रुपए में भारी मंदी टेक्सटाइल, हैंडीक्रॉफ्ट व लेदर का सुधरेगा निर्यात

रुपए में भारी मंदी टेक्सटाइल, हैंडीक्रॉफ्ट व लेदर का सुधरेगा निर्यात

रमाकांत चौधरी 
 नई दिल्ली । पिछले दिनों डॉलर की तुलना में रुपए पद्रह महीने के निचले स्तर पर रह गया।जिससे भारतीय वस्तुओं की निर्यात लागत अपेक्षाकृत कम होगी।जिससे अब टेक्सटाइल, हडीक्रॉफ्ट व लेदर का निर्यात अधिक सुधरने के आसार है।जिससे निर्यातकों के समक्ष निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुख बनेगा।जिससे स्वभाविक है कि भारतीय निर्यातकों के चेहरे खिल गए है और अभी से विभिन्न वस्तुओं के निर्यात बढाने को लेकर अग्रसर हो गए है। 
दरअसल पिछले दिनों डॉलर की तुलना में रुपए पद्रह महीने के निचले स्तर पर रह गया।ऐसे में एक डॉलर की कीमत 67 रुपए रह गया।जिससे अब भारतीय वस्तुओं के होने वाले निर्यात में पड़तल लगेगी।जिससे मंदी से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों को भारी राहत मिलेगी जिससे भारतीय निर्यातकों के चेहरे खिल गए है।जिसको लेकर भारतीय निर्यातकों की तरफ से निर्यात के मोर्चे पर अभी से कारोबारी सक्रियता बढा दी गई है।जिसके तहत हैक्टाइल,हडीक्रॉफ्ट व लेदर का निर्यात में व्यापक रुप से सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा।जिससे भारतीय निर्यातकों के समक्ष सकारात्मक रुख बनेगा।हालांकि रुपए की मंदी चलते  अब फार्मा व आई क्षेत्र को भी निर्यात सुधरने का मौका मिलेगा जिससे इनके निर्यातकों के समक्ष सकारात्मक रुख बन गया है।ऐसे में आईटी सेक्टर में कारोबारी मार्जिन सुधरेगा जिससे इस क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।यद्यपि पेट्रोलियम जैसे सेक्टर को आयात में अधिक निर्भरता रहता है।जिसके तहत रुपए की हैजिंग से इसका असर कम होता है।बहरहाल रुपए की मंदी से रत्न एवं आभूषण सेक्टर को घरेलू मांग घटने की आशंका है।जिसके बावजूद रुपए की मंदी से अधिकतर क्षेत्रों को व्यापक फायदा पहुंचने की उम्मीद है।ऐसे में भारतीय निर्यातकों को दूसरे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में टिके रहना पड़ता है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से लॉजिस्टक और ट्रांजेक्शन कॉस्ट कम करने और बुनियादी ढांचा को बेहतर करने पर विशेष रुप से ध्यान केद्रित करना होगा।जिससे भारतीय निर्यातकों को निर्यात के मद में सहूलियत बढेगी।जिससे स्वभाविक है कि भारतीय वस्तुओं का अधिकाधिक निर्यात का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

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