उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक गैस खोजेगी ओएनजीसी

उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक गैस खोजेगी ओएनजीसी
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अब ओएनजीसी की तरफ से हिमालयी क्षेत्र के राज्य उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक गैस और तेल का पतला लगाएगी।जिसको लेकर बकायदा सर्वेक्षण का कार्य भी शुरु कर दिया गया है।यह सर्वेक्षण उत्तराखंड के अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश में भी किया जा रहा है।
चूंकि ओएनजीसी की सर्वेक्षण टीम में शामिल मैकेनिकल इंजीनियर श्री पूर्ण सिंह ने कहा कि ओएनजीसी सर्वे कार्य में अल्फाजियो इंडिया लिमिटेड का भी सहयोग ले रही है।यह कम्पनी प्राकृतिक गैस और तेल की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की तलाश करती है।उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण सितम्बर 2016 में उतराखंड के कुमाऊ वागेश्वर से शुरु किया गया था जो कि यह जून 2017 तक चला।जिसके तहत बागेश्वर के अतिरिक्त पिथौरागढ और चमोली को भी कवर किया गया।इस वर्ष सितम्बर से सर्वेक्षण कार्य रुद्रप्रयाग के तिलवाड़ा कस्बे से आरंभ किया गया था जो कि अब उत्तरकाशी तक पहुंच चुका है।ऐसे में उत्तराखंड में पहली बार शुरु हुए इस सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा का विश्लेषण किया जाएगा।इस सर्वेक्षण के तहत चिन्हित क्षेत्र में 20 मीटर गहरे गड्ढे खोदे जा रहे है।जिनमें एक विशेष मशीन लगाई जा रही है।इस मशीन से मिले डाटा का चिप में ट्रासफर किया जा रहा है।जिससे शीघ्र ही यह राज खुल जाएगा कि हिमालय के गर्भ में कौन कौन से पदार्थ हø।इसके अतिरिक्त मशीन भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल को भी रिकॉर्ड कर रही है।
तेल व गैसके मिले अधिक दाम 
सरकारी कम्पनी ओएनजीसी की चाहत है कि उसे केजी बेसिन और कच्छ की खाड़ी में खोजे गए क्षेत्रों से उत्पादित गैस को लेकर अधिक कीमत मिले।जिसको लेकर ओएनजीसी की तरफ से मौजूदा दाम की तुलना में दोगुना मूल् क मांग की गई है।जिसको लेकर सरकार के फार्मूले के तहत फिलहाल गैस की कीमत 2.89 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (गैस मापक यूनिट) निर्धारित है।जिसको लेकर ओएनजीसी की तरफ से कहा जा रहा है कि ओएनजीसी को आन्ध्र प्रदेश और गुजरात के समुद्री इलाके से गैस निकलाने को लेकर न्यूनतम छह डॉलर एमएमबीटीयू कीमत चाहिए।तभी केजी बेसिन और कच्छ की खाड़ी की फील्डों से गैस का उत्पादन करना आर्थिक दृष्टि से लाभदायक साबित होगा।

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