कमोडिटी बाजार लम्बी छलांग लगाने के लिए तत्पर : 1990 के शेयर बाजार जैसे बनते संयोग


समीर धोलकिया
(डायरेक्ट-बैलेन्स कमोडिटी डेरिवेटिव्स (इंडिया) प्रा. लि.)
मुंबई। कमोडिटी बाजार (मार्केट) इस समय मौजूदा स्तर पर खूब लम्बी छलांग लगाने को उत्सुक लग रहा है। जैसे 1990 के बाद भारतीय शेयर बाजार नये निवेशकों, स्वदेशी और विदेशी वित्तीय संस्थाओं और एलआईसी के अतिरिक्त अन्य बीमा कंपनियों का आगमन के साथ विश्व के प्रमुख बाजारों में पहुंचा था।
सरकार और सेबी का कमोडिटी बाजार की ओर सकारात्मक रुझान देखते हुए कमोडिटी बाजार आनेवाले समय में लम्बी छलांग भरे ऐसा लगता है। भूतकाल की स्थिति तो नहीं होगी लेकिन कमोडिटी बाजार में सुधार रहे और उससे देश के किसान, वर्ग बड़े कमोडिटी के निर्यातकों और उपभोक्ताओं को मदद मिले, उसके लिए संकलित और श्रृंखला बद्ध कदम उठाए है।
सरकार ने पहले कदम उठाकर सेबी ने कमोडिटी बाजार का नियमन सौपा। उसके बाद सेबी ने अगले कदम के तहत ढांचागत सुधार करके संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई फेर बदल नियमों में किया। कमोडिटी एक्सचेंज चलाने के नियमों में भी बहुत भारी फेरबदल किया और नई मार्गदर्शिका के माध्यम से बीएसई और एनएसई को भी कमोडिटी एक्सचेंज चालू करने की मंजूरी प्रदान की। इसके अतिरिक्त एमसीएक्स और एनसीडेक्स को भी शेयर कामकाज करने की छूट दी। सेबी इतने में भी नहीं रुकी और कमोडिटी बाजार के विकास के लिए श्रृंखलाबद्ध निर्णय लेता रहा। इसलिए उसने कमोडिटी में आप्शन्स कोन्ट्रक्ट की मंजूरी दी गई। जिसके तहत आल्टरनेटिव इन्वेस्टमेन्ट फंड्स को कमोडिटी बाजार में हिस्सा लेने की छूट दी गई। अब यह मानने को आता है कि सेबी म्युच्युअल फंड्स और दूसरी संस्थाकीय निवेशकारी को भी कमोडिटी वायदे में भाग लेने की छूट देगी।
इसमें अगर अंतराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को भी कमोडिटी बाजार में प्रवेश की छूट दे तो (जो आगे वाले समय में संभव है) भारतीय कमोडिटी बाजार विश्व के बड़े कमोडिटी की तुलना में ही कम समय में पहुंचने की संभावना है।
दूसरी ओर दो पुराने और एक नया कमोडिटी एक्सचेंज भी इसका लाभ लेने में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहते है। जो उपभोक्ताओं के लिए बहुत अच्छा रहेगा। जिससे नये  निवेशकों को अच्छा किफायती और सुरक्षित सेवा मिलेगी। इसमें भी बाजी मार लेंगे।
इतने सारे कमोडिटी एक्सचेंज को पूरा धंधा मिल सकेगा? इस सवाल के जवाब में एक्सचेंज के अधिकारी ने यह कहा कि कमोडिटी में दो एक्सचेंज जैसे कई-कई कमोडिटी में अग्रता रखते है, उससे भी आगे जाते हुए प्रत्येक एक्सचेंज खुद ही कमोडिटी ढूढकर उसका मार्केट हिस्सा पर शेयर करके कब्जा करने लगेंगे। उनके कहने के अनुसार अभी बाजार में 50 से 60 कमोडिटी ऐसी है जिनकी मंजूरी मिली है। लेकिन उनमें वायदा शुरू नहीं हुआ है। लेकिन अब नये एक्सचेंज के आगमन के साथ प्रत्येक कमोडिटी बाजार में मार्केट विकसित होगा यह निश्चित है।
इसके साथ कमोडिटी एक्चेंज वेयर हाऊस रसीद में डिमेट करके वायदा व्यापार के साथ कमोडिटी हाजिर बाजार को शामिल करने का प्रयास हो रहा है। जिससे कमोडिटी बाजार सिर्फ वायदा और सट्टा के लिए है, ऐसी छाप दूर करने के लिए एक्सचेंज, सरकार और सेवी द्वारा संयुक्त प्रयास हो रहा है।

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