वैश्विक बाजार तेज होने से सोया-पाम में तेजी : सरसों और मूंगफली तेल में मंदी का वातावरण

वैश्विक बाजार तेज होने से सोया-पाम में तेजी : सरसों और मूंगफली तेल में मंदी का वातावरण

हमारे संवाददाता
गत् हप्ते सोया, पाम तेल मे तेजी हुई। वैश्विक बाजार की तेजी के चलते सट्टे के सोया-पाम खाद्यतेल की थोक मंडी में तेजी रही। हांलाकि व्यापारिक मांग अधिक नहीं निकल रही होने से भी वायदा बाजार की तेजी की चाल हाजिर व्यापार को भी तेजी दे रहा बताया जा रहा है। व्यापारिक क्षेत्रों से मिली खबर के अनुसार गर्मी के मौसम में भारतीय और चीन की आयातकों की मांग पाम और सोयातेल में अधिक निकल रही है। विदेशी उत्पादक क्षेत्रों और वायदा व्यापार में गत् हप्ते तेजी के वातावरण से भारतीय बाजार भी तेज हुऐ बताऐ जा रहे है। सोयाबीन पर भारतीय बाजार में मंदी है मगर विदेशों में निर्यात मांग चीन तरफ से अधिक होने से वहां सोयाबीन तेज बताया जा रहा है। इससे सोयातेल की भी तेजी का वातावरण रहा है। भारतीय बाजारों में जबकि सरसों और मूंगफली तेल में मंदी जारी रही। विदेशी बाजारों में मलेशियन केएलसीई और शिकागों सोयातेल वायदा गत् हप्ते अधिक  प्रभावी था। इससे भारतीय बाजार भी अछूते नहीं थे। विश्वस्तर पर सोया डीओसी की भारी कमजोर मांग के चलते सोयाबीन में तेजी नहीं रही है बताया जा रहा है। हांलाकि गत् हप्ते सोयाबी पर हल्की तेजी रही। भाव 3650 से वापिस 3700 रु. तक होना बताएं जा रहे है। इस वर्ष पड़ रही भारी गर्मी का असर कृषि क्षेत्र को भी चिंता में डाले हुये हø। जमीनों में पानी उतरता जा रहा है और इंफ्रस्टक्चर का विकास तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल गर्मी अधिक रहने से मानसून की अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कोई वर्ष जल्दी आता है तो पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है और कोई वर्ष देर से आता है तो बीजाई प्रभावित होने लगती है। किसानो की चिंता और जनता की भी चिंता है कि अधिक बढ़ते इंफ्रास्टक्चर से कृषि भूमिया कम होती जा रही है और सरकार के पोत्साहन कृषि को बढ़ाने के बजाय ललचाने वाले विषय - योजनाएं अधिक  चिंता में डालने वाले हो रहे है। इससे संपन्न किसान आरामी का फायदा उठाने लगे है और मूल कृषक गाढ़ी मेहनत का भी फायदा नहीं उठा पा रहा है। 
देश में पिछले वर्ष़ों से तिलहनों की अनुकूल परिस्थितां जनता के लिये लाभकारी नहीं रही।  खेती की जमीने कम होती जा रही है देश को मजबूत आधार देने के कृषि प्रयास कम हो रहे और लुभावने सपने अधिक है और आयात पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे है जो देश के भविष्य के लिये घातक है। महंगाई और खाद्यतेलों के भाव को नियंत्रित करने हेतु सरकार कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही प्रतीत होती है। सटोरिये सरकार के ढुलमुल कार्यक्रमों का बेजा फायदा उठा रहे है। वायदा बाजार के चलते सटोरियों की बनती चली जा रही है। सोयाबीन नीचे और रुपया गिरने से पिछला आयातित सस्ता तेल वे मजबूती बनाये रखने में सफल हो रहे है। छोटा व्यापार जगत् वायदा बाजार से परेशान है। उनके अनुसार बड़े हाजिर-वायदा व्यापार-सटोरिया जगत् भाव बढ़ाने और गिराने के सापेक्ष काम करते है। गत् हप्ते प्लांटो द्वारा सोयाबीन खरीदी 3650-3700 रु. पर करना बताया गया। देश मे तिलहनो का स्टॉक, प्लांटों की क्षमता का चलना और तेल आपूर्ति पर भारी जांच की आवश्यकता है। भाव बढ़ाने हेतु इनका सापेक्ष संबंध हो सकता है? बाजार पटे पड़े है टीन के डिब्बो से। आयातित खाद्यतेल किस रास्ते आ रहा है और बाजार में इसकी निकासी कहां से हो रही है? घाल-मेल में नकली बनकर कितना निकल रहा है? म.प्र. भंडारे करने का प्रदेश हो गया है। भंडारे बढ़ने से शुद्व घी की खपत बढ़ती जा रही है। देश भर की 130 करोड़ जनता के घरों की भी पूर्ति हो रही है। कैसे? जबकि देश में दूध का उत्पादन इतना नहीं है। सरसों तेल वालों की तो अधिक पौबारह ऐसेंस मिलावट के धंधे में हो रही प्रतीत होती है। अथाह स्टॉक को ऊंचे भाव पर भारी मुनाफा वसूली में तेल निकाला जा रहा है। गत् हप्ते 748-750 रु. से बढ़ते हुऐ गुरूवार तक  760-763 रु. तक होना बताया जा रहा था। मूंगफली तेल में 20 से 30 रु. मंदी के भाव 870 से 890 रु. प्रति 10 किलो होना बताया जा रहा था। इंदौर में व्यापार कच्ची चिट्ठी पर धड़ल्ले से जारी है। जनता बिल मांगती है तो जीएसटी की चाल व्यापारी चलता है जिससे भाव अधिक महसूस होने पर जनता भी बिल लेने से सहम जाती है। व्यापारियों के अनुसार देखा जाय तो घरेलू बाजारों में सोया तेल की मांग कमजोर है मगर फिर भी सोया तेल मई से जुलाई 2018 का वायदे में तेज  है? बहरहाल, गत् हप्ते इंदौर मूंगफली तेल 870 से 890 रु., मुंबई मूंगफली तेल. 850 रु., गुजरात लूज 810 रु., और राजकोट तेलिया 11290 से 1300 रु. के भाव रहे। इंदौर सोया रिफाइंड 760 से 763 रु., इंदौर साल्वेंट 728 रु. से 730 रु. मुंबई सोया रिफाइंड 750 -752 रु., मुंबई पाम 720 रु., और इंदौर पाम तेल 760 रु. के भाव रहे। इंदौर कपास्या 720 रु., और राजस्थान सरसों कच्चीघानी तेल 830 रु. के भाव रहै।

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