वाराणसी वीवर्स हब की बुनकरों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की मुहिम

वाराणसी। वाराणसी ने भारत को बनारसी साड़ी दी है, जो भारतीय वार्डरोब में फिर से जगह बना रही है। देश में टेक्सटाइल्स क्षेत्र दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है, लेकिन वह अभी भी असंगठित बना हुआ है। यहां के बुनकर कभी भी डिजाइनर या उद्यमी के स्तर तक नहीं पहुंच सकें।
इसमें बदलाव लाने के लिए 2015 में सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भूतपूर्व सरकारी कर्मचारियों के समूह द्वारा वाराणसी वीवर्स हब के रूप में जानी जाती वाराणसी वीवर्स एंड आर्टिसन्स सोसायटी की स्थापना की गई। जिसका उद्देश्य वाराणसी के प्रमाणिक हैंडलूम के जरीदार उत्पादों को बढ़ावा देना था। यह सोसायटी विशुद्ध रूप से उचित व्यापार मानकों पर केद्रित है और बुनकरों को कोआपरेटिव बनाने के साथ उन्हें उद्यमी बनने में मदद करती है। यह इस क्षेत्र को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से संगठित करने का प्रयास कर रही है।
सदस्यता माडल के आधार पर हर बुनकर उसकी कारोबार बढ़ाने की विभिन्न पहलों में हिस्सा लेने के लिए सोसायटी का पेड मेम्बर बनता है। इस तरह वे आर्टिसंस डायरेक्टरी का भी हिस्सा बनते है।
इस समय इस सोसायटी के बुनकर समुदाय के लगभग 5000 सदस्य है। वाराणसी वीवर्स हब टेक्सटाइल उद्योग की श्रेष्ठ पद्धतियां अपनाने और अति जरूरी कारोबारी कुशलता के साथ बुनकरों की आपूर्ति करने का प्रयास कर रही है।
बुनकरों एवं कलाकारों को डिजाइन में सुधार करने एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए नियमित रूप से कार्यशालाओं में आमंत्रित किया जाता है।
हैंडलूम क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण पहल एआईएसीए का ट्रेड मार्क, क्राफ्टमार्क है, जो दर्शता है कि फेब्रिक परिधान असली है तथा भारत में पूर्णत: हस्त निर्मित है। एआईएसीए की एक्जिक्युटिव डायरेक्टर ने बताया कि हम हमारे सभी सदस्यों को मार्केट सुविधा सपोर्ट प्रदान करते है। इस समय फैब इंडिया सहित सिर्फ कुछ मुख्य ब्रांड है, जो अपने परिधान के लिए क्राफ्टमार्क का उपयोग करते है।
हैंडलूम क्षेत्र के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पावरलूम्स की संख्या में वृद्धि है। हैंडलूम पर निर्मित कपड़े की तुलना में पावरलूम कपड़ा काफी सस्ता होता है। इसका सामना करने के लिए वाराणसी वीवर्स हब जैसी संस्थाएं बुनकरों को तैयार बाजार ऑफर करने का प्रयास कर रही है।
सोसायटी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि हम आमतौर पर पुरानी डिजाइन पर निर्भर नहीं रह सकते। नई डिजाइन के बगैर बाजार मिलना मुश्किल होगा।
यदि यह माडल वाराणसी से आगे अन्य वीविंग हब तक पहुंचता है तो यह `मेक इन इंडिया' मनाने का कदाचित् उचित समय होगा।

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