21 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्टों का अगले वर्ष मार्च में होगा ऑक्शन

2022 तक विंड पावर की क्षमता होगी 60 हजार मेगावाट
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । मोदी सरकार की तरफ से अगले वर्ष मार्च तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की 21 गीगावॉट की परियोजनाओं को लेकर निविदाएं आमंत्रित करेगी।जिसमें तीन से चार हजार मेगावॉट की हिस्सेदारी पवन बिजली (विंड पावर) की होगी।तीसरे और चौथे दौर की निविदाओं में प्रत्येक चरण में 1.5 से 2 गीगावॉट की बोली लगेगी।
दरअसल अब अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सौर और पवन बिजली परियोजनाओं को लेकर निविदाओं के दौर हो चुके हø।जिसके तहत पहले दो दौर की परियोजनाओं से 2000 मेगावॉट विंड पावर की क्षमता जुड़ेगी।जिसको लेकर केद्रीय बिजली एवं अक्ष्य ऊर्जा मंत्री श्री आर.के.सिंह ने 24 दिसम्बर2017 को कहा कि मादी सरकार की तरफ से 2018-19 और 2019-20 में विंड पावर उत्पादन की क्षमता में दस दस हजार मेगावॉट की क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है। इस समय देश में 32 हजार मेगावॉट विंड पावर का उत्पादन हो रहा है।जिसको लेकर मोदी सरकार की चाहत है कि 2022 तक विंड पावर की उत्पादन क्षमता 60000 मेगावॉट तक पहुंच जाए।जिसको लेकर मोदी सरकार की तरफ से अक्ष्य ऊर्जा के क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढाने को लेकर लगातार सौर ऊर्जा पर जोर दे रही है।जिसके तहत 2022 तक एक लाख मेगावॉट सोलर पावर उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने को लेकर मोदी सरकार की तरफ से अगले दो वर्ष में 30-30 हजार मेगावॉट की परियोजनाओं को लेकर निविदाएं मंगाएगी।
श्री सिंह ने दावा किया कि 2022 तक अक्षय ऊर्जा से 1.75 लाख मेगावॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।जिसकी तुलना में भारत पांच वर्ष में दो लाख मेगावाट अक्ष्य ऊर्जा उत्पादन करने लगेगा।सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरणों पर आयात शुल्क लगाने के सवाल पर श्री सिंह ने कहा कि इसको लेकर इस क्षेत्र में घरेलू उद्योग के आत्मनिर्भरता के स्तर तक पहुंचने का इंतजार करना होगा।

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