स्थानीय में निर्मित माल की मांग में निरंतर वृद्धि

स्थानीय में निर्मित माल की मांग में निरंतर वृद्धि

हमारे संवाददाता
ग्राहकी की कमी नहीं है। उत्पाद चाहे प्लेन हो, डाईड हो या प्रिन्टेड हो, बालोतरा - जसोल निर्मित माल की मांग में निरंतर बढ़ोतरी जारी है। वर्तमान स्थिति पूरे महीने तक यथावत् रहने की धारणा है, उसके बाद आंधी, तूफान व बरसात के कारण यह गति थमने की संभावना है। फिलहाल उद्यमी उत्पादन पूर जोर लेने को व्यग्र है, परंतु श्रमिकों के अभाव के चलते उद्यमियों को आंशिक सफलता ही मिल रही है। स्थानीय श्रमिकों पर आधारित उद्यमियों को विशेष परेशानियों से रू-ब-रू होना पड़ेगा और जिन उद्यमियों ने बाहरी (यू.पी.-बिहार) श्रमिकों को कार्यरत किया है उन्हें यह दंश नहीं झकझोर सकेगा।
रकम की आवक विगत माह की तुलना में अपेक्षाकृत कम होने पर भी संतोषजनक है। माल की चालानी में अंतर पड़ा है, परंतु रकम की आवक में बहुत कुछ सुधार हुआ है। अन सोल्ड माल का जाना अब संभव नहीं बनने से कई झंझटों से छुटकारा मिला है। उद्यमियों की सोच नवीनीकरण व आधुनिकतापूर्ण संयंत्रों को संजोने की ओर अब विशेष है। उन्हें लग रहा है कि आनेवाले समय में मजदूरों का मिलना दुष्कर नहीं तो कठिन और अधिक हो जायेगा। जिसका एकमात्र समाधान ओटोमाईजेशन ही है। स्वचालित कार्य प्रक्रिया के अस्तित्व में आने के लिये टफ्स स्कीम का दृष्टिकोण उदार बनाने की दरकार है, अन्यथा बड़े उद्यमी तो लाभान्वित पूर्व की तरह ही होते रहेंगे परंतु छोटे उत्पादक महरूम ही रह जाएंगे। सरकार को छोटे-छोटे उद्योगों के अस्तित्व को बनायें रखने हेतु सुविधाजनक उपायों को अमलीजामा पहिनाने की पहल करनी चाहिए। गहन चिन्तन के साथ छोटे उद्योगों का सर्वेक्षण किया जाए और सर्वे के आधार पर उनकी मूलभूत समस्याओं के निराकरण को प्रश्रय दिया जाय तो रोजमर्रा कम होती छोटे उद्योगों की गिनती, यथावत् बनी रह सकती है।
प्रदूषण की भयावहता सर्वविदित है। हर संभव प्रयासों के बावजूद भी इस पर पूर्ण नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। प्रदूषण की हालत तो यह है कि `ज्यों ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता ही गया।' प्रदूषण को मापने का जो तरीका शब्दों व मिडिया के वर्गीकरण में है, वह वास्तव में देखा जाय तो एक पक्षीय ही खरा उतरेगा। इसके लिये स्वतंत्र समिति हो जो सभी दृष्टिकोणों का मूल्यांकन कर एक सार्थक नीति को अंजाम दे। छोटे उद्यमियों का जो इस बहाने शिकार हो जाता है, उसमें राहत के स्वर का संचार होगा। बड़े उद्यमी अपने कौशल, राजनैतिक प्रभाव व अन्य कारणों से अपने बचाव को सक्षम बनाने में सफल रहते है, परंतु सामान्य उद्यमी को कितनी पीड़ा झेलनी पड़ती है, इसका वर्णन संभव नहीं है, परंतु पीड़ा को समझा जा सकता है। जब कभी यह अफवाह घर कर जाती है कि प्रदूषण के संदर्भ में यह होने जा रहा है और उत्पादन बंद हो जायेगा, उस वक्त बड़े उद्यमी इतने हतोत्साह नहीं होते, परंतु सामान्य छोटे उद्यमियों की हालत इतनी पतली हो जाती है कि उसे बयान भी नहीं किया जा सकता है। बालोतरा-जसोल के सीईटीपी संयंत्रों को जागरुक दृष्टियों द्वारा आधुनिकतम रूपदेने के यत्न किये जा रहे है, उनसे लगता है, अब तक चली आ रही दुविधाओं का अंत हो सकेगा और भविष्य औद्योगिक विकास के लिये उज्ज्वल व सशक्त मार्ग प्रशस्त का माध्यम बनने की पूरी आशा है।
कतिपय मूलभूत समस्याओं को समाप्त करने की दिशा में ठोस कार्य प्रक्रिया को स्थापित किया जाय तो वह दिन दूर नहीं है जब इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास चरम सीमा पर हो। बालोतरा-जसोल, कई उत्पादनों के मामले में एक ब्रान्ड रूप में सर्वदा देशभर में ख्याति अर्जित की है और इसमें चार चांद लग सकते ह।

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