वालमार्ट ने 16 अरब में खरीदी फ्लिपकार्ट


व्यापारेक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अमेरिकी की अग्रणी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट की तरफ से 16 अरब डॉलर में भारतीय ई रिटेलर कंपनी फ्लिपकार्ट की खरीदी की गई है।जिसको लेकर देश के अग्रणी व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आक्रमक रुख अख्तियार किया है और इस बात का आश्वासन चाहते है कि इस ई-कॉमर्स कंपनी के समझौते की आड़ में एफडीआई नीति का उल्लंघन नहीं किया जाए। जिसको लेकर सभी स्तरों पर जांच किया जाए और सख्त रेगुलेटरी का बंदोबस्त किया जाए।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस सौदे से संबंधित सभी पहलूओं की बारिकियों की जांच पड़ताल किया जा रहा हे और संबंधित विभागों और संस्थाओं तक अपनी चिंताएं पहुंचाने को लेकर प्रयासरत है।उन्होंने कहा कि अब मल्टी ब्रांड रिटेल ट्रेड में एफडीआई,डेटा सेक्योरिटी,ट्रेड कॉम्पिटीशन और ट्रेड प्रैक्टिस से सबंधित चिंताएं बढ गई है।उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा रिटेलर देश के सबसे बड़े ई-कॉमर्स को कब्जा कर चुप नहीं बैठेगा।ऐसे में वह उत्पादन से लेकर मार्केट प्लेस, इनवेंटरी, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सभी चेन में दखल रखेगा और भारतीय रिटेल व्यापार का समाप्त करने की हद तक जाएगा।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद श्री श्याम बिहारी मिश्रा एवं बीयूवीएम के राष्ट्रीय महामंत्री श्री विजय प्रकाश जैन ने संयुक्त बयान में कहा कि वॉलमार्ट ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय मल्टी ब्रांड रिटैल ट्रेड में विदेशी पूंजी लाएगा और घरेलू रिटेल व्यापार को लेकर बड़ी चुनौती बनेगा।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से इस समझौते की सभी स्तरों पर जांच किया जाए और सख्त रेगुलेटरी का बंदोबस्त किया जाए।
चैम्बर ऑफ ट्रेड इंडस्ट्री के संयोजक श्री ब्रिजेश गोयल ने इस विषय को लेकर प्रश्न उठाया कि केद्र सरकार इस समझौते पर चुप क्यों है।उन्होंने ई-कॉमर्स को लेकर एक रेगुलेटरी संस्था गठित करने की मांग की है और आशंका व्यक्त की है कि अब वॉलमार्ट का जोर विशाल पुंजी और डिस्काउंट के दम पर छोटे रिटलर्स को बाजार से बाहर करने का होगा।

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