व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी

व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । देश के लघु उद्योग व व्यापार जगत की अग्रणी संगठन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद श्री श्याम बिहारी मिश्रा एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री विजय प्रकाश जैन ने संयुक्त बयान में मोदी सरकार के इस पर हैरानी और भारी विरोध जताया है।उन्होंने संयुक्त बयान में कहा कि इस समय भारत में रोजगार का विकट संकट है ऐzस में यह कदम एकदम दुर्भाग्यपूर्ण है और यह भाजपा के चुनावी वायदे के खिलाफ है।ऐसे में ऐसा लगता है कि मोदी सरकार अब किसी न किसी बहाने मल्टी ब्रांड रिटेल ट्रेड में भी 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने की फिराक में है।वैसे भी मोदी सरकार की तरफ से अंदरखाने कुछ शर्त़ों की आड़ में मल्टी ब्रांड रिटेल ट्रेड में 100 प्रतिशत एफडीआई के दरवाजे खोलने को लेकर प्रयासरत है।जिसके तहत कम से कम 10 करोड़ डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर एक निश्चित संख्या में लोगों को रोजगार देने की बातें हो रही है।बहरहाल मल्टीनेशनल कम्पनियां सिर्फ शिक्षित लोगों को रोजगार देगी।हालांकि पारम्परिक रिटेल ट्रेड में देश के सबसे अधिक अनपढ श्रमिक कार्यरत है ।ऐसे में इसकी लॉबिंग में लगे लोग कम्पनियें पर स्थानीय रिटेलरों और यूनिटों से माल खरदने की शर्त की बातें कर रहे हें बहरहाल व्यापारिक संगठनों की तरफ से कहा जा रहा है कि एनडीए ने यूपीए सरकार के फैसले के तहत 33 प्रतिशत लोकल आउटसोर्सिंग को भी खारिज कर दिया था और कहा था कि किसी भी रुप में एफडीआई की अनुमति नहीं मिलने देंगे।व्यापारिक संगठनों की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार पहले तो सशर्त मंजूरियां देगी और विदेशी निवेश आ जाने के बाद उन्हें रियायतें देते हुए सभी बंदिशें हटा लेंगी।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी की अध्यक्षता में केद्रीय कैबिनेट की बैठक 10 जनवरी 2017 को नई दिल्ली में हुई थी।जिसमें सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेड एवं कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई का फैसला किया है।ईज डूइúग बिजनेस को बढावा देने को लेकर मोदी सरकार की तरफ से विदेशी विदेश नीति में छूट के साथ ही एयर इंडिया के निवेश में विदेशी कम्पनियों को 49 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की छूट भी दे दी है।ऐसेमें अब विदेशी एयरलाइंस कम्पनियां एयर इंडिया में अप्रुवल रुट से हिस्सेदारी लेने को लेकर स्वतंत्र हø।इसी दिशा में आगे कदम बढाते हुए मोदी सरकार की तरफ से विदेशी संस्थागत निवेशकों और विदेशी फोर्टफोलियो निवेशकों को प्राइमरी मार्केट से पॉवर एक्सचेंज में निवेश की मंजूरी दे दी है।मोदी सरकार की तरफ से यह कदम अपनी एफडीआई नीति को सरल करते हुए देश में विदेशी निवेश को लुभाने को लेकर उठाया गया है।ऐसे में मोदी सरकार को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में एफडीआई से भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश,इनकम और रोजगार में अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी।वैसे पिछले दिनों मोदी सरकार की तरफ से अपनी एफडीआई नीति में सुधार करते हुए डिफेंस, कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट, इंश्योरेंस, पेंशन, अन्य वित्तीय सेवाओं सहित ब्रॉडकास्टिंग,सिविल एविएशन और फार्मा सेक्टर में निवेश लुभाने को लेकर कोशिश की गई थी।जिसके चलते देश में एफडीआई में काफी बढत देखने को मिली थी।    यद्यपि वित्त वर्ष 2014-15 में केद्र सरकार को 45 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश मिला था।बहरहाल वित्त वर्ष 2013-14 में यह महज 34 बिलियन डॉलर था।इसके बाद 2015-16 में मोदी सरकार को कुल 55.46 बिलियन डालर का विदेशी निवेश मिला था।जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में एफडीआई के मामले में विशेष महत्वपूर्ण रहा और कुल एफडीआई 60 बिलियन डॉलर से पार निकल गया।

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