सूती धागे में तेजी के बावजूद कामकाज

सूती धागे में तेजी के बावजूद कामकाज
हमारे संवाददाता  आलोच्य सप्ताह में धागे के भावों में उछाल आया है। धागे के भाव मिले बढ़ाकर के बोल रही है। धागे में भाव बढ़ने से कपड़ा परेशान है। सूत की मंदा तेजी इस व्यापार को सबसे ज्यादा ही नुकसान पहुँचा रही हैं । बाजारों में धागे की तेजी के बाद भी कपड़े में कामकाज नहीं बढ़ने से कपड़ा उत्पादक कपड़े के उत्पादन में ज्यादा रूचि नहीं ले रहे है। चादर का काम करने वाले व्यापारियों का कहना है कि चादर में इन दिनों दिसावर की मंडियों से अच्छी मांग बनी हुई है। कामकाज चलने से बाजारों में पैसे की आवक बनी रहेगी ।    व्यापारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धागे की मिलों ने धागे के भाव बढ़ाकर के बोलने शुरू कर दिये । तेजी का कारण स्पष्ट नहीं है। कुछ मिलें तो कोम्बर में तेजी के चलते ही भाव बढ़ाकर के बोल रही है तो कुछ मिलें कपास में तेजी के कारण भावों को बढ़ने का कारा बता रहे हैं । कुल मिलाकर के मिलों ने दो से चार रुपये किलो तक भाव बढ़ाकर के बोलने आरम्भ कर दिये है। मिलों को ज्यादा धागा तो नहीं बिका है। लेकिन बाजार मिलों के हाथों में ही रहने की सम्भावना है। क्योंकि धागे में काम करने वाले डीलरगण तैयार धागा ही खरीद रहे है। बाजारों में ज्यादा धागा न होने से मिलें की मनमानी कुछ दिन चल सकती है।   पावरलूम कारखाना चलाने वाले कपड़ा उत्पादकों का कहना है कि धागे में भाव बढ़ने के साथ ही कपड़ा उत्पादकों ने कम भाव पर कपड़ा बेच रखा है अब उन्हें नये भाव का धागा लेकर के माल बनानें पर नुकसान का सामना करना पड़ेगा । यदि मय से आर्डर पूरे नहीं किये जाते तो उसको पुराना भुगतान नहीं मिलने पर नुकसान ही नुकसान है। कपड़ा उतपादकें को धागे के भाव पड़े रहने पर ही लाभ रहता है। क्योंकि माल बेचने के बाद ही ही ज्यादातर कपड़ा उत्पादक धागे की खरीददारी करते हैं । जब भी भावों में तेजी आती है तो इसका सीधा नुकसान कपड़ा उत्पादकों को ही होता है।    चदर का सीजन होने के कारण ही बाजारों में माँग अच्छी बनी है। कपड़ा सप्लायरों को का कहना है कि जितना माल बन रहा है उतना माल आसानी से बिक रहा है। सूत की मंदी तेजी का इन बाजारो पर ज्यादा पड़ने वाला नहीं है। कामकाज चलने के साथ ही धन का प्रवाह भी ठीक ही बना हुआ है।   

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