पामतेल की तेजी से सोयातेल में भारी तेजी, सोयाबीन की हालत में सुधार

पामतेल की तेजी से सोयातेल में भारी तेजी, सोयाबीन की हालत में सुधार
हमारे संवाददाता      अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में डीओसी में मांग में भारी कमी आई है मगर गत् वर्ष की तुलनात्मक भाव से इस वर्ष के निर्यात भाव भारी ऊंचे रहे है । विगत् दिनों में सरकार द्वारा आयात शुल्क मे बढ़ोत्तरी करने अर्थात घरेलू स्तर पर भाव बढ़ने की पैरवी के रूप में देखा जा रहा था भी कारण खाद्य में हुई तेजी का रहा है । सोयाबीन 3760 से 3800 रु. भाव की पतली हालत में सुधार के साथ ही सोया और पामतेल क्रमश: 782 और 770 रु. इंदौर का भारी ऊंचा भाव हो गया है । व्यापारिक क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोयातेल में विगत् हप्ते से 40 रु. प्रति 10 किलो पर दोनों श्रेणी के तेल पर भाव तेज हुए है । अर्थात सर्वकालीन ऊंचे भाव हो गये है । भाव की तेजी में अंतरराष्ट्रीय परिदृष्य है या वायदा सट्टा में देशी उद्योगपतियों की रचना है ? यह तो कौन जाने मगर कुछ किसानें की नजरों में शुद्व रूप से ऊंचे कारोबारियों आयातकों-निर्यातकों द्वारा फैलाया गया सट्टा है । सस्ते आयातित पामतेल का ठंड सीजन में भारी आयात होना और गर्मी के मौसम में खपत में निकालने के लिये सट्टे की तेजी की से पामतेल की तेजी के साथ ही सोयातेल को दी जा रही तेजी का सहारा है । उधर अमेरिकन मौसम और अर्ज़ेंटिना-ब्राजिल में सोयाबीन के बढ़ते स्टॉक से देश में सोयाबीन के भावों का मार रखा है । समझदार पढ़े लिखे  और वायदा कारोबार में उलझे किसानों की नजरों में, तेल कारोबारियों को सोया खली की विदेशी मांग से उसके भारी ऊंचे भाव निर्यातकों को उपजे है और देश में खली के भाव मार रखे है तथा उसकी आड में सोयाबीन भाव दबा रखा है । तेल उत्पादकों को वायदा व्यापार मे विदेशी केएलसीई की  तेजी से  विगत् दिनो में सोयातेल की तेजी को सहारा थी और तेल भाव उसी परिदृष्य में सट्टे में  738-740 से 780-782 रु. बढ़ाए  गये । विदेशी वायदा व्यापार अब मंदी का है । केएलसीई के ऊंचे वायदा भावों का मारने के पीछे आयातकों द्वारा वहां लगभग 20 प्रतिशत सौंदों को रद्द होना बताया जा रहा है । इससे केएलसीई वायदा गत् हप्ते गुरुवार को भी 34 पाइंट मंदी में होने से सोयातेल हाजिर भाव 782 से 780 रु. तक होना बताए जा रहे थे । मलेशिया में अब मांग का गिरना से पामतेल के भाव वहां टूट सकते है । समाचार पत्रों या इंलेक्ट्रानिक मीडिया द्वारा मिलती रही खबरों से जानकारी अनुसार देश खपत का 50 प्रतिशत तक तेल उत्पादन कर लेता है बाकी का विदेशी खाद्यतेल का आयात होता है । आकार्य है । देश कभी मूंगफली तेल पर निर्भर होकर भी जनता का पालता था । बढ़ती जनसंख्या पर कृषि उत्पादन बढ़ाने की दरकार के साथ ही देश में कई प्रकार के तिलहनों उत्पादन भी बढ़ता गया है । इससे तेलों का उत्पादन भी बढ़ते संसाधनों से बढ़ता ही जा रहा बताया जा रहा है । सरकार को तेल पर बढ़ते भाव की समीक्षा हेतु देश में तेल-तिलहन उत्पादन और स्टॉक की पूरी जानकारी कर भाव पर समीक्षा करनी चाहिये अन्यथा सट्टे का बाजार देश में महंगाई का हाहाकार मचा देगा । जनता विश्लेषकों और छोटे व्यापारियों से मिली जानकारी के अनुसार सोया-पामतेल में आगे और तेजी की ही धारणा बताई जा रही है। उनके अनुसार सरकार द्वारा किये जा रहे किसान हित् काम में कृषकीय उत्पादन पर ऊंचे भावों को लय दी जाने के समर्थन के पीछे तेल उत्पादकों द्वारा तेल भाव का उपर कर उसी रेशों में तिलहनों के भाव को भी नीचे से कुछ उपर तक लाने का सहारा भर है ।   व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार स्थानीय बाजारों में खाद्यतेलों में व्यापारिक मांग का अभाव है मगर फिर भी  खपत और उत्पादकता में तेजी की सट्टेबाजी जोरों पर है । सट्टेबाजी ने जनता का जीना दूभर कर रखा है यह तो विदित है । कभी तेजी का आलम तो कभी मंदी का आलम।  विदेशी वायदा कारोबारों में सोयातेल भाव गत् हप्ते टूटे है मगर गत् हप्ते गुरुवार को देशी सट्टा वायदा बाजार में मामूली मंदी थी । उधर तिलहनों में भाव की अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनने से कृषक-स्टाकिस्ट परेशान है । भाव भरी रूप से उठ नहीं पा रहे है । सोयाबीन 4400-4500 का घर देख चुकी है घटकर लगभग 3800 रु. तक आ चुकी है । हालांकि स्टाकिस्ट व्यापारी वर्तमान भाव पर भी कृषकों लिये उचित बता रहे है ।  प्लांटों के पास पुराना स्टॉक भी कुछ हद तक भरा पड़ा है । उधर अमेरिकी भू-भाग की ओर सोयाबीन की बंपर पैदावार से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डीओसी की पड़ी कमजोर मांग भी भारत की डीओसी 25000-27000 रु. पर निर्यात को दबाव वाली सहायता नहीं दे पा रही है । खाद्यतेलों की  बायोडीजल पर आई मांग से भी सोयाबीन और खाद्यतेलों में भाव बढ़ने को भारी सहारा लगा बताते है ।   इधर चर्चा आम है कि खाद्यतेलों में मिलावट जारी है। जनता सोया तेल खा रही है या पामतेल ? उपभोक्ता जो सोयातेल का पुराना उपभोगकर्ता रहा है उनकी नजर में सोयातेल में अब वो खुशबु नहीं है जो घरो में छोंका लगाते वक्त आती थी । जब हाजिर व्यापार में सोयातेल और पामतेल भाव पर मात्र 6-7 रु. का फर्क है तो मध्यम तेल व्यापारी सोयातेल शुद्ध रूप से क्यों बेचेगा ? वह तो आयातित सस्ता पामतेल में सोयातेल अर्थात 50:50 का रेशो बनाकर बेच रहा है और भारी मुनाफा कमा रहा है । दूसरी तरफ घी, मावा - मिठाई में नकलीयता पर प्रादेशिक सरकार का कडाई से इस पर कोई ध्यान नहीं है । जांच एजेंसिया सुप्त प्राय: अवस्था में पड़ी है । देशभर में दूध की पैदावार क्या है ? क्या दूध के इतने परवर्ती उत्पादों की उत्पादकता देखकर सरकार की आंखे चौड़ी होगी ?  नकली घी, पनीर, मक्खन इत्यादि के रूप में असली-नकली का कारोबार भी भारी फलफूल रहा बताते है । जनता के स्वास्थ की किसी को नहीं पड़ी है । इधर जनता भी मालूम नहीं पामतेल सीधे खरीदकर क्यों नहीं खाती है जब सोयातेल के रूप में पामतेल खा रही है तो 7 रु. के बचत की क्यों नहीं खरीदने का सोच रही है । मगर जनता को नहीं मालूम है कि पामतेल और सोयातेल में क्या अंतर है तथा भारतीय जलवायु पर सेवन उचित भी है कि नहीं ।   बहरहाल इंदौर में चर्चा या धारणा आम है कि खाद्यतेलों पर अभी और तेजी जारी रह सकती है । इंदौर की संयोगितागंज मंडी एवं कृषक मंडियों में सोयाबीन की आवकें लगभग दो से ढाई हजार बोरियों की रही वही प्रदेश की मंडियों में आवकें 35 से 37 हजार बोरियों के बीच हो रही है । इंदौर में गत् हप्ते गुरुवार को मूंगफली तेल 940 से 960 रु., मुंबई मूंगफली तेल 860 रु. गुजरात लूज 830 से 840 रु. और राजकोट तेलिया 1340 रु. का भाव रहा ।  इंदौर सोया रिफाइंड 775 से 778 रु., इंदौर साल्वेंट 7400 से 745 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 748 रु., मुंबई पाम 740 से 742 रु. के  भाव रहे । इंदौर पामतेल भाव 770 से 772 रु. और कपास्या तेल 720  रु. तथा राजस्थान में सरसों कच्चीघानी 845 रु. का भाव रहा बताया गया ।   

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