14 राज्यों के 202 जिलों में चलेगा उप मिशन : मोटे अनाजों को लेकर शुरू होगा छोटा अभियान

14 राज्यों के 202 जिलों में चलेगा उप मिशन : मोटे अनाजों को लेकर शुरू होगा छोटा अभियान
 
देश के 50% असिंचित क्षेत्रों में मोटे अनाजों की खेती को मिलेगा बढ़ावा
 
हमारे संवाददाता
केद्र सरकार की तरफ से छोटे अनाज की खेती को बढावा देने को लेकर एक छोटा अभियान शुरु करने की तैयारी में है।जिससे अब ज्वार-बाजार और सांवा-कोदो जैसी फसलों की खेती के दिन सुधरेंगे।जिसको लेकर 2018 वर्ष को मोटे अनाज वर्ष किया गया है।चूंकि स्वास्थ्य की दृष्टिगत मोटे अनाज को पौष्टिक अनाज की श्रेणी में डालने से इन फसलों की मांग में तेजी से बढोतरी हो रही है।जिससे स्वभाविक है कि मोटे अनाज की तरफ किसानों की रुचि बढेगी।
दरअसल मोटे अनाज की खेती को बढावा देने को लेकर चलने वाले अभियान के प्रथम चरण में देश के 14 राज्यों के 202 जिलों में अभियान की शुरुआत की जाएगी।यह उप मिशन अगले दो वर्ष़ों यानि कि 2018-19 और 2019-20 को लेकर होगा।जिसको लेकर मोटे अनाज वाली फसलों की खेती और इसकी उपज के प्रसंस्करण को लेकर देश भर में कुल 11 राज्यों में 115 किसान उत्पादक संगठनों का भी गठन किया जाएगा।जिसके तहत मोटे अनाजों के प्रसंस्करण की दिशा में भी कारगर पहल होगी ताकि उत्पादक किसानों को इसका भरपूर लाभ मिल सकेगा।जिसको लेकर किसान संगठनों और प्रोसेसिंग उद्योग को बढावा देने की तैयारी चल रही है।जिसको लेकर केद्रीय कृषि आयुक्त डॉक्टर श्री सुरेश मल्होत्रा का कहना है कि केद्र सरकार ने मोटे अनाजों को बढावा देने की योजना तैयार की है। जिसके तहत इस उप मिशन को लेकर उन्नत प्रजाति के प्रमाणित बीज किसानों को मुहैया कराए जाएंगे।डॉ.मल्होत्रा का कहना है कि मोटे अनाज फसल की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा।इन फसलों में पोषक तत्वों को बनाए रखने और बढाने पर भी जोर दिया जाएग।ऐसे में जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है वहां स्पिंकल प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया जाएगा ताकि कम पानी से भी उत्पादकता बढाने में मदद मिल सकेगी।
उल्लेखनीय है कि देश की कुल खेती योग्य भूमि का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा असिंचित क्षेत्र है जहां खेती बारिश पर आधारित है।ऐसे में इन क्षेत्रों में कम सिंचाई वाले मोटे अनाज वाली फसलों की खेती होती है।जिसके तहत देश में मोटे अनाज की मांग में भारी बढोतरी हुई है।जिससे खुले बाजार में मोटे अनाज की कीमत बढ गए है।जिसको लेकर कई कम्पनियों ने इस फसलों को पैकिंग करके खुले बाजार में उतार दिया है जिसकी अच्छी खासी बिक्री हो रही है और आगे कारोबार का दायरा बढने की उम्मीद परिलक्षित हो रही है।

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