ई-वे बिल व्यवस्था एनआईसी के माध्यम से होगी दुरुस्त

ई-वे बिल व्यवस्था एनआईसी के माध्यम से होगी दुरुस्त
हमारे संवाददाता
मोदी सरकार की तरफ से अब नेशनल इंफॉरमेटिक सेन्टर यानि एनआइसी के माध्यम से ई…-वे बिल व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दे रही है।चूंकि ई-वे बिल जेनरेट करने की संख्या के आधे-अधूरे अनुमान के चलते पहली फरवरी को पोर्टल विफल हो गए थे।ऐसे में ई-वे बिल व्यवस्था अब एनआइसी के आकलन के बाद ही अपग्रेड किया जा सकेगा।ऐसी स्थिति में ई-वे बिल को पुन: लागू करने में अधिक समय लगने की संभावना है।हालांकि मोदी सरकार की तरफ से पहली फरवरी से ई-वे बिल को लागू करने का ऐलान किया था।बहरहाल ई-वे बिल जेनरेट करने का लोड अधिक होने से सिस्टम पहले दिन ही बैठ गया था।जिसके चलते मोदी सरकार की तरफ से यह प्रक्रिया एक महीने को लेकर टालनी पड़ी है।हालांकि अभी इस बात की संभावना काफी कम है कि एक महीने के भीतर इस प्रक्रिया को फिर से लागू किया जा सकेगा।
दरअसल मोदी सरकार की तरफ से ई-वे बिल सिस्टम की विफलता को दुरुस्त करने को लेकर एनआइसी को जिम्मा साøपा गया है।वैसे तो मोदी सरकार के भीतर होने वाले आइटी नेटवर्क का कार्यभार एनआइसी ही संभालता है।ऐसे में केद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार और जिला स्तर तक एनआइसी के नेटवर्क पर ही समस्त सरकारी संवाद होता है।जिसको लेकर केद्र सरकार का समस्त ईमेल ढांचा को दुरुस्त रखने का कार्य एनआइसी के नेटवर्क पर टिका हुआ है।जिसको लेकर एनआइसी के महानिदेशक नीता वर्मा ने कहा कि एनआइसी फिलहाल ई-वे बिल की संभावित संख्या का आकलन कर रहा है।जिसके तहत विभिन्न स्त्रोंतों से आंकड़े जुटाने के बाद ही इसे जीएसटी कांउसिल को साøपा जाएगा।उल्लेखनीय है कि जीएसटी का आइटी ढांचा जीएसटीएन के जिम्मे है और इसे प्रमुख आईटी कम्पनी इंपोसिस ने तैयार किया है।जिसके तहत शुरु से लेकर अब तक एनआइसी को जीएसटी के तकनीकी काम से एक तरह से अलग रखा गया था।बहरहाल अब ई-वे बिल बनाने की बारी आई तो एनआइसी से सम्पर्क किया गया है।ऐसे में अब एनआईसी और इंफोसिस ने मिलकर एक शुरुआती ई-वे बिल सिस्टम का ढांचा तैयार किया है।चूंकि एनआइसी बिलों की संख्या का आकलन विभिन्न स्तरों पर करेगी।जिसमें उन लोगों को भी शािमल किया जाएगा जो कि कम्प्यूटर से सिस्टम में लॉग इन तो कर सकेंगे लेकिन सर्वर तक नहीं पहुंच सकेंगे।इसके साथ ही कुछ लोग जो कि सर्वर पर पहुंच तो गए किन्तु बिल जेनरेट नहीं कर पाए। ऐसे में एनआइसी को इसका आकलन करने में एक पखवाड़े तक का समय लग सकता है।जिसके बाद ही तय किया जाएगा कि ई-वे बिल के मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड करने की आवश्यकता है अथवा नहीं।जिसको लेकर इस विषय पर आगे मंथन
किया जाएगा।ऐzस में ई-वे बिल को पुन: लागू करने में अधिक समय लगने की संभावना बलवती हो रही है। 

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