उत्तर प्रदेश में चीनी का होगा कीर्तिमान उत्पादन

उत्तर प्रदेश में चीनी का होगा कीर्तिमान उत्पादन
मिलों ने किया तीन गुना उत्पादन
हमारे प्रतिनिधि
नई दिल्ली। भारत का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य, उत्तर प्रदेश इस सीजन में कीर्तिमान एक करोड़ टन चीनी का उत्पादन करने के लिए सुसज्ज है।
मिलों ने अभी तक बेहतर रिकवरी के साथ गत वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक उत्पादन किया है।
उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन के सचिव दीपक गुप्तारा के अनुसार, इस सीजन में 15 नवम्बर तक मिलों ने गतवर्ष की समान अवधि के 1.9 लाख टन की तुलना में 5.7 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।
इस वर्ष में अभी तक रिकवरी (गन्ने से निर्मित चीनी) 9.53% है जबकि 2016-17 में वह 9.14% थी।
उन्होंने आगे कहा कि मिलों को पर्याप्त गन्ना मिल रहा है और चूंकि उन्होंने गत वर्ष की तुलना में पहले पेराई शुरू कर दी है, इससे किसान भी खुश है कि वे बिक्री करने में समर्थ है ।
चूंकि जनवरी में रिकवरी दर बढ़ेगी, इससे उत्पादन लागत बाद में निर्धारित होगी। गत वर्ष में रिकवरी 10.62% थी और उत्पादन लागत लगभग 33.50 रु. निर्धारित की गई थी। यह भी संभावना है कि 2017-18 सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में रिकवरी बढ़ने के साथ उत्पादन की लागत भी मामूली बढ़ सकती है। क्योंकि उत्तर प्रदेश ने गन्ने का राज्य अनुमोदित मूल्य (एसएपी) बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने 2017-18 सीजन के लिए गन्ने का एसएपी 3.17% बढ़ाकर 325 रु. प्रति क्विंटल किया है। केद्र द्वारा गन्ने का उचित एवं लाभप्रद मूल्य घोषित किए जाने के बाद राज्य एसएपी की घोषणा करते है ।
केद्र ने चीनी सीजन 2017-18 के लिए गन्ने का एफआरपी 10.87% बढ़ाकर 255 रु. प्रति क्विंटल किया है।
यद्यपि उत्तर प्रदेश में सरप्लस स्थिति देश के लिए अच्छी है, लेकिन किसान भुगतान में चूक को लेकर चिंतित है ।
इस वर्ष 77 मिलों ने कामकाज शुरू कर दिया है जबकि गत वर्ष की समान अवधि में 55 मिलें कार्यरत थी।
गुड़ उत्पादक भी किसानों को अच्छी कीमत दे रहे है क्योंकि वे अपने कोल्हू चलाने हेतु गन्ना खरीदना चाहते है ।
यहां की मिलों को उम्मीद है कि पेराई सीजन की प्रगति के साथ चीनी की कीमत घट सकती है।

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