप्ते गुरुवार को सोया तेल भाव विगत् हप्ते के मुकबले 682 से  690 रु. के मुकाबले 692 रु. बढ़कर गत् हप्ते 687 रु. तक घटे है । विदेशी वायदा में मलेशियन केएलसीई 12 पाइंट और शिकागो सोयातेल वायदा 11 पाइंट घटे चल रहे होने की बदौलत घटे बताए जा रहे  थे । गुरुवार को सोया तेल नीचे में 687 रु. और मुंगफली तेल 920 रु. तथा सरसों तेल 722 रु. थोक में था । कृषकों के हाथ से सोयाबीन सस्ते दामो 2500-3000 रु.  पर निकल चुका है और वर्तमान 2850 रु. तेजी ऊंचे स्टाकिस्टो द्वारा बनाई बताई जा रही है । उनका  कहना है कि देश में कृषि उत्पादनों पर अकूट स्टॉक व्यवस्थाकारों द्वारा मुनाफा वसूली का घेरा व्याप्त हो गया है । उनके अनुसार भारी उत्पादन में उस वर्ष की तेजी को देखकर और ऊंचे भाव पर कृषक अधिक उत्पादन हेतु रकबा बढ़ाकर दूसरे वर्ष अधिक पैदावार करते है मगर दूसरे वर्ष में उत्पादन आने या कटाई तक सटट्खोर लॉबी उस वर्ष भारी भाव गिराकर कृषको से नीचे के भाव पर स्टॉक व्यवस्था करके भारी मुनाफा कमाना इनकी फेर में आ गया है  ।  यह बात इस वर्ष पूरे तौर पर सही बताई जा रही है । 2750 रु. तक  की खरीदी और वायदा व्यापार में  दिसंबर - जनवरी तक के सोयातेल में  ऊंचे भाव पर सोया प्लांट पूरी क्षमता से चल रहे बताऐ जा रहे है । गत् हप्ते  इंदौर मूंगफली तेल 900 से 920 रु., मुंबई मूंगफली तेल 850 रु., गुजरात लूज 820 रु. और राजकोट तेलिया 1300 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड  687 से 689 रु., इंदौर साल्वेंट 660 रु., मुबंई सोया रिफाइंड 670 रु., मुंबई पाम 615-618 रु., इंदौर पामतेल 660 रु. के भाव रहे । इंदौर कपास्या 620 रु. और राजस्थान सरसों कच्चीघानी तेल 820 रु. के भाव रहे । विभिन्न प्लांटों का सोयातेल भाव 686 से 690 रु. तक बताया गया । मंडी में तिलहनों की आवके कम थी।

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