``राजनैतिक कीमत चुकाने की तैयारी...''''

विरोधियों को चुनौती: गुजरात के चुनाव का संदेश 
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने ``भारी राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ी तो उसके लिए भी तैयारी'' बताई गई है। यह स्पष्ट संदेश  गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए है। नई दिल्ली में आयोजित `हिन्दुस्तान टाइम्स' के `लीडरशिप समिट' को संबोधित करते हुए उन्होंने गत तीन वर्ष के दौरान भ्रष्टाचार व ब्लैकमनी को खत्म करने के लिए उठाए गए कदम और लोगों का जीवन स्तर उन्नत करने के लिए क्रियान्वित की गई योजनाओं का उल्लेख कर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि एक छोटा वर्ग-मुठ्ठीभर लोग विरोध कर रहे है पर परिवर्तन के लिए उठाए गए और उठाए जा रहे ये कदम `अविचल' और `अटल' है ।
गुजरात में भाजपा की प्रचार सभाओं में तो प्रधानमंत्री ने घोषित किया ही है कि ``यह मोदी है: भ्रष्टाचार- ब्लैकमनी के खिलाफ जंग जारी रहेगी और किस दबाव या धाøस धमकी को वश नहीं होगा।'' अप प्रधानमंत्री ने व्यापार व उद्योग जगत के अग्रणियों की परिषद में भी अपना दृढ निकाय व कटिबद्धता घोषित कर राजनैतिक विरोधियों को जवाब देते हुए चुनौती दी है: नरेद्र मोदी ने गुजरात के चुनाव और कांग्रेस के नेता-नेताओं के नाम लिए बिना यह चुनौतीरूप संदेश दिया है। गुजरात में विकास की विफलता और नोटबंदी-जीएसटी चुनाव के मुद्दे है और प्रधानमंत्री पर आलोचना-प्रहार हो रहे है । किसी भी कीमत पर भाजपा को हराने के प्रयास किए जा रहे है । गुजरात के बाद दिल्ली की बारी आएगी ऐसी धारणा की जा रही  है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने ``भारी राजनैतिक कीमत चुकाने की तैयारी'' बताते हुए गुजरात के मतदाताओं को यह संदेश भी दिया है कि तीन वर्ष पूर्व जनता ने परिवर्तन के लिए जनादेश किया है। भ्रष्टाचार-ब्लैकमनी के खिलाफ जंग शुरू करने के लिए जनादेश दिया है तदनुसार सरकार आगे बढ़ रही है। यूपीए सरकार के अंतिम तीन वर्ष के कामकाज व एनडीए सरकार के प्रथम तीन वर्ष के कामकाज के आंकड़े भी उन्होंने दिए। इस समय अपने देश की दृष्टि बदली है। विश्वास बढ़ा है।
जनकल्याण की योजनाएं क्रियान्वित हो रही है। सरकारी नौकरशाही अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील बनी है। गुजरात के मतदाता नरेद्र मोदी को समझने में सक्षम है।
इस बीच, अर्थव्यवस्था में मंदी घट रही होने के संकेत भी प्राप्त हो रहे है । वर्तमान वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी (ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट-सकल घरेलू उत्पाद) 6.3 प्र.श. दर्ज हुआ है। इससे पहले लगातार गिरावट के बाद दर 5.7 प्र.श. हो गई थी अब सुस्ती हट रही है। गुजरात में चुनाव प्रचार में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी आर्थिक क्षेत्र में सरकार पर विफलता का आरोप लगा रहे है और लोगों में निराशा फैलाने का प्रयास कर रहे है । ऐसे में जीडीपी में वृद्धि के समाचार भाजपा के लिए ठीक समयानुकल है। नोटबंदी व जीएसटी की नकारात्मक आलोचना का जवाब अब आंकड़े दे रहे है । जीएसटी की वजह से व्यापार-उद्योग को जो परेशानी उठानी पड़ रही है उसे दूर करने के लिए सरकार सक्रिय है। फिलहाल जो आंकड़े आ रहे है, उनसे व्यापार-उद्योग की निराशा दूर होगी और भविष्य सुधरने का विश्वास होगा ऐसा सरकारी सूत्रों का मानना है।
गुजरात तो प्रधानमंत्री का गृह राज्य है और दो दशक से अधिक भाजपा का शासन रहने के बाद अब जातिवाद की चुनौती उठी है ऐसे में मानो गुजरात विधानसभा के चुनाव नहीं बल्कि नरेद्र मोदी के नाम लोकमत लिया जा रहा हो ऐसा माहौल बना है। इसी कारण नरेद्र मोदी ने चुनौती दी है कि गुजरात में बड़ी राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ी तो भी केद्र सरकार भ्रष्टाचार व ब्लैकमनी के खिलाफ जंग जारी रखेगी। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी घोषित कर रहे है कि सत्ता प्राप्त हुई तो किसानों के Iण माफ किए जाएंगे। अलबत्ता इसकी एवज में कोई वैकल्पिक योजना पेश नहीं की है! नरेद्र मोदी अब आगामी दिनों में अधिक आक्रामक बनेंगे ऐसा प्रतीत होता है।

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