2018-19 के कपास मौसम में विश्व में बोआई बढ़ेगी, भारत में घटेगी : आईसीएसी का अनुमान

2018-19 के कपास मौसम में विश्व में बोआई बढ़ेगी, भारत में घटेगी : आईसीएसी का अनुमान

मुंबई। कपास वर्ष 2017-18 के दौरान विश्वभर में कपास और रुई के भाव ऊंचे रहे थे। इसका असर किसानों की मानसिकता पर पड़ने के कारण कपास की बोआई अधिक होने का अनुमान अंतरराष्ट्रीय काटन एडवाइजरी कमेटी (आईसीएसी) ने लगाया है। गत दस वर्ष के दौरान विश्व में कपास की बोआई औसतन 324 लाख हेक्टर में हो रही है। इसमें इस वर्ष थोड़ा इजाफा होने की संभावना है।
अमरिका में कपास की बोआई गत वर्ष की तुलना में करीब 11 प्र.श. बढ़कर 50.8 लाख हेक्टर में होगी। जबकि भारत में गत वर्ष के 1.22 लाख हेक्टर की तुलना में इस वर्ष 11.9 लाख हेक्टर में कपास की बोआई होने का अनुमान है। जबकि चीन में कपास का रकबा पूर्ववत् रहने का कयास लगाया गया है।
अमरिका के कुल कपास उत्पादन में 25 प्र.श. योगदान करनेवाले पश्चिम टेक्सास में बारिश की कमी और तेज गरमी के चलते फसल को नुकसान पहुंचने की संभावना है। किसान व कपड़ा उद्योग प्रार्थना कर रहा कि देश में पुन: पिंक वर्म की आफत न टूट पड़े।
स्थानीय रुई बाजार स्थिर है। दैनिक आमद करीब 70000 गांठ की रही है। और एक महीना तक चालू रहने की संभावना है। सीसीआई के अनुसार 26 अप्रैल तक 305 लाख गांठ कपास आमद हो चुकी है। इसमें गुजरात में 70.90 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 77.23 लाख गांठ, और तेलंगाना में 46.50 लाख गांठ की आवक हो चुकी है।
स्मरणीय है कि गत सप्ताह व्यापारी वर्ग, सीसीआई व गुजकार के अनुसार गुजरात में 90 से 95 लाख गांठ की आमद हो चुकी है।
फार्म-टू-फैशन ग्लोबल समीट
गुजरात चेम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित `फार्म-टू-फैशन इंडियन टेक्सटाइल ग्लोबल समीट-2018' में वक्तव्य देते हुए काटन गुरु ने कई महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए। काटन गुरु ने प्रमुख व्यापारियों, जिनरों व स्पिनरों से चर्चा की और उत्पादन बढ़ाने के विभिन्न सुझाव दिए। साथ ही प्रमाणित बीज और सही उत्पादन अनुमान की व्यवस्था करने पर जोर दिया।

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