दाल-दलहनों में राहत, तुवर दाल की मांग घटी


हमारे संवाददाता
गत् हप्ते दलहन-दालों पर दबाव वाली व्यापारीक मांग नहीं थी। सप्ताहांत तक अर्थात बीते गुरूवार को प्रदेश स्तर कुछ सरकारों ने नियत भाव से भाव पर खरीदी बेचवाली करने वालों का जेल की हवा खाने पड़ेगी के फरमान में दलहनों - दालों में कुछ तेजी दी। इससे चना और मसूर पर  सट्टात्मक तेजी हो गई। चना की बंपर पैदावार के आने के कारण और आयातित चने की भरमार के कारण चना का भाव भारी नीचे तक चला गया था। चना जो कि विगत् माह में 3400 रु. के अंदर चला गया था। सरकार के समर्थन मूल्य की घोषणा पर कुछ भाव सुधरते चले गये और कुछ तेजी के बाद गत् हपते गृरूवार को चना कांटा 3600 से 3625 रु. तक होना बताया जा रहा था। मसूर पर भी यही चाल रही और लगभग 200 रु. तक इसमें भी भाव उछल गये थे। पिछले एक माह में दलहनों पर जो मंदी का टोन रहा था वह आयात-निर्यात शुल्क के फेर में पुन: तेज हो गया था। जनता ने इसे व्यापारियों के हित में कदम बताया है। आयात निर्यात शुल्क का लाभ कभी जनता का नहीं मिला है। देश में इस वर्ष तुवॉर के अच्छे उत्पादन और महंगाई पर देश दाल-दलहनों पर भी मंदी का टोन रहा था जो शायद अब मंदी के महसूस से बाहर हो जाऐगा प्रतीत होता है। 
दालों पर खेरची में जनता को कोई राहत नहीं है। तुवॉर दाल 79-80 रु. पर तो कुछ व्यापारी 76-77 रु. पर बेच रहे है और मूंग दाल 80-95 पर रु. पर बेच रहे है। व्यापारियों के अनुसार ठंड-गर्मी दोनों में जनता की मांग में मूंग एवं दाल पर बनी रहती है इससे ऊंचे सौदागर तेजी की उम्मीद पर बैठे है। जबकि मूंग थोक में 5000 रु. से 5100 रु. है। 

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