दाल-दलहनों के आयात-निर्यात से चने में सट्टात्मक गतिविधि

दाल-दलहनों के आयात-निर्यात से चने में सट्टात्मक गतिविधि
हमारे संवाददाता   स्थानीय संयोगिता गंज थोक मंडी मे सट्टा बाजार की चालो पर फंसलों की बढ़ती आवा-जाही हो रही है । महंगाई को कंट्रोल करना या क्षको को सम्हालना जैसे विषय के कारण सरकार में आयात-निर्यात की चर्चा  सरकार क्या बनती है डिब्बा व्यापार और सटोरियों की चाल तेज हो जाती है । चने और अन्य कुछ दलहनों पर आयात शुल्क बढ़ाने से भाव में तेजी या मजबूती बनी हुई रही है । छोटे व्यापारियों के अनुसार वायदा बाजर के चलने के पूर्व  देश में  भाव पर तेजी-मंदी का अतिरेक कोई  वर्षभर में एक या दो बार होता था । अगर तेजी होती भी तो उत्पादन अनुसार भाव गिर जाया करते थे । उनके अनुसार अब तो  अधिक उत्पादन अधिक सट्टा व्यापार बन गया है । प्याज का उदाहरण  हाल-फिलहाल ताजा है । देश में अधिक उत्पादन प्याज का क्या हुआ  जनता की मुसीबत बढ़ गई । 5 रु. किलो पर मिलने वाला प्याज  30-40 रु. किलो क्वालिटी अनुसार भाव हो गये । इसके पीछे सीध स्टाकिस्टो का होथ बताया जा रहा है । इन्होने सरकारी प्याज और किसानों से बड़े सस्ते में खरीदा और सट्टे की घुरी चलाकर 40 रु. किलो तक भाव करवा दिया । भारी मुनाफा कमाई इन स्टाकिस्ट व्यापारियों की हो  गई ।   बहरहाल एक बार फिर चना 3700-3725 रु. उंचे स्तर तक नीचे में आया था जो कि गुरुवार की शाम तक  चना कांटा 3730 रु. तक  तेजी में होना बोला जा रहा था । कारण आयात शुल्क के बढने और पीले मटर का आयात पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा से हाजिर चने में तेजी हुई । आकार्य की बात यह है कि किसानी मंडी में थोक में सभी दलहनों के भाव के मुकाबले खुले खेरची व्यापार में  लगभग 20-25 प्रतिशत और माल संस्कृति में भारी उपर है । अर्थात् कोई भी दाल-दलहन 80 रु. प्रति किलो से नीचे नहीं है और मसाला आयटम की बात तो आकार्य ही है । सट्टे में कालाबाजारी मुनाफाखोरी पर सरकार का कोई अंकुश नहीं । सभी दलहन-दालों पर स्टॉक होल्डरों का कब्जा बताया जा रहा है और प्रपंच क्षको के माथे पर ढोला जा रहा है कि अधिक आयात के कारण भाव नीचे हो गये है जिससे भाव नहीं मिल रहा है । कृषको की सुने तो  उनके अनुसार 80 प्रतिशत कृषकों के पास कृषकीय उत्पादन हाथों हाथ निकलकर स्टाकिस्टो के पास जमा हो जाता है ।  थोक मंडी में काबुली चना 3000 बोरी, चना 500 बोरी, तथा सोयाबीन 2000, सरसों 20 से 25 के लगभग बोरियों के साथ ही अन्य दलहनों की भी आवक हो रही है । पिछले वर्ष हालांकि चने की बंपर पैदावार हुई है । आयात भी भारी हुआ है । इस वर्ष भी हाल-फिलहाल के मौसम से रबि फसल के अच्छे आने के आसार है । चने में  हुई तेजी के असर से  चना दाल भी 10 रु. थोक  में तेज होकर 4400 से  4600 रु. रही और बेसन भी उछलकर 2800 से 3000 रु. तक हुआ बताते है । बेसन के अधिक तेज होने के पीछे पीले चने के आयात पर कंट्रोल होने के भी बाते है । कर्नाटक तरफ  के नये मूंग के साथ ही स्थानीय की आवके बढ़ने के बावजूद मूंग में विगत् हप्ते के मुकाबले तेजी काहोना बताया जा रहा है भाव 4500 से 5100 रु. तक में होना बताया जा रहा था ।   व्यापारिक क्षेंत्रों के अनुसार देशी उड़द के साथ आयातित उड़द का अधिक स्टॉक हो जाने तथा व्यापारिक मांग के कमजोर रहने से उड़द में मंदी की संभावनाएं अधिक हुई प्रतीत होती है । गत्  हप्ते नीचे भाव पर ही स्थिर होना बताया गया है भाव 2500 - 3600 रु. तक होना बताए गये । मसूर में  मंदी रही मगर उंचे भाव पर मांग  कमजोर  रहने  के बावजूद मनोवृत्ति तेजी नहीं होना बताई गई । भाव 3100 से 3350 रु. क्वालिटी अनुसार रही । दाल मिलों की मांग कमजोर रहन से तुवॉर मे भी नरमी होना  बताया गया है । तुवॉर का भाव 3850 से 3950 रु. बताया गया और महाराष्ट्र तुवॉर का भाव 4300 रु. और म.प्र. तुवॉर का भाव 3900 से 3950 रु. बताया गया है।  जबकि इन भाव पर सभी दालों में कामकाज कमजोर चल रहा है । तुवॉर दाल फूल 6200 से 6300 रु. मार्केवाली 6600 रु., मूंग दाल 5500 से 5600 रु. बोल्ड में 5700 रु. तक थी, उड़द दाल 4200-5100 रु., मोगर 6000 -6500 रु. भाव क्वालिटी अनुसार बताये गये ।   

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