निर्यात से दोगुनी हो सकती है किसानों की आय

मुंबई। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से किए गए अपने निवेदन में भारतीय कृषि उत्पादों की विश्वभर में खपत बढ़ाने के लिए उदारतापूर्कक लागत खर्च करने की मांग की है। सीसीएफआई के चेयरमैन राजू श्रॉफ ने कहा कि ``हम कृषि मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और एपीईडीए जैसे संस्थानों के सामने पिछले कई महीनों से याचिका दायर कर रहे हø। अब यह केद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निर्भर है कि वह आगामी 2018-2019 के बजट में भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा देने हेतु एक अच्छी-खासी धनराशि अलग से निर्धारित करें। ठोस प्रयासों के जरिए आगामी 5 वर्ष़ों में हमारे कृषि-निर्यात को तिगुना और भारतीय किसानों की आय को दोगुना किया जा सकता है। कृषि Iण माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि करना कोई समधान नहीं है।''
``हमारा सरकार से अनुरोध यह है कि कृषि को महज उत्पादन करने से खपत, मार्केटिंग एवं ग्लोबल ट्रेड पर आधारित योजना की तरफ ले जाया जाए।'' वर्तमान भारतीय कृषि-निर्यात 35 बिलियन यूएस डॉलर का है, जिसे आगामी 5 वर्ष़ों में ज्यामितीय वृद्धि करते हुए 100 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। यह लक्ष्य कृषि-निर्यात उत्पादन एवं व्यापार हेतु एकल प्राधिकरण की स्थापना करके प्राप्त किया जा सकता है। ``माननीय प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे अपने दूतावासों से व्यापारिक राजदूतों के तौर पर काम लें ताकि उनके मेजबान देशों में हमारे कृषि-उत्पाद निर्यात की मात्रा दोगुनी या तिगुनी की जा सके।''- यह राजू श्रॉफ का कहना है।
21वी' सदी की भारतीय कृषि संरचनागत दृष्टि से भी अलग है, जो बड़े पैमाने पर उच्च मूल्य वाले घटकों से संचालित होती है- जिनमें बागवानी, डेयरी, कुक्कुट पालन और अंतर्देशीय मत्स्य-पालन शामिल है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन देश है। भारत में फलों एवं सब्जियों का उत्पादन और खपत (256 मिलियन टन) चावल और गेहूं जैसे बुनियादी भोज्य पदार्थ़ों से भी अधिक (198 मिलियन टन) है। भारत के खाद्यान्न बाजार का आकार 312 बिलियन डॉलर (अनुमानित) का है, जिसका एक तिहाई हिस्सा (101 बिलियन डॉलर) फलों एवं सब्जियों से गठित होता है। इसके बाद दूध और अंडों के बाजार (74 बिलियन डॉलर) की हिस्सेदारी है। इस बाजार में अनाज की हिस्सेदारी (61 बिलियन डॉलर) दयनीय है, जो तीसरे स्थान पर है। इस क्रम में सबसे नीचे गोश्त का बाजार है, जो मात्र 14 बिलियन डॉलर का है।

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