आर्थिक सुधार : बढ़ते कदम

केद्र सरकार के आगामी बजट में जनहित और लोकप्रिय कदमों का संतुलन होगा और विकास तीव्र बनेगा, ऐसी आशा और अटकलों के बीच एनडीए सरकार ने आर्थिक सुधार की दिशा में गति बढ़ायी है। विदेशी निजी निवेश आकर्षित करने के लिए जो छूट-सिंगल ब्रांड रिटेल, विद्युत पावर एक्सचेंज, फार्मेसी तथा निर्माण के क्षेत्र में जो सुधार किया है। उसके फलस्वरूप रोजगार बढ़ेगा और उत्पादकों तथा ग्राहकों को लाभ होगा। हालांकि आर्थिक सुधार की दिशा में आगे कदम बढ़े है । अब दूसरा कदम बजट में घोषित होने की अपेक्षा है। बजट के बदले इस समय ही यह सुधार घोषित करना जरूरी था। इसके लिए कारण है - प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी दो सप्ताह बाद वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जा रहे है । विश्व फोरम के सम्मेलन में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उच्चाधिकारी और नेता हिस्सा लेते है । पूर्व में प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौडा उपस्थित रहे थे, उसके बाद नरेद्र मोदी दूसरे है! उनके साथ वित्तमंत्री अरुण जेटली होंगे। अमेरिका के प्रमुख डोनाल्ड ट्रम्प भी उपस्थित रहने वाले है और नरेद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात निश्चित मानी जाती है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले आर्थिक सुधार का मजाक उड़ाते फिरें, जीएसटी को गब्बरसिंह टैक्स कहें और `जीडीपी' को ग्रास डिवाइजिस पालिटिक्स कहें। विदेशी भूमि पर जाकर भारत की आलोचना करते रहें - भारत सरकार की आर्थिक नीति की विश्व के विशेषज्ञ सराहना कर रहे है । हमारी विकास दर की चिंता होने के बावजूद विदेशी निजी पूंजीपतियों को भारत के आर्थिक भविष्य में पूरा विश्वास है और जिससे  ही - यूपीए सरकार के अंतिम वर्ष - 2013-14 में विदेशी निजी निवेश जो 30 अरब डालर था, वह 2016-17 में बढ़कर 60 अरब डालर से ऊपर पहुंच गया है!
विश्व बøक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान वर्ष में भारत की विकास दर 7.3% होगी और इसके बाद के वर्ष़ों में निरंतर बढ़ती रहेगी। भारत की तुलना में चीन को देखें: वर्ष 2017 में विकास दर 6.8% की धारणा थी, वह घटकर 6.4% रह गई है!
वर्ष 2017 में भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी और जीएसटी का असर पड़ा, लेकिन अब उसका अच्छा अवसर और सकारात्मक पहलू दिखायी दे रहा है। जिससे वर्तमान और आगामी वर्ष़ों में फल दिखने और मिलने की आशा है। आर्थिक सुधार और विदेशी निजी निवेश के लिए दी जाती छूट के फलस्वरूप व्यापार-उद्योग में निवेश बढ़ेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।
सरकार के ठोस सुधार का भी कांग्रेस विरोध करती है। अभी तक अच्छे दिन और रोजगार के मुद्दे पर मोदी का मजाक उड़ाने वाले नेताओं को अब सुधार होने की चिंता है! इस वर्ष कर्नाटक और अन्य राज्यों के चुनाव है तब हिन्दुवाद उभरकर आया है! अर्थव्यवस्था के सुधार का स्वागत करने के स्थान पर विदेशी पूंजी की आलोचना होती है! यद्यपि, डा. मनमोहन सिंह की प्रतिक्रिया कैसी होगी?

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