ई-वे बिल फरवरी के बजाय अप्रैल से लागू होने की संभावना

ई-वे बिल फरवरी के बजाय अप्रैल से लागू होने की संभावना
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में करों की चोरी रोकने को लेकर पहली फरवरी से लागू होने वाली ई-वे बिल व्यवस्था के खिलाफ देश भर के व्यापारियों की अग्रणी संगठनों के प्रतिनिधियों की तरफ से लगातार आवाज बुलंद की जा रही है।ऐसे में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में ई-वे बिल को पहली फरवरी के बजाय पहली अप्रैल से लागू होने की संभावना परिलक्षित हो रही है।
दरअसल जीएसटी काउंसिल की तरफ से देश भर में ई-वे बिल व्यवस्था पहली फरवरी से लागू करने का ऐलान किया जा चुका है।बहरहाल देश भर के व्यापारीवर्ग ई-वे बिल को पहली फरवरी से लागू कराने को लेकर कतई सहमत नहीं है।जिसको लेकर पिछले दिनों राज्यों के प्रतिनिधि और व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई थी।जिसमें ई-वे बिल को पहली फरवरी के बजाय पहली अप्रकराने को लेकर मोटे तौर पर सहमति बनी है।वैसे तो जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक 18 जनवरी को होगी जिसमें इस अहम मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है।ऐसे में पहले ही व्यापारियों के साथ बैठक करने वाले जीएसटी काउंसिल के राज्य प्रतिनिधियों की तरफ से कहा गया है कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में ई-वे बिल चर्चा का बड़ा मुद्दा होगा और इस अहम विषय पर फैसला लिए जाना संभव है।हालांकि ई-वे बिल का ट्रायल 15 जनवरी से शुरु हो जाएंगे।इस बाबत देश भर के व्यापारियों की अग्रणी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहार कि देश भर के व्यापारियों को इस बात का भय है कि अभी जैसे वह जीएसटी की रिटर्न फाईल करने में परेशानियों का सामना कर रहे है ।ऐसे में मासिक जीएसटी रिटर्न की बजाय रोज करोड़ों की संख्या में ई-वे बिल जेनरेट होने पर क्या सिस्टम सही काम करेगा?ऐसे में हमारी मांग है कि ई-वे बिल नए वित्त वर्ष से लागू किया जाए।ई-वे बिल की लिमिट 50 हजार रुपए से बढाकर तीन लाख रुपए किया जाए।इस कम लिमिट से कारोबारियों को लेखा जोखा का काम बढ जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी पोर्टल पर आ रही फाइलिंग की दिक्कतों को दूर किया जाए।एपीएमसी सेस हटाने और ब्रांडेड फूड ग्रेन पर जीएसटी हटाने की मांग की है।  

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