सूती और पीसी धागा लुढ़का, रोटो चमका

सूती और पीसी धागा लुढ़का, रोटो चमका
हमारे संवाददाता
सूती धागा बीते साल में धूम-धड़ाका के साथ, आतिशबाजी करते हुए काफी ऊंचे भावों के साथ समाप्त होकर नये साल में नई ऊंचाइयों को बनाने यानी छूने की शुभ कामनाओं के साथ समाप्त हुआ। लेकिन नया साल का पहला सप्ताह सुस्त रहकर दूसरे सप्ताह में घटे भावों का संदेश लेकर आया। इससे भाव भी घटे और व्यापार भी नहीं हुआ। अगर देखा जाये तो आखरी में यानी कि दिसंबर माह में बहुत ज्यादा बाजार भाव बढ़ना, खतरनाक साबित हुआ। वैसे बहुत तेजी के बाद हल्की या थोड़ी मंदी आती रही है। सूती धागा लेवाली के अभाव में सुस्त होकर, साथ में पापलीन और केम्ब्रिक को भी ठंडा कर दिया। पीसी में यार्न घटने और व्यापार नहीं होने के साथ कपड़ा में भी यही हाल है। सिर्फ चमक आई है रोटो के यार्न में। और उसका सकारात्मक असर भी कपड़े पर आया। सूत व्यवसायी पंकज पसारी (शिव शक्ति फेब्रिक्स) ने बताया कि रॉ मटीरियल का भाव बढ़ना, स्पिनरों द्वारा प्रोडक्शन कम करना तथा लेवाली अच्छी होने से रोटो में 2 से 2.50 रुपया किलो बढ़ा है।
सूती धागा:- सूती धागा दीपावली के बाद सुपरफास्ट ट्रेन की तरह भागता गया और एक नये मुकाम पर आ गया है और उसकी मंजिल क्या है? इसका पता नहीं चल रहा। नये साल में घटते भावों में व्यापार भी कम है। बुनकर फिलहाल पुराना यार्न लेकर कपड़ा की डिलीवरी में ध्यान लगा रहा है। सबसे ज्यादा बढ़ने वाला 60 वेफ्ट, घटने में रहकर लगभग 10 रुपया किलो कम हुआ है। बाजार सभी काउन्ट में कम हुआ है। अब सूती धागे की नई चाल से कपड़ा मार्केट की चाल तय होगी।
रोटो और पीसी:- रोटो में सप्ताह भर में दो से 2.50 रुपया की तेजी हुई और व्यापार भी बढ़ा। कपड़ा बाजार भी हम साथ-साथ है। पीसी में यार्न और कपड़ा दोनों सुस्त है। पिछले दिनों में लंबा व्यापार होने के बाद ये ब्रेक के बाद वाली स्थिति है। कुल मिलाकर 2018 में सभी तरह का व्यापार अच्छा रहना चाहिए। धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आ रही है। या कह ले आ गई है। इसमें समयानुसार सुधार होता रहेगा।
मालेगांव में आधार कार्ड केद्र सीज
सरकार कहती है कि भ्रष्टाचार कम करके रहेंगे। लेकिन स्थानीय क्षेत्र तक यह चारों ओर फैला हुआ है। पिछले दिनों नाशिक कलेक्टर आफिस और मालेगांव में आधार कार्ड सेन्टर पर ज्यादा पैसे लेने के कारण आफिस सीज हुए है । सरकारी नियमानुसार आधार कार्ड सुधारने के लिए 30 रुपया फीस है। जबकि अभी भी 100 रुपये वसूले जाते है ।
इसी तरह 100 रु. का स्टøप पेपर (बान्ड) लेने पर 110 रुपया लिया जा रहा है। आज कितने स्टøप पेपर बिकते होंगे और आम आदमी की जेब कट रही है। इसके लिए कोई आवाज भी नहीं उठाता है। इसलिए ये सब चल रहा है। वेंडर कहता है सब देते है ।

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